चीन के खिलाफ भारत को मिला किन-किन देशों का समर्थन, जवानों की शहादत पर व्यक्त की संवेदना

नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट के बीच भारत को अपनी सीमा सुरक्षा के लिए पड़ोसी देशों के साथ भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इसी सप्ताह सोमवार की रात लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प नें तनाव बढ़ा दिया है। इस घटना में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए जबकि चीन को भी बड़ा नुकसान हुआ, हालांकि वह अपने जवानों की मौत का आंकड़ा छिपा रहा है। चीन के साथ विवाद में भारत को विश्व के कई देशों का समर्थन प्राप्त हुआ है और उन्होंने शहीद जवानों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त की।

चीन के साथ विवाद में भारत को मिला विश्व का साथ

चीन के साथ विवाद में भारत को मिला विश्व का साथ

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक में चीन को दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपने सीमा की सुरक्षा करने में सक्षम है, कोई भी हमारी एक इंच धरती की तरफ आंख उठाकर नहीं देख सकता। इस मुद्दे पर भारत को अपने कई मित्र देशों का समर्थन भी मिला है, जबकि कोरोना वायरस को लेकर पहले ही आरोपों का सामना कर रहे चीन को अब भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर निंदा का भी सामना करना पड़ रहा है।

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    अमेरिका ने हिंसक झड़प पर क्या कहा?

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    भारत के समर्थन में एक कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख की गैलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक सामना के कारण 20 भारतीय सेना के जवानों की मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा, हम चीन के साथ हालिया टकराव के परिणामस्वरूप शहीद हुए भारतीय जवानों भारत के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी विदेश ने भी भारतीय सैनिकों की शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा था कि वह भारत और चीन के बीच उत्पन्न हुई स्थिति पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों से आग्रह किया था कि शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालें।

    चीन पर फूटा अमेरिका का गुस्सा

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    इसके अलावा को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कायले मैकनेनी ने दैनिक ब्रीफिंग में मीडियकर्मियों से कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत-चीन सीमा पर पैदा हुई स्थिति से अवगत हैं। वहीं, गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के पूर्वी एशियाई और प्रशांत मामलों के सहायक सचिव ब्यूरो डेविड आर स्टिलवेल ने भी भारत-चीन के बीच तनाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने एक बयान में कहा, 'हम क्या कर रहे हैं, हम स्पष्ट रूप से भारत-चीन सीमा विवाद को बहुत करीब से देख रहे हैं। भारत-चीन सीमा पर इस तरह का गतिरोध पहले भी हुआ है जब साल 2014 में चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग भारत के दौरे पर गए थे। चीन की सेना इस बार काफी अंदर तक घुस आई थी। उनकी संख्या भी ज्यादा थी। इससे पहले हमने ऐसे ही हालात डोकलाम में देखे थे।'

    मालदीव, फ्रांस और इन देशों ने व्यक्त की संवेदना

    मालदीव, फ्रांस और इन देशों ने व्यक्त की संवेदना

    भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प पर मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने ट्वीट कर भारत का समर्थन किया। उन्होंने लिखा, हिंसक झड़प में शहीद हुए भारतीय जवानों के परिजनों के प्रति मालदीव अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। हमारी प्रार्थना सैनिकों के परिवारों, प्रियजनों और जवानों के साथ है। फ्रांस के दिल्ली स्थित हाई कमीशन, यूरोप, इटली और ऑस्ट्रेलिया ने भी भारतीय जवानों के प्रति अपने संवेदना व्यक्त की है।

    जर्मनी, ब्राजील और जापान भी भारत के साथ

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    इन देशों के अलावा भारत में जर्मन दूत ने ट्वीट कर कहा, गलवान में अपने प्रियजनों को खोने वाले सैनिकों के परिवारों के साथ हमारी संवेदना है। जापान हाई कमीशन ने भी ट्वीट कर कहा, भारत के लोगों और गालवान की ड्यूटी में अपनी जान गंवाने वाले भारतीय सैनिकों के परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदना। इसके अलावा भारत को ब्राजील का भी समर्थन मिला है, दिल्ली स्थित ब्राजील दूतावास ने गलवान की घटना पर शहीद परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है।

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