भारत-चीन सीमा विवादः लद्दाख में अब भी कई जगह आमने-सामने हैं सेनाएँ

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भारत ने कहा है कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है.

इसका मतलब ये है कि एलएसी पर संघर्ष वाले इलाक़ों में अभी भी चीन की सेना पीछे नहीं हटी है.

गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से एलएसी पर चीन के सेना तैनात करने और नए ढाँचों के बनाने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने ये टिप्पणी की.

प्रवक्ता बागची ने कहा, "डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया का पूरा होना अभी बाक़ी है."

डिसइंगेजमेंट का मतलब यह है कि दोनों देशों की सेनाएँ, जो पिछले क़रीब एक साल से एक-दूसरे के सामने मोर्चाबंदी करके खड़ी हुई थीं, वो पीछे हटेंगी.

एलएसी पर लद्दाख में दोनों देशों की सेनाएँ पिछले साल से डटी हुई हैं जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कई दौर की वार्ता हुई थी.

इसके बाद इस साल फ़रवरी में दोनों देशों ने ऐलान किया था कि दोनों देशों की सेनाएँ 10 फरवरी से चरणबद्ध तरीक़े से डिसइंगेजमेंट करेंगी.

गुरुवार को भारत के बयान से स्पष्ट है कि ये प्रक्रिया लगभग चार महीने बाद भी पूरी नहीं हुई है.

हालाँकि, अरिंदम बागची ने कहा कि दोनों देशों में ये सहमति हुई है कि इस प्रक्रिया के पूरी होने तक ज़मीन पर स्थिरता बनाई रखी जाएगी और किसी भी नई घटना से बचा जाएगा.

उन्होंने कहा, "इसलिए, हमारी उम्मीद है कि दोनों पक्ष ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो इस सहमति के अनुरूप नहीं है. "

प्रवक्ता ने कहा कि बचे हुए इलाक़ों से डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्वी लद्दाख में डी-एस्केलेशन का रास्ता साफ़ होगा.

उन्होंने कहा, "ऐसा होने से सीमा के क्षेत्रों में शांतिपूर्ण रूप में बहाल होगी और दोनों देशों के रिश्तों में समग्र प्रगति होगी."

डिसइंगेजमेंट और डि-एस्केलेशन में क्या अंतर है?

डिसइंगेजमेंट और डि-एस्केलेशन दोनों का ही सामान्य मतलब है सेनाओं का पीछे हटना और स्थिति का सामान्य होने की ओर बढ़ना. मगर इन दोनों क़दमों का स्तर अलग होता है.

डिसइंगेजमेंट एक स्थानीय प्रक्रिया होती है, यानी किसी मोर्चे पर जो सैनिक एक दूसरे के आमने-सामने डटे हुए थे, वो पीछे हटेंगे.

मगर डि-एस्केलेशन एक व्यापक प्रक्रिया है जो ज़्यादा पुख्ता और बड़ी होती है.

इसके शुरू होने से ये इशारा मिलता है कि हालात वाक़ई सुधर रहे हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जो टिप्पणी की है उससे लगता है कि अभी जब डिसइंगेजमेंट की ही प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो डी-एस्केलेशन के लिए अभी भी काफ़ी कुछ किया जाना बाक़ी है.

भारत चीन
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फ़रवरी में हुई सहमति

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में उभरे तनाव की स्थिति के हल के लिए दोनों देशों के बीच पिछले साल सितंबर में पाँच-बिन्दुओं की सहमति हुई थी.

10 सितंबर, 2020 को मॉस्को में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी आपस में चर्चा के बाद इस पर तैयार हुए थे.

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने तब शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान अलग से मुलाक़ात की थी.

इसमें जो सहमति हुई थी उसके तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच जिन बातों पर सहमति हुई थी, उनमें डिसइंगेजमेंट को जल्दी पूरा करना, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचना, सीमा प्रबंधन पर तय सभी सहमतियों और प्रोटोकॉल का पालन करना और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति की बहाली करना जैसे विषय शामिल थे.

भारत और चीन की सेनाएँ पिछले साल मई के आरंभ से ही पूर्वी लद्दाख में कई जगहों पर आमने-सामने खड़ी हैं और अभी तक वो पूरी तरह से पीछे नहीं हटे हैं.

हालाँकि, कई दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों के बीच कई दौर की हुई बातचीत के बाद फ़रवरी में पैन्गॉन्ग लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से दोनों देशों के सैनिक पूरी तरह पीछे हट गए हैं.

डिइसंगेजमेंट को लेकर वार्ताएँ जारी

दोनों पक्षों के बीच अब पूर्वी लद्दाख के उन बचे इलाक़ों से डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी करने को लेकर बातचीत हो रही है जहाँ दोनों की सेनाएँ अब भी डटी हैं.

इसी साल नौ अप्रैल को दोनों देशों के आला सैन्य कमांडरों के बीच सीमा विवाद को लेकर 11वें दौर की बातचीत हुई लेकिन ये भी बेनतीजा रही.

माना जा रहा था कि इस बैठक के बाद इस साल फरवरी के मध्य में शुरु हुई डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए रास्ता बनाया जा सकेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस बैठक में चीनी पक्ष ने अपने रूख़ में कोई नरमी नहीं दिखाई.

एजेंसी के अनुसार इसके बाद वहाँ कई जगहों पर चीन के अपनी स्थिति को और मज़बूत करने की ख़बरें आई हैं.

लद्दाख
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भारत-चीन तनाव

भारत और चीन के बीच सीमा पर पिछले साल मई में गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी.

1 मई 2020 को दोनों देशों के सौनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख के पैगोन्ग त्सो झील के नॉर्थ बैंक में झड़प हुई. इसमें दोनों ही पक्षों के दर्जनों सैनिक घायल हो गए थे.

इसके बाद 15 जून को विवादित गलवान घाटी में एक बार फिर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई. इसमें दोनों तरफ के कई सैनिकों की मौत हुई.

गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई.

आख़िरकार, इस साल फ़रवरी में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हुई सहमति के बाद इस साल फ़रवरी में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई.

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