चंद्रयान-1 की मदद से चांद पर पानी के साक्ष्यों का पहला नक्शा तैयार
नक्शा भारत के अंतरिक्ष यान चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से प्राप्त डेटा के आधार पर बनाया गया है
नई दिल्ली। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की मिट्टी की सबसे ऊपरी सतह में मौजूद जल के साक्ष्यों का पहला वैश्विक नक्शा तैयार किया है जिसमें भारत के पहले चंद्र मिशन 'चंद्रयान-1' की मदद ली गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चंद्रमा में पानी होने के साक्ष्य सिर्फ ध्रुवीय क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये चंद्रमा की पूरी सतह पर मौजूद हैं। इससे फ्यूचर में चांद के बारे में रिसर्च में मदद मिलेगी।

नक्शा भारत के अंतरिक्ष यान चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से प्राप्त डेटा के आधार पर बनाया गया है। साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन का आधार वर्ष 2009 में चांद की मिट्टी में जल और संबंधित अणु हाइड्रॉक्सिल की शुरुआती खोज है।
अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने नासा के मून मिनरलॉजी मैपर के जरिये जुटाये गये आंकड़ों का इस्तेमाल किया। मैपर चंद्रयान-1 के साथ रवाना हुआ था और इसका काम यह पता लगाना था कि वैश्विक स्तर पर कितना पानी मौजूद है।
विश्वविद्यालय में पीएचडी के पूर्व छात्र शुआई ली ने कहा, चांद की सतह पर लगभग हर जगह पानी की मौजूदगी के संकेत मिलते हैं, यह केवल धुव्रीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है जैसा कि पहले रिपोर्ट में बताया गया था। चंद्रमा के नक्शे को तैयार करना धरती के नक्शे को तैयार करने जितना आसान नहीं है, क्योंकि पृथ्वी का नक्शा तैयार करने के दौरान भूगर्भीय ब्यौरों के बारे में संदेह होने पर जानकारी की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक व्यक्तिगत रूप से उस स्थान पर पहुंच भी सकते हैं, लेकिन चंद्रमा पर ऐसा संभव नहीं है।












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