पूर्वी लद्दाख में टकराव पर भारत-चीन का बयान कन्‍फ्यूज करने वाला, यथास्थिति पर कोई नतीजा नहीं निकल सका

नई दिल्‍ली। मंगलवार को भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में स्थिति पर एक साझा बयान जारी किया गया है। इस बयान में दोनों देश इस बात पर राजी हुए हैं कि अब लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर और ज्‍यादा जवान नहीं भेजे जाएंगे। लेकिन इन सबके बीच इस स्थिति को लेकर कनफ्यूजन बना हुआ कि दोनों देशों के बीच अप्रैल वाली यथास्थिति को लेकर क्‍या तय हुआ है। सूत्रों की मानें तो इस मसले पर कोई भी हल नहीं निकल सका है। सोमवार को भारत और चीन के बीच छठें दौर की कोर कमांडर वार्ता हुई है और 13 घंटे की मीटिंग भी बेनतीजा खत्‍म हो गई। यह मीटिंग चीन के हिस्‍से में आने वाले मोल्‍डो में हुई थी।

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    यथास्थिति को लेकर क्‍या सहमति बनी?

    चीन और भारत की तरफ से जो ज्‍वॉइन्‍ट स्‍टेटमेंट आया है उसमें वर्तमान स्थिति क्‍या है इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है। न ही इस बात का कोई इशारा मिलता है कि दोनों देशों के बीच अप्रैल 2020 वाली स्थिति को एलएसी पर बहाल करने को लेकर क्‍या सहमति बनी है। मई माह से ही भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में टकराव जारी है। छठें दौर की वार्ता के बाद भारत और चीन के साझा बयान वाली एक प्रेस रिलीज जारी की गई थी। इस बयान के मुताबिक भारत और चीन दोनों ही संपर्क को मजबूत करने की अहमियत पर जोर देने को राजी हुए और किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए भी तैयार हुए हैं। इसके अलावा अब लद्दाख में फ्रंटलाइन पर और ज्‍यादा जवान नहीं भेजे जाएंगे। वहीं इस बयान में कहा गया है, 'एकपक्षीय कार्रवाई के तहत स्थिति में बदलाव से बचा जाएगा और उन एक्‍शन से भी बचा जाएगा जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है।' इस बयान के बाद वर्तमान स्थिति क्‍या है इस पर बस कयास ही लगाए जा रहे हैं।

    विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल

    पूर्वी लद्दाख के मोल्‍डो में हुई वार्ता में विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया का जिम्‍मा संभाल रहे संयुक्‍त सचिव नवीन श्रीवास्‍तव भी सोमवार को कोर कमांडर वार्ता में मौजूद थे। भारत और चीन की कोर कमांडर वार्ता से पहले 10 सितंबर को रूस की राजधानी मॉस्‍को में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई थी। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्‍मेलन से अलग अपने चीनी समकक्ष वांग वाई से मुलाकात की थी। दोनों पांच सूत्रीय एजेंडे पर पहुंचे थे और पूर्वी लद्दाख में जल्‍द से जल्‍द डिसइंगेजमेंट पर रजामंदी बनी थी। भारत और चीन के बीच 15 जून को गलवान घाटी में हिंसा के बाद टकराव हिंसक हो गया था। फिलहाल टकराव को आने वाले पांच अक्‍टूबर को 150 दिन पूरे हो जाएंगे।

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