CORONAVIRUS IN INDIA: जांच में पीछे लेकिन पॉजिटिव केस में नंबर-1 बनने की राह पर

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस किस तरह फैल रहा है इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि कोविड-19 के मामले में देश रोजाना रिकॉर्ड बना रहा है। बुधवार के जो आंकड़े जारी किए गए हैं उनमें 83,883 की संख्या में केस बढ़े हैं जो अपने आप में रिकॉर्ड है। वहीं पिछले 24 घंटे में संक्रमण से प्रभावित 1043 लोगों की मौत हो गई। पिछले दस दिनों में ऐसा छठीं बार हुआ है जब एक दिन में मरने वालों की संख्या एक हजार के पार हो चुकी है। अब ऐसा माना जा रहा है कि देश में रोजाना 1000 मौतों का आंकड़ा आम हो सकता है। अब तक कोरोना वायरस के चलते देश में 67,376 लोगों की मौत हो चुकी है।

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    दूसरे नंबर पर ब्राजील से थोड़ा ही पीछे भारत

    दूसरे नंबर पर ब्राजील से थोड़ा ही पीछे भारत

    गुरुवार को जारी किए गए पिछले 24 घंटे के आंकड़ों के बाद देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों की संख्या 38 लाख से ज्यादा हो गई है। भारत अब दुनिया में दूसरे सबसे ज्यादा संक्रमण वाले देश ब्राजील से बस डेढ़ लाख पीछे है। अभी भी अमेरिका 5,968,380 केस के साथ पहले नंबर पर है। WHO की वेबसाइट के मुताबिक अमेरिका में पिछले 24 घंटे में 31,808 केस मिले हैं। अमेरिका में अब तक 1,82,585 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है।

    हालांकि भारत में कोरोना के मामलों के तेजी से सामने की एक वजह जांच में हो रही वृद्धि भी है। गुरुवार को भारत ने 11,72,179 सैंपल की जांच की जो कि अब तक की सबसे अधिक संख्या है। इसके साथ ही कुल जांच की संख्या 4.55 करोड़ के पार हो गई है।

    रिकॉर्ड जांच के बाद भी दूसरे देशों से पीछे भारत

    रिकॉर्ड जांच के बाद भी दूसरे देशों से पीछे भारत

    इतनी बड़ी संख्या में जांच के बावजूद भारत अभी भी जांच के मामले में दूसरे देशों से पीछे है। केस के मामले में नंबर-1 देश अमेरिका अब तक 8 करोड़ सैंपल की जांच कर चुका है। जांच के मामले में आबादी को भी ध्यान रखा जाना चाहिए। आबादी के हिसाब से जांच के मामले में भारत दूसरे देशों की तुलना में काफी पीछे है। प्रति दस लाख लोगों पर भारत में 32 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं। वहीं ब्राजील प्रति 10 लाख पर 67 हजार टेस्ट जबकि इसी आबादी पर अमेरिका और रूस 2.5 लाख टेस्ट कर रहे हैं।

    आरटी-पीसीआर टेस्ट की कम संख्या चिंताजनक

    आरटी-पीसीआर टेस्ट की कम संख्या चिंताजनक

    टेस्टिंग को लेकर एक बात जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाने वाली है वह ये है कि टेस्ट में आरटी-पीसीआर की संख्या घट रही है जबकि रैपिड टेस्ट की संख्या बढ़ रही है। जुलाई में रैपिड टेस्ट की संख्या कुल टेस्ट की 4 प्रतिशत थी जो कि अब बढ़कर 45 प्रतिशत पहुंच गई है। बता दें कि आरटी-पीसीआर टेस्ट को सबसे सटीक माना जा रहा है। रैपिड टेस्ट के बारे में शिकायत आई है कि इसके नतीजे कई बार गलत भी आ जाते हैं। राजधानी दिल्ली में भी रैपिड टेस्ट की संख्या ज्यादा है। इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए पीसीआर टेस्ट की संख्या बढ़ाने को कहा था। इधर दिल्ली में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

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