178 बार चुनाव हारने के बाद फिर नामांकन करने पहुंचा ये शख्स, पूर्व पीएम अटल के खिलाफ भी लड़ा था इलेक्शन
नई दिल्ली। हर छोटे बड़े नेता का शौक होता है कि वो चुनाव लड़े और अपने क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करें। लेकिन तमिलनाडु में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां एक शख्स 1988 और 2016 के बीच हुए चुनाव में 178 बार हार का सामना कर चुका है, इसके बाद भी वो हर चुनाव लड़ता है। 178 बार हार का सामना करने के बाद इस बार फिर चुनाव मैदान में उतरने के पीछे इस शख्स ने जो बाते बताई हैं उसे जान लेते हैं।

पंचायत चुनाव से लेकर राष्ट्रपति तक के चुनाव लड़े हैं
उस व्यक्ति का नाम है के पद्मराजन जिसने तीन बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवा चुका है। पद्मराजन 1988 से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन हर चुनाव में उनके नाम हार का एक अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है। इसके बाद भी वो शख्स चुनाव मैदान में उतरता है। पद्मराजन के बारे में कहा जाता है कि वो पंचायत चुनावों से लेकर राष्ट्रपति के लिए चुनाव तक में हिस्सा लिया है।

राजनीति के दिग्गजों के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव
पद्मराजन के बारे में आपको बता दें कि ये शख्स हर बड़े नेता के खिलाफ चुनाव लड़ चुका है। जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जे जयललिता, एम करुणानिधि, एके एंथोनी, पीवी नरसिम्हा राव, के आर नारायण एसएम कृष्णा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (राज्यसभा चुनावों में) और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और विजयकांत के खिलाफ लड़ाई चुनाव में खड़े हुआ है। 2016 तक पद्मराजन ने चुनाव के लिए अपनी 20 लाख रुपए की जमा राशि भी खर्च कर दी।

178 हार के बाद भी चुनाव लड़ने के पीछे ये है वजह
पद्मराजन तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और यहां तक कि दिल्ली में भी चुनाव लड़े हैं। पद्मराजन अपनी हार के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि अगर मैं चुनाव में जीत हासिल की तो मुझे दिला का दौरा पड़ सकता है। 178 हार देखने वाले पद्मराजन कहते हैं कि जीवन में उनका उद्देश्य यह संदेश फैलाना है कि लोकतंत्र में कोई भी चुनाव लड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वो आगे भी चुनाव लड़ते रहेंगे और उनका सिर्फ एक उद्देश्य हैं रिकॉर्ड बनाना।

क्या करते हैं पद्मराजन?
174 हार का सामना कर चुके पद्मराजन होम्योपैथ के डॉक्टर हैं। उन्होंने कहा कि वो चुनाव में अपनी मेहनत के पैसे का इस्तेमाल किया है और हार के लिए किसी तरह का कोई पछतावा नहीं है। पद्मराजन ने इंडिया टुडे को बताया कि उनके माता-पिता उनकी मंशा को समझते हैं लेकिन उनकी पत्नी और बच्चे इसते खिलाफ थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके प्रयासों का स्वीकार करना शुरू कर दिया। इस बार लोकसभा चुनावों के लिए पद्मराजन तमिलनाडु की धर्मपुरी सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरा है। इस सीट से पट्टली मक्कल काची (पीएमके) नेता अंबुमणि रामदास चुनाव लड़ रहे हैं। पद्मराजन की योजना केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने की भी है। क्योंकि ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications