तो प्रोटोकॉल के तहत एलएसी के कई हिस्सों पर गश्त करेंगे भारत-चीन के सैनिक!
नई दिल्ली। भारत और चीन की सेनाओं के बीच रविवार को पांचवें दौर की कोर कमांडर की वार्ता लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के भारत वाले हिस्से में मोल्डो में हुई। भारत की तरफ से जहां पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) को पैंगोंग इलाका खाली करने को कहा गया है तो वहीं चीनी सेना ने इससे साफ इनकार कर दिया है। वहीं अब ये खबरें भी आ रही हैं कि भारत और चीन टकराव वाली लोकेशंस पर पेट्रोलिंग के लिए प्रोटोकॉल्स तय करने पर विचार कर रही हैं।

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फिंगर एरिया पर तनाव बरकरार
अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की तरफ से बताया गया है पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 17 गोगरा पोस्ट और पैंगोंग त्सो पर फिंगर एरिया पर टकराव बरकरार है।अभी सेना की तरफ से कुछ समय तक डिसइंगेजमेंट का समाधान निकाला जा रहा है। लेकिन पीपी 17 और पैंगोंग पर फिंगर इलाके के लिए लंबे समाधान पर विचार किया जा रहा है। रविवार को जो वार्ता हुई है वह करीब 10 घंटे तक चली है। सूत्रों के मुताबिक सुबह 11 बजे शुरू वार्ता रात 9:30 बजे खत्म हो सके। इस वार्ता में एक बार फिर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) का अड़ियल रवैया देखने को मिला है। दोनों देशों के मिलिट्री कमांडर्स डिसइंगेजमेंट पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।
फिर से न हो 15 जून जैसी घटना
पूर्वी लद्दाख में एलएसी करीब 1597 किलोमीटर है। राजनयिक 15 जून की घटना की पुनरावृत्ति से बचने के लिए अब पेट्रोलिंग प्रोटोकॉल्स पर विचार रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पीएलए ने सड़कें बना ली हैं, फाइबर ऑप्टिक केबल्स बिछाईं और साथ ही सोलर एनर्जी से चलने वाली पोस्ट्स तक तैयार कर डाली हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक सारा ध्यान फिलहाल संपूर्ण डिसइंगेजमेंट पर है और इसके बाद डि-एस्कलेशन पर जिसके तहत कम से कम जवानों की संख्या एलएसी पर तैनात हों। इसके अलावा अब एक ऐसे मैकेनिज्म पर भी चर्चा हो रही है जिसकी वजह से गश्त के दौरान दोनों पक्षों में हिंसा की नौबत न आए।












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