भारत-चीन तनाव: अपने CO कर्नल बाबू पर हमले से गुस्से में आ गए थे बिहार रेजीमेंट के जवान, पूरी ताकत से चीनियों को बनाया निशाना
नई दिल्ली। एक हफ्ता होने को है जब लाइन ऑफ एक्चुल कंट्रोल (एलएसी) के वेस्टर्न सेक्टर में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना की चीनी सेना से हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में 16 बिहार रेजीमेंट के 20 जवान शहीद हो गए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें तो ज्यादातर सैनिकों की मृत्यु गलवान नदी में डूबने या फिर ठंड से हुई है। इस संघर्ष में उन जवानों की वीरता के किस्से भी अब सामने आ रहे हैं जिन्होंने इस हिंसक संघर्ष में चीनी सैनिकों को जवाब दिया है।

फ्रैक्चर के बाद भी लड़ते रहे
15/16 जून को 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू और उनके साथी जवानों पर चीनी सैनिकों ने तेज धारदार हथियार का प्रयोग किया था। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शहीद सैनिकों के शरीर में कई जगह फ्रैक्चर भी थे। सभी सैनिकों ने बहुत ही बहादुरी के साथ चीनी जवानों के हमले का सामना किया और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इन सैनिकों की शौर्य गाथा को सलाम किया है। उन्होंने कहा, 'देश को इस बात का गर्व होगा कि हमारे सैनिक मारते-मारते, मरे हैं।' भारत और चीन के सैनिकों के बीच हैंड-टू-हैंड कॉम्बेट जिस जगह पर हुई वह काफी संकरी है और यहां पर कई घंटों तक सैनिक आपस में लड़ते रहे।

डॉक्टरों को भी सैनिकों पर गर्व
कई भारतीय सैनिकों को या तो ऊंचाई से धक्का दे दिया गया था या फिर वह गलवान नदी में डूब गए थे। नदी का पानी बहुत ठंडा था और ठंड की वजह से भी कुछ सैनिकों की जान गइई है। लेह के सोनम नुरबू मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर के हवाले से अखबार ने बताया है, 'शहीद सैनिकों के शव देखने से इस बात का पता लगता है कि उन्होंने कितनी बहादुरी से चीनी सैनिकों का सामना किया था। ऐसा लगता है कि उन्होंने कई चीनी सैनिकों को मरने से पहले मारा था। उनके घाव से लगता है कि उन पर तेज धारदार हथियार से कई बार वार किया गया था। कई सैनिकों के कई अंगों की हड्डियां भी टूटी हुई थीं।'

CO बाबू पर हमले से गुस्साए सैनिक
16 रेजीमेंट के जवान उस समय आक्रामक हो गए थे जब सीओ कर्नल बाबू और दो जवानों चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय जवानों ने पूरे जोश के साथ हमला बोला। घायल जवानों ने अस्पताल के स्टाफ को बताया कि चीनी सैनिकों के पास जो कुछ भी था, उन्होंने उसे छीन लिया और फिर उन पर पूरी ताकत के साथ हमला बोला था। गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद करीब 230 किलोमीटर दूर लेह से सेना ने बड़े स्तर पर जवानों के मूवमेंट का ऑर्डर जारी किया। एलएसी पर चीनी जवानों की भारी संख्या को देखते हुए इंडियन आर्मी ने भी तैनाती बढ़ा दी है।

जनरल सिंह बोले उनके दोगुने सैनिकों को मारा
पूर्व सेना प्रमुख और अब बीजेपी सरकार में मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह ने कहा है कि अगर इंडियन आर्मी ने अपने 20 बहादुर सैनिक 15/16 जून को हुए संघर्ष में गंवाएं हैं तो चीन के डबल सैनिक उन्होंने ढेर किया है। जनरल सिंह के मुताबिक चीन के करीब 43 सैनिक मारे गए हैं। जनरल सिंह के मुताबिक चीन कभी भी अपने मारे हुए सैनिकों के बारे में कभी सार्वजनिक तौर पर नहीं स्वीकारेगा क्योंकि यन् 1962 की जंग में भी उसने ऐसा ही किया था। 15 जून को 45 साल बाद यह पहला मौका था जब भारतीय जवानों ने एलएसी पर चीनी सेना के साथ हुए संघर्ष में अपनी जान गंवाई है।












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