Richest Temple: भारत के टॉप 8 मंदिरों में सबसे अमीर 'तिरुपति', सालाना 3,300 करोड़ की कमाई! जानें अन्य का हाल?
India Top 8 Richest Temple: भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता है और इसकी संस्कृति, परंपराएं, और धार्मिक मान्यताएं इसे दुनियाभर में खास बनाती हैं। यहां के प्राचीन मंदिर न केवल अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं, बल्कि इन मंदिरों में भक्तों द्वारा किए गए चढ़ावे ने इन्हें दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक स्थलों में भी शुमार कर दिया है।
इन मंदिरों को विभिन्न स्रोतों से चंदा प्राप्त होता है, जैसे कि नकद दान, आभूषण, भूमि, और अन्य प्रकार की संपत्तियां। सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर इन मंदिरों से संबंधित आंकड़े जारी किए जाते हैं, जिनसे हमें यह अंदाजा लगता है कि इन मंदिरों को कितनी बड़ी मात्रा में चंदा प्राप्त होता है। आइए जानते हैं भारत के 8 सबसे अमीर मंदिरों के बारे में....

तिरुपति बालाजी मंदिर (वेंकटेश्वर मंदिर) Tirupati Balaji Temple (Venkateswara Temple)
तिरुपति बालाजी मंदिर, जिसे श्री वेंकटेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे अमीर और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित है और सालाना करोड़ों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की आय का बड़ा हिस्सा भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे, आभूषण, नकद दान, और अन्य स्रोतों से आता है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD), मंदिर की प्रशासनिक संस्था है, जो मंदिर के संचालन, प्रबंधन और चढ़ावे की देखभाल करती है। टीटीडी समय-समय पर मंदिर की आय और खर्चों की जानकारी सार्वजनिक करती है, जिसे सरकारी रिकॉर्ड के रूप में देखा जा सकता है।
कितनी होती है तिरुपति की कमाई?
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) हर साल मंदिर की आय और बजट से संबंधित आंकड़े जारी करता है। टीटीडी की वेबसाइट और सरकारी प्रकाशनों से आप यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पिछले कुछ वर्षों के आय के सरकारी आंकड़े दिए गए हैं...
फाइनेंशियल ईयर (2022-2023)
- कुल आय: ₹3,300 करोड़ (अनुमानित)
- हुंडी से आय: ₹1,200 करोड़
- सोना और आभूषण दान: 3000 किलो सोना
- लड्डू प्रसादम की बिक्री से आय: लगभग ₹400 करोड़
- निवेश से आय: ₹750 करोड़ (FDs, बैंक ब्याज)
फाइनेंशियल ईयर (2021-2022)
- कुल आय: ₹3,500 करोड़ (अनुमानित)
- हुंडी से आय: ₹1,250 करोड़
- लड्डू प्रसादम की बिक्री: ₹350 करोड़
- निवेश से आय: ₹800 करोड़

शिरडी साईं बाबा मंदिर, महाराष्ट्र (Shirdi Sai Baba Temple, Maharashtra)
महाराष्ट्र स्थित धार्मिक नगरी शिरडी की पहचान साईं बाबा से ही है। मंदिर के प्रभारी कार्यकारी अधिकारी साईबाबा मंदिर के ट्रस्टी राहुल जाधव ने साईबाबा मंदिर के चढ़ावे के बारे में विस्तार से बताया कि साईबाबा के मंदिर में सालभर में 1 जनवरी 2022 से 30 दिसम्बर 2022 तक 400 करोड़ 17 लाख रुपये दान किए गए हैं। हुंडी में 167 करोड़ 77 लाख रुपये, डोनेशन काउंटर में 74 करोड़ 32 लाख, ऑनलाइन, डेबिट क्रेडिट कार्ड, चेक द्वारा श्रद्धालुओं ने 144 करोड़ 45 लाख रुपये बाबा को अर्पण किए। कुल मिलाकर 385 करोड़ 54 लाख रुपयों का नगद दान श्रद्धालुओं ने अर्पण किया।
एक नजर में..
- कुल आय (2022): लगभग ₹400 करोड़ 17 लाख
- हुंडी से आय: लगभग ₹167 करोड़ 77 लाख
- ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से दान: ₹144 करोड़ 45 लाख

स्वर्ण मंदिर, अमृतसर (Golden Temple, Amritsar)
भारतीय पर्यटक ही नहीं, आप यहां विदेशी पर्यटकों को भी घूमते हुए देख सकते हैं। श्री हरमंदिर साहिब या स्वर्ण मंदिर ने पंजाब के स्वर्णिम इतिहास में एक अभिन्न भूमिका निभाई है। यहां हर रोज लगने वाले लंगर में करीब 35000 लोग खाना खाते हैं। साहिब के कड़ाह प्रसाद की वटक हर महीने लगभग 3 करोड़ 60 लाख रुपये की है। हर महीने इन गुरुद्वारा साहिबान की आय लगभग 12 करोड़ है। वहीं, चंदे की बात करें तो, प्रति वर्ष चंदा लगभग 500-600 करोड़ रुपये आता है।
एक नजर में..
- कुल आय: लगभग ₹500-600 करोड़ प्रति वर्ष
- लंगर सेवा: हर दिन 35,000 से ज्यादा लोग भोजन करते हैं

वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू और कश्मीर (Vaishno Devi Temple, Jammu and Kashmir)
वैष्णो देवी मंदिर को देश के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। भारत में मान्यता प्राप्त शक्तिपीठ मंदिरों में से एक है। प्रति वर्ष चंदा माता वैष्णो देवी मंदिर में लगभग 500 करोड़ रुपये आता है, जो इसे देश के सबसे धनी मंदिरों में से एक बनाती है। देश और दुनिया से हर साल लाखों की संख्या में लोग माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आते हैं।
एक नजर में..
- कुल आय: लगभग ₹500 करोड़ प्रति वर्ष
- चढ़ावा: देश और दुनिया भर से श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है

सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई (Sidhivinayaka Temple, Mumbai)
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। बॉलीवुड के मशहूर हस्तियों से लेकर बिजनेस टायकून तक, यहां कई मशहूर हस्तियां देखी जाती हैं। इस मंदिर को 3.7 किलोग्राम सोने से कोट किया गया है, जिसे कोलकाता के एक व्यापारी ने दान किया था। रिकॉर्ड के अनुसार, मंदिर को दान और चढ़ावे से सालाना लगभग 150-200 करोड़ रुपये की इनकम होती है।
एक नजर में...
- कुल आय: लगभग ₹150-200 करोड़ प्रति वर्ष
- विशेष दान: 3.7 किलो सोने से मंदिर को कवर किया गया है

सोमनाथ मंदिर, गुजरात (Somnath Temple, Gujarat)
सोमनाथ मन्दिर भूमण्डल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात नामक राज्य में स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक शिव मंदिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। लोक कथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देह त्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया। मंदिर में प्रतिवर्ष चंदा लगभग 100-150 करोड़ रुपये आता है।
एक नजर में...
- कुल आय: लगभग ₹100-150 करोड़ प्रति वर्ष
- महत्व: यह मंदिर ऋग्वेद में भी उल्लेखित है

राम मंदिर, अयोध्या (Ayodhya Ram Temple)
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में इस साल जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद से ही यहां भक्तों का तांता लगा हुआ है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में हर महीने औसतन 1 करोड़ का चढ़ावा आ रहा है। राम मंदिर परिसर में 6 काउंटर बने हैं, जहां पर दान की राशि जमा होती है। ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक, अब तक 5000 करोड़ की धनराशि जमा होने का अनुमान है, जिसमें एक महीने तक चले निधि समर्पण संग्रह अभियान के 3200 करोड़ भी शामिल हैं।
एक नजर में...
- कुल आय: ₹1 करोड़ प्रति माह
- निधि संग्रह अभियान: ₹3200 करोड़

पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल (Padmanabhaswamy Temple, Kerala)
यह मंदिर दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में शुमार है। पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने में सोने, रत्न और अन्य बहुमूल्य धरोहरों की कीमत लगभग ₹1,00,000 करोड़ आंकी गई है। हालांकि, इसका अधिकांश खजाना मंदिर के तहखाने में सुरक्षित रखा गया है और इसे भक्तों द्वारा देखने की अनुमति नहीं है। जून 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के गुप्त तहखाने को खालने और रखी वस्तुओं के निरीक्षण का आदेश दिया। लेकिन, कोर्ट ने 7वें तहखाने को खोलने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे पवित्रता के मामला बताया है। अनुमान है कि इस तहखाने में 52.59 लाख करोड़ का खजाना है। आपको बता दें कि यह चंदे से परेह है।
एक नजर में...
- अनुमानित खजाना मूल्य: ₹1,00,000 करोड़
- 7वां तहखाना: इसका अनुमानित खजाना ₹52.59 लाख करोड़ का है
मंदिरों को चंदा कहां से आता है?
- भक्तों के नकद दान: अधिकांश भक्त नकद के रूप में दान करते हैं, जो कि मंदिरों की मुख्य आय होती है।
- आभूषण और संपत्ति: सोना, चांदी और कीमती धातुओं के रूप में भी भक्त दान करते हैं, जिसे बाद में मंदिर ट्रस्ट द्वारा निवेश किया जाता है।
- भक्ति पर्यटन: कई मंदिरों की आय तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं से होती है, जो दर्शन के लिए मंदिर आते हैं।
- कॉर्पोरेट दान: कई कॉर्पोरेट घराने और धनी लोग बड़े दान करते हैं, जिसमें जमीन, संपत्ति और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल होते हैं।
- संपत्ति और ब्याज: कई मंदिरों के पास बड़ी संपत्तियां और बैंक डिपॉजिट होते हैं, जिनसे उन्हें ब्याज के रूप में आय प्राप्त होती है।
नोट- यह आंकड़ें मीडिया रिपोर्ट्स और वक्त-वक्त पर जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार है। वन इंडिया इसपर दावा नहीं करता है।
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