India-China tension: NSA डोवाल ने की थी चीन के इस अधिकारी से बात तब जाकर लद्दाख में पीछे हटे चीनी सैनिक!
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी तनाव पर एक बड़ी खबर आ रही है। सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने जानकारी दी है कि लद्दाख में अब कई बिंदुओं से भारत और चीन के सैनिक चले गए हैं। मंगलवार को पिछले एक माह से ज्यादा समय से जारी टकराव पर इस घटनाक्रम को एक बड़ा कदम करार दिया जा रहा है। इस बीच ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल ने अपने चीनी समकक्ष यांग जिएछी से स्थिति पर चर्चा की।

2.5 किलोमीटर पीछे हटे चीनी सैनिक
वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ नितिन गोखले ने दावा किया है कि एनएसए डोवाल ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एनएसए जिएछी से इस पूरी स्थिति पर बात की। मंगलवार को एलएसी पर जो घटनाक्रम हुए हैं उसके बाद माना जा रहा है कि आगे आने वाले दिनों में चीनी जवान पैंगोंग झील के पास से भी वापस लौट सकते हैां। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिक गलवान इलाके, पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 और हॉट स्प्रिंग्स एरिया से 2.5 किलोमीटर पीछे चले गए हैं। भारत ने भी प्रतिक्रिया स्वरूप अपने कुछ जवानों को वापस बुला लिया है।

क्यों बौखलाया है चीन
लद्दाख में जारी तनाव अब दूसरे महीने में दाखिल हो गया है। चीन उस समय से ही बौखलाया हुआ है जब से लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में सरकार ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को आगे बढ़ाना शुरू किया। इस बार एलएसी पर डोकलाम से कहीं ज्यादा अलग और तनावपूर्ण हो गए हैं। पीएम मोदी ने इस संकट को हल करने के लिए अपनी उसी टीम पर भरोसा जताया है जिसने 73 दिनों बाद डोकलाम विवाद को सुलझाने में सफलता हासिल की थी। इस टीम में विदेश मंत्री और चीन के मामलों के जानकार एस जयशंकर, एनएसए अजित डोवाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत शामिल हैं।
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छह जून को थी कमांडर लेवल की मीटिंग
लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) सेक्टर में एक पुल का निर्माण हो रहा है। चीन को डर लग रहा है कि यह पुल अक्साई चिन में स्थित ल्हासा-काश्गर हाइवे को खतरा पैदा कर सकता है। इस पुल के निर्माण में भारतीय सेना के उन जवानों को ही तैनात किया गया है जो चीन के कब्जे वाले तिब्बत के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। छह जून को भारत और चीन के बीच विवाद सुलझाने के लिए मिलिट्री कमांडर्स स्तर की वार्ता हुई थी। इस मीटिंग को लेह स्थित सेना के 14 कोर के कमांडर ले. जनरल हरिंदर सिंह लीड कर रहे थे।

LAC पर बहाल हो अप्रैल वाली स्थिति
इस वार्ता को कोई नतीजा नहीं निकला और अब फिर से अगले दौर की मीटिंग के लिए भारत की टीम रेडी हो रही है। मिलिट्री टीम के सदस्य चुशुल में हैं और वार्ता की तैयारी कर रहे हैं जिसके अगले कुछ दिनों में होने की संभावना है।' कहा जा रहा है कि इस टीम को सभी तरह के निर्देश आर्मी हेडक्वार्ट्स दे दिए गए हैं। साथ ही सरकारी अधिकारी उस प्रस्ताव में मदद कर रहे हैं जो मसला हल करने में मदद कर सकता है। सेना ने अपनी आधिकारिक टिप्पणी में कहा कि और भारत-चीन इलाकों पर वर्तमान स्थिति का हल निकालने में लगे हैं। इस मीटिंग में चीन को साफ कर दिया गया है कि एलएसी पर अप्रैल 2020 वाली स्थिति बहाल होनी चाहिए।

भारत ने रखी थीं ये पांच मांग
भारत की तरफ से चीन के सामने पांच मांग रखी गई थीं। इसमें फिंगर 4, पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14, पीपी 15, पीपी 17A से जवानों को हटाने के साथ ही दोनों तरफ से 20 किलोमीटर तक के इलाके से जवानों को हटाने की मांग की गई थी। भारत ने कहा है कि अप्रैल 2020 वाली स्थिति को एलएसी पर कायम किया जाए। ऐसे में अभी टकराव खत्म नहीं हुआ है। अब जल्द ही एक और राउंड वार्ता होने वाली है और माना जा रहा है कि इस दौरान कोई हल निकल सकता है।












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