केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंचे विपक्षी नेता, पूछा ‘ आपका ED पर नियंत्रण क्यों नहीं’
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में इंडिया ब्लॉक में शामिल विपक्षी दल के नेता जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ शिकायत करने चुनाव आयोग पहुंचे हैं।
चुनाव आयोग से मिलने वाले विपक्षी नेताओं में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, अभिषेक सिंघवी, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सीपीआई-एम महासचिव सीताराम येचुरी, एससीपी नेता जितेंद्र अवहाद, डीएमके की ओर से पी विल्सन, समाजवादी पार्टी की ओर से जावेद अली आदि थे।

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, 'ये गैरकानूनी कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष एकजुट होकर चुनाव आयोग पहुंचा है। ये गंभीर मुद्दा है। ये व्यक्ति या पार्टी विशेष का नहीं, बल्कि ये मसला भारत के संवैधानिक के ढांचे से जुड़ा है।'
सिंघवी ने आगे कहा कि जब चुनाव के लिए एक समान अवसर की आवश्यकता होती है और आप एजेंसियों का दुरुपयोग करके मैदान को समतल नहीं होने देते हैं तो यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और अंततः लोकतंत्र को प्रभावित करता है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा कि, हमने चुनाव आयोग को उनके उत्तरदायित्व की याद दिलाई है। हमने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने के लिए कहा है। आजाद भारत के 75 वर्षों के इतिहास में, पहली बार एक सीएम को गिरफ्तार किया गया है। हमने विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों के दुरुपयोग के सबूत दिए हैं। हमने पूछा कि अगर चुनाव आयोग डीजीपी, सचिव को बदल सकता है तो वह इन एजेंसियों पर नियंत्रण क्यों नहीं रखता?"
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद सीपीआई-एम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि, ''चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आदर्श आचार संहिता लागू है, इसके बावजूद ऐसी कार्रवाई (अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी) की जा रही है, जो कि समान अवसर को नुकसान पहुंचाती है। समान अवसर के बिना लोकतंत्र कुछ भी नहीं है...चुनाव आयोग पुलिस और प्रशासन पर नियंत्रण रखता है तो केंद्रीय एजेंसियों पर क्यों नहीं; उन्हें इस बारे में सोचना होगा।"
वहीं, चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद एनसीपी-शरद गुट के नेता जितेंद्र अवहाद ने कहा कि, "हम चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने के लिए कह रहे हैं, जो चुनाव के दौरान सर्वोच्च निकाय है... लोग धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हर एजेंसी पर विश्वास खो रहे हैं। यह लोकतंत्र की मौत है..."









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