India Pakistan Tension: 'युद्ध में पाकिस्तान के साथ खड़े हम', ISI के पिट्ठू पन्नू की भारत के खिलाफ जहरभरी चाल
India Pakistan Tension: देश के दुश्मन अब सिर्फ सरहद पार से नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से भी वार कर रहे हैं। जैसे ही जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की मौत से भारत का खून खौला, वैसे ही अमेरिका में बैठा खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू एक बार फिर जहर उगलने वाला वीडियो लेकर सामने आ गया।
इस बार उसने जो कहा, वो न सिर्फ भारत की अखंडता पर सीधा हमला था, बल्कि पंजाबियों और सिख सैनिकों की देशभक्ति को भी ललकारने की घटिया कोशिश।

'पाकिस्तान हमारा दोस्त है!' - पन्नू की गद्दारी का खुला ऐलान
'सिख फॉर जस्टिस' नामक प्रतिबंधित संगठन का यह चेहरा अब एक आतंकी प्रोपेगेंडा मशीन बन चुका है। पन्नू ने खुलेआम भारतीय सेना के सिख जवानों से अपील की कि वे पाकिस्तान से युद्ध की स्थिति में लड़ाई न करें। उसका दावा था कि पाकिस्तान दुश्मन नहीं, बल्कि 'पंजाब को आजादी दिलाने वाला मित्र' है। यही नहीं, उसने यहां तक कहा कि 'भारतीय पंजाब, पाकिस्तान की सेना के लिए लंगर परोसेगा।'
इतिहास की गवाही: पंजाब के बेटे, भारत के सपूत
क्या पन्नू यह भूल गया है कि 1971 की जंग में पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाले भी पंजाबी ही थे? लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा की अगुवाई में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय फौज के सामने आत्मसमर्पण किया था। दुनिया की इतिहास में यह सबसे बड़े सैन्य आत्मसमर्पणों में से एक है। उस जीत ने बांग्लादेश को जन्म दिया और पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए। क्या उसे कारगिल की याद नहीं जहां कैप्टन विक्रम बत्रा, परमवीर चक्र विजेता अमरदीप सिंह ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर देश की रक्षा की? पंजाब का इतिहास लंगर परोसने का नहीं, बलिदान और वीरता का रहा है।
पाकिस्तान को 'पाक' बताने वाला, गद्दारी में कितना 'शरीफ'?
पन्नू कहता है कि पाकिस्तान का नाम ही पाक है। लेकिन क्या उसने भूल गए 26/11, पुलवामा, उरी, और कश्मीरी पंडितों की चीखें? पाकिस्तान, जिसने भारत के खिलाफ एक छद्म युद्ध छेड़ रखा है, वही आज पन्नू जैसे गद्दारों का संरक्षक बन बैठा है। पंजाब ने हमेशा अपने बेटों को सरहद पर भेजा, गद्दारों के साथ नहीं।
पन्नू: ISI का मोहरा
इसमें कोई संदेह नहीं कि गुरपतवंत सिंह पन्नू अब महज़ एक अलगाववादी नहीं, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का एजेंट बन चुका है। उसकी हर वीडियो, हर नारा - 'पाकिस्तान-खालिस्तान ज़िंदाबाद' - इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह आंदोलन अब जनभावना नहीं, बल्कि ISI का प्रायोजित प्रोपेगेंडा है।
पन्नू की सोच से पंजाब नहीं, पाकिस्तान खुश होता है
पन्नू के बयान- 'पाकिस्तान हमारा मित्र है', 'हम पंजाब को आज़ाद करके पाकिस्तान का पड़ोसी बनेंगे।' ये बातें पंजाबियों की नहीं, ISI के डिक्टेशन की लगती हैं। और यह भारत को भीतर से तोड़ने की चाल है - जो नाकाम रहेगी।
गुरपतवंत सिंह पन्नू अब किसी 'अलगाववादी नेता' से ज्यादा एक फ्रिंज एलिमेंट, एक टूल है भारत के खिलाफ साजिश में। पंजाब की जनता उसकी सोच को पहले ही नकार चुकी है। सच्चाई यही है कि आज का पंजाब खालिस्तान नहीं, हिंदुस्तान के साथ है। और ये बात हर पाकिस्तानी प्रायोजक को अब समझ लेनी चाहिए - चाहे वो पन्नू के वीडियो से समझे या फिर सरहद पर भारतीय सेना की गोलियों से।












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