भारत नॉर्थ-ईस्ट से लेकर जम्मू कश्मीर तक 24 एयरपोर्ट्स-हेलीपैड बनाने की योजना में, चीन सीमा पर होगा पुख्ता इंतजाम
नई दिल्ली। भारत सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए नॉर्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर में एयरपोर्ट्स और हेलीपैड बनाने की योजना बना रही है। भारत सरकार के रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के दूसरे चरण में 24 एयरपोर्ट्स और हेलीपैड तैयार किए जांएगे, जिसके लिए जगहों की भी पहचान की जा चुकी है। इस प्रोजेक्ट में एयरपोर्ट और हेलीपैड चीन की सीमा से सटे भारत के पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर में बनाए जाएंगे।

इस प्रोजेक्ट में 24 एयरपोर्ट और हेलीपैड में से 9 अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर में पांच-पांच, दो जम्मू कश्मीर और एक-एक मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा में बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर का काम करने और एयरपोर्ट व हेलीपैड स्थापित करने की योजना, डोकलाम गतिराध के चार दिन बाद ही शुरू हो गई थी।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारत के नॉर्थ-ईस्ट इलाकों में कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा, जिसमें खासतौर से चीन की सीमा से सटे भारत के पूर्वी राज्य अरूणाचल प्रदेश और उत्तर में जम्मू कश्मीर शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में सिर्फ छह एयरपोर्ट्स नॉर्थ ईस्ट में स्थापित किये गए थे, जिसमें शिलोंग, इंफाल, सिल्चर, आइजौलस और अगरतला शामिल है। पहले चरण में जम्मू कश्मीर को नजरअंदाज किया गया था, लेकिन इस दो एयरपोर्ट और हेलीपैड स्थापित करने की योजना है।
नॉर्थ-ईस्ट में कई एयरपोर्ट्स को इंडियन एयरफोर्स के लिए उपयोग में लिया जा रहा है। वर्तमान में अरूणाचल प्रदेश के वालोंग, दपोरिजो, यिंगहोंग, जीरो, पासीघाट और टुटिंग वहीं, जम्मू कश्मीर के किश्तवार और करगिल में एयरपोर्ट्स को इंडियन एयरफोर्स ऑपरेट कर रही है। सूत्रों के माने तो नागरिकों के लिए जल्द ही अलग से एयरपोर्ट्स का निर्माण किया जाएगा।
एयरपोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के मुताबिक, देश के नॉर्थ-ईस्ट इलाकों में एयर कनेक्टिविटी की कमी होने के कारण आपाताकाल में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। AAI ने साथ में यह भी स्पष्ट किया है कि युद्ध के वक्त ये एयरपोर्ट्स सेना के कंट्रोल में होंगे।












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