Covid 19: ऑक्सीजन को लेकर बार बार दी गई चेतावनी, केन्द्र सरकार बनी रही लापरवाह, अब टूट रही हैं सांसे
ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर सरकार के सामने कई बार अलर्ट जारी किया गया लेकिन सरकार ने ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की कोशिश नहीं की।
नई दिल्ली, अप्रैल 23: कोरोना वायरस पर सबसे बड़ी और जानलेवा लापरवाही का खुलासा हुआ है। खुलासा हुआ है कि पिछले साल अप्रैल महीने में ही केन्द्र सरकार को ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए कहा गया था लेकिन सरकार ने ऑक्सीजन इंतजाम करने में लापरवाही बरती। सरकार ने अलर्ट के बाद भी ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की जहमत नहीं उठाई। ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर कई बार चेतावनी जारी की गई, बार बार अलर्ट जारी किया गया लेकिन देश की सरकार को लोगों की जिंदगी से मानो कोई वास्ता ही नहीं था, केन्द्र सरकार के साथ साथ राज्य की सरकरों ने भी ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की कोशिश ही नहीं की।

ऑक्सीजन पर जानलेवा लापरवाही
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में चेतावनी जारी करते हुए कहा गया था कि देश मेंऑक्सीजन की भारी किल्लत हो सकती है और ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से लोगों की जान जा सकती है। ये चेतावनी अप्रैल में जारी करने के बाद फिर से पिछले साल नवंबर में जारी की गई थी। रिपोर्ट में साफ साफ कहा गया था कि कोरोना वायरस का दूसरा लहर कभी भी आ सकता है, लिहाजा अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था कर लेनी चाहिए, बावजूद इसके सरकारों ने देश की जनता को मरने के लिए छोड़ दिया। अफसरों की एक हाईलेवल कमेटी ने वार्निंग जारी किया था कि देश में जल्द से जल्द ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए लेकिन सरकार की तरफ से ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर उस स्तर की कोशिश नहीं की गई, जितनी कोशिश की जानी चाहिए थी।

ऑक्सीजन पर पहली चेतावनी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जब पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था उसके ठीक बाद अधिकारियों के एक समूह ने सरकार को अलार्म जारी करते हुए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करने को कहा था। अधिकारियों के इस ग्रुप का निर्माण केन्द्र सरकार की तरफ से किया गया था, जिनका काम देश भर में कोरोना वायरस को लेकर चेतावनी जारी करना, व्यवस्था का जायजा लेना और कोरोना वायरस को लेकर सलाह देना था। इस ग्रुप ने देशभर की सरकारों को ऑक्सीजन की व्यवस्था करने को कहा था, दो दो बार बकायदा चेतावनी जारी की थी, लेकिन सरकारों ने... चाहे देश की सरकार हो या फिर राज्य की सरकारें हों, किसी ने भी लोगों की जान बचाने की कोशिश नहीं की। अधिकारियों के इस ग्रुप ने पहली चेतावनी 1 अप्रैल 2020 को जारी की थी।

इम्पावर्ड ग्रुप की चेतावनी पर चेतावनी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इम्पॉवर्ड ग्रुप-6 को केन्द्र सरकार की तरफ से प्राइवेट सेक्टर, पब्लिक सेक्टर, इंटरनेशनल एजेंसीज, एनजीओ से कॉर्डिनेट करते हुए देश के लिए प्लानिंग और सलाह देने के लिए गठन किया था, जिसने ऑक्सीजन के लिए रेड सिग्नल दिखाया था। इस ग्रुप में शामिल अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया कि 'आने वाले दिनों में भारत में ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो सकती है, इसके लिए सीआईई को फौरन इंडियन गैस एसोसिएशन से संपर्क कर ऑक्सीजन की किल्लत का समाधान करना चाहिए'। इस मीटिंग की अध्यक्षता नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने की थी, जिसमें भारत के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के विजय राघवन, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के सेक्रेटरी, एनडीएमए के सदस्य कमल किशोर और भारत सरकार के आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी शामिल थे। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री ऑफिस के अधिकारी, विदेश विभाग के अधिकारी, गृह मंत्रालय के अधिकारी, कैबिनेट सेक्रेटिएट के अधिकारी, आधा दर्जन से ज्यादा उद्योगों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। इन सभी बड़े अधिकारियों के अलावा पिछले साल अप्रैल में हुई मीटिंग में सीआईआई डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी भी शामिल थे।

ऑक्सीजन पर अलर्ट बेअसर
अधिकारियों के इस समूह ने सरकार को जल्द से जल्द ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने की चेतावनी दी थी मगर सरकारों की तरफ से ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं किया गया। वहीं इस ग्रुप में शामिल एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि 'ऑक्सीजन किल्लत पर चेतावनी के बाद ये तय किया गया था कि डीपीआईआईटी ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था करेगी।' आपको बता दें कि डीपीआईआईटी का मतलब डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड है जो मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अंदर आता है, जिसके मुखिया पीयूष गोयल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इम्पॉवर्ड ग्रुप ऑफ ऑफिसर्स की मीटिंग के 9 दिनों के बाद डीपीआईआईटी के अधिकारियों की मीटिंग हुई थी लेकिन इस मीटिंग में क्या तय किया गया, इसे बताने से डीपीआईआईटी के अधिकारियों ने साफ मना कर दिया।

बार बार अलर्ट पर जारी लापरवाही
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इम्पॉवर्ड ग्रुप ऑफ ऑफिसर्स के अलावा भी पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन हेल्थ ने भी ऑक्सीजन को लेकर अलर्ट जारी किया था और केन्द्र सरकार को कहा था कि वो जल्द से जल्द अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करें। अलर्ट में केन्द्र सरकार से कहा गया था कि अस्पतालों में पहले से ही ऑक्सीजन की कमी है, लिहाजा ऑक्सीजन उपलब्धता पर ध्यान दिया जाए। 16 अक्टूबर 2020 को समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव की अध्यक्षता में संसदीय समिति की बैठक हुई थी, जिसमें केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण भी शामिल थे। इस कमेटी ने सरकार ने मेडिकल ऑक्सीजन की व्यवस्था करने को कहा था। समिति की तरफ से सरकार को कहा गया था कि अगर सही वक्त पर ऑक्सीजन का इंतजाम हो जाए तो इसके अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे।

लापरवाही का खामियाजा
देश में ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हर दिन सैकड़ों लोग बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं। पूणे स्थिति महर्ता चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष सुधीर मेहता ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि 'हमें डर है कि हमें आगे जाकर सिर्फ अफसोस करना होगा कि हमने ऑक्सीजन की किल्लत को सुधारने के लिए जितना करना चाहिए था उतना नहीं किया, जबकि कोरोना वायरस के पहले लहर में ही पता चल गया था कि कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन कितना ज्यादा जरूरी है। ये बिल्कुल सही बात है कि एक साल बाद जाकर ऑक्सीजन का प्रोडक्शन शुरू किया गया है लेकिन हमें करीब 5 से 6 महीने का वक्त किसी भी कीमत पर आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन सप्लाई करने के लिए चाहिए'












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