भारत में प्रजनन दर 2.1 से नीचे आई, देश की जनसंख्या अब स्थिर: NFHS डाटा
नई दिल्ली, 24 नवंबर: भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) तकरीबन दो हो गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) का डाटा कहता है कि टीएफआर जो कि 2016 में 2.2 पर था, अब कम होकर तकरीबन दो हो गया है। यानी एक महिला अपने जीवनकाल में बच्चों को जन्म देने की औसत 2.2 से घटकर दो संख्या दो हो गई है। जिसका अर्थ है कि देश की जनसंख्या अब लगभग स्थिर हो गई है। यानी उसमें बढ़ोतरी बहुत ही मामूली है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के दूसरे चरण के आंकड़ों के मुताबिक गर्भनिरोधक प्रसार दर (सीपीआर) अब 54 फीसदी से बढ़कर 67 फीसदी हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को ये आंकड़े जारी किए हैं। जो संकेत देते हैं कि देश की जनसंख्या अब स्थिर हो रही है। 2015 और 2016 के बीच किए गए सर्वेक्षण के चौथे एडिशन में टीएफआर राष्ट्रीय स्तर पर 2.2 था। पांचवां सर्वे 2019 से 2021 के बीच दो चरणों में किया गया।जिसमें प्रजनन दर कम हुआ है।
2.1 के टीएफआर को ऐसी दर के रूप में माना जाता है, जो जनसंख्या में स्थिरता के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलबहै कि यह एक महिला और उसके पार्टनर या पति की मौत जब होती है, तो जनसंख्या में कोई समग्र वृद्धि या कमी नहीं होती है। ऐसे में जनसंख्या में वृद्धि नहीं होती है।
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नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि एनएफएचएस-5 से पता चलता है कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में और तेजी आ रही है। फेज-2 में अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का सर्वेक्षण किया गया। मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर सर्वेक्षण में शामिल अन्य राज्यों ने रिप्लेसमेंट लेवल हासिल कर लिया है।












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