डेंगू पर नहीं कोई कंट्रोल, क्या होगा अगर जीका आ गया भारत?
ब्राजील से खबर आयी कि करीब 38 हजार गर्भवती महिलाएं मच्छर से फैलने वाले जीका वायरस की चपेट में हैं। यह वायरस असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भी फैल सकता है। बस फिर क्या था, तमाम भारतीयों को जीका का डर अभी से सताने लगा। जो जानकार हैं, वे इससे बचने के उपाये सोचने लगे हैं, और जिनके पास आधी-अधूरी जानकारी है, वे जीका की तुलना एड्स से कर रहे हैं, लेकिन कोई भी उस मच्छर की बात नहीं कर रहा, जो डेंगू, चिकनगुनिया, आदि जैसी खतरनाक बीमारियों का वाहक है।
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बहरहाल डेंगू समेत चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों की बात की जाए तो मच्छरों की एक प्रजाति एडीस इस रोग की मुख्य वजह है। जिसके कारण भारत में करीबन 20,000 लोग हर साल डेंगू की चपेट में आते हैं। पर, अमेरिका के एक शोध के मुताबिक असल संख्या 300 गुना ज्यादा है। इस बीमारी के लिए न तो अभी तक कोई मेडिसिन बनाई जा सकी है, न ही किसी टीके को ही खोजा गया है।
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इसी बीच जीका वायरस की खबर लोगों के जहन में और डर पैदा कर रही है। हालांकि सवाल एक बार फिर से स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने खड़ा है। कयासों के तले जानने की कोशिश की जा रही है अगर जीका ने भारत में दस्तक दे दी तो सरकार का अगला कदम क्या होगा? पर, जब राज्य हो या केंद्र डेंगू के आगे विफल साबित हो रहा है, उस बीच जीका की दस्तक का नतीजा क्या होगा। शायद इस बारे में सोचकर ही बंद आंखों के सामने कब्र और श्मशान पर अपनों के लिए विलाप करते लोग ख्वाबों में दस्तक देने लगते हैं।

60 लाख मामले
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डेंगू के करीबन 60 लाख मामले सामने आ चुके हैं।

सरकार नाकाम
सरकार द्वारा चलाए जा रहे तमाम अभियानों के बावजूद डेंगू की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कुलमिलाकर पूरी तरह से असफल साबित हो रहे हैं अभियान।

पूरी दुनिया में 40 करोड़
डेंगू की बीमारी किसी खास देश से जुड़ी नहीं है बल्कि ये दुनिया में करीबन 40 करोड़ लोगों को अपनी चपेट में लेती है।

120 देशों में डेंगू
दुनिया के 120 देश डेंगू के आगोश में आ चुके हैं।

नमी और डेंगू
नमी के साथ डेंगू भी विकराल रूप लेता जाता है, यह देश की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता है।

ब्राजील में बन रही वैक्सीन
ब्राजील में एडीस मच्छरों को प्रतिरोधक के तौर पर तैयार किया जा रहा है। वहां पर प्रयोगशाला में करीब दस हजार मच्छरों प्रतिरोधक बनाकर उन्हें दोबारा रिहायशी इलाकों में छोड़ा गया है।

मच्छरों की अगली पीढ़ी होगी नाकाम
वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि वे डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के साथ प्रजनन करेंगे जिससे उनकी अगली पीढ़ी डेंगू फैलाने में नाकाम रहेगी। यह तरीका विएतनाम, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी अपनाया जा चुका है।












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