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जगन रेड्डी को लेकर INDIA ब्लॉक के मन में फूटने लगे हैं लड्डू! पर क्यों चकनाचूर हो सकता है विपक्ष का मंसूबा?

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी राज्य में चुनाव के बाद हो रही कथित राजनीतिक हिंसा का विरोध करने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे तो इंडिया ब्लॉक के नेताओं का उनके समर्थन में जमावड़ा लग गया। इस उम्मीद में कि शायद वाईएसआर कांग्रेस के नेता का विरोध टीडीपी से है तो वे अब तो विपक्षी गठबंधन में आ ही सकते हैं।

जगन मोहन रेड्डी के आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में पहुंचने वालों में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सबसे प्रमुख रहे। इनके अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और मुस्लीम लीग के नेताओं ने भी वहां हाजिरी लगाई।

jagan mohan reddy

कांग्रेस ने बनाए रखी जगन मोहन से दूरी
जगन के प्रदर्शन में उनकी पार्टी के अलावा जो एक और गैर-एनडीए और गैर-इंडिया ब्लॉक पार्टी पहुंची थी, वह सिर्फ अन्ना द्रमुक (AIADMK) थी। सूत्रों का कहना है कि इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कांग्रेस को भी बुलाया गया था (किसकी तरफ से यह साफ नहीं), लेकिन उसने यहां से फिलहाल कन्नी काट ली।

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इंडिया ब्लॉक से जगन को गठबंधन में शामिल होने का मिला खुला ऑफर
हालांकि, इसमें इंडिया ब्लॉक के जितने भी सहयोगी पहुंचे उनमें से ज्यादातर ने आंध्र प्रदेश की घटनाओं को लेकर चिंता जरूर जताई, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उनके गठबंधन में शामिल होने की दिली इच्छा खुलकर जाहिर नहीं की। सिर्फ तमिलनाडु की विदुथलाई चिरुथिगल कच्चि (VCK) के नेता ही अपना उतावलापन रोक नहीं पाए।

वीसीके के थोल थिरुमावलवन ने कहा, 'हमें लगता ​​है कि राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक को हिंसा का संज्ञान लेना चाहिए और (जगन रेड्डी को) समर्थन देना चाहिए। वीसीके खुले तौर पर वाईएसआरसीपी को इंडिया ब्लॉक में शामिल होने के लिए आमंत्रित करती है।'

आंध्र प्रदेश में बर्बरता चल रही है- जगन मोहन रेड्डी
अपने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जगन ने सभी नेताओं को धन्यवाद दिया। उनकी पार्टी का दावा है कि आंध्र प्रदेश में चुनावों के बाद की हिंसा में पार्टी के 31 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और 35 अन्य टीडीपी की 'प्रताड़नाओं' की वजह से आत्महत्या कर चुके हैं। पार्टी ने इस दौरान 'रक्त चरित्र' के नाम से एक पुस्तक भी जारी की और दावा किया कि वाईएसआरसीपी के 300 नेताओं की हत्या की कोशिशें हो चुकी हैं।

जगन का आरोप है कि 'मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश पदयात्रा के दौरान एक लाल किताब लेकर चलते थे और टीडीपी के विरोधियों के बारे में नोट बनाते रहते थे। अब हर जिले में टीडीपी के कार्यकर्ता बदला लेने के लिए ऐसी किताब रख रहे हैं। ये बर्बरता है।'

इंडिया ब्लॉक ने जगन मोहन रेड्डी के प्रति जताई सहानुभूति
इस दौराना सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, 'अगर मैं फोटो और वीडियो नहीं देखता तो मुझे सच्चाई का पता नहीं चल पाता। जो सत्ता में हैं, उन्हें समान्य बने रहना चाहिए, दूसरों को सुनना चाहिए और दूसरों की जानें न लें।' उद्धव की शिवसेना के सांसद संजय राउत ने स्पेशल टीम से जांच कराने की मांग की तो किसी ने इसपर आंध्र के राज्यपाल अब्दुल नजीर और सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने का अनुरोध किया।

सिर्फ इंडिया ब्लॉक से नहीं, सभी दलों से समर्थन मांगा है- रेड्डी
लेकिन, जब जगन मोहन रेड्डी से यह सवाल कर लिया गया कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं के जमावड़े के बाद यह मान लिया जाए कि वह गठबंधन में शामिल हो रहे हैं तो उन्होंने सीधा जवाब टाल दिया और बोले कि उन्होंने 'सभी दलों से हिंसा की निंदा' करने के लिए समर्थन मांगा था, सिर्फ इंडिया ब्लॉक के दलों से नहीं। उनके मुताबिक इस मसले पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित से भी मिलने का समय मांगा है।

कांग्रेस से भी है वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की पुरानी अदावत
तथ्य यह है कि जगन रेड्डी की अदावत अगर टीडीपी और चंद्रबाबू नायडू से है तो कांग्रेस से भी दुश्मनी कम पुरानी नहीं है। वे 2011 में जब से अलग पार्टी बनाकर कांग्रेस से दूर हुए कभी उनका उससे जुड़ाव नहीं हुआ। सच तो यह है कि 2009 में एक तरफ संयुक्त आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम और जगन के पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हुई और दूसरी तरफ यूपीए सरकार ने राज्य विभाजन का रास्ता साफ करके उनके अंदर बगावत का बीज डालने का काम कर दिया था।

कांग्रेस की वजह से जगन के पारिवारिक रिश्ते में भी कड़वाहट आई
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तो राज्य से कांग्रेस एक तरह से सियासी तौर पर खत्म ही होती चली गई और उसपर से उनकी बहन वाईएस शर्मिला को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने पारिवारिक रिश्ते में भी सियासत की कड़वाहट घोलने का काम कर दिया।

लोकसभा स्पीकर के चुनाव में भी बीजेपी के साथ खड़ी रही वाईएसआर कांग्रेस
वहीं, 2019 में जबसे आंध्र में जगन रेड्डी की सरकार बनी थी और केंद्र में खासकर राज्यसभा में नरेंद्र मोदी सरकार को उनके सांसदों के समर्थन की दरकार पड़ी तो उन्होंने बेझिझक उनका साथ दिया। मौजूदा लोकसभा में भी जब कांग्रेस की वजह से स्पीकर के चुनाव की नौबत आई तो वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार का साथ दिया, जिसमें टीडीपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।

बीजेपी के शीर्ष नेताओं से जगन मोहन रेड्डी की रही है बेहतर ट्यूनिंग
इस बार के बजट में मोदी सरकार ने आंध्र प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए दिल खोलकर फंड दिया है। जब वहां जगन की सरकार थी तब भी राज्य में बीजेपी उससे दूर थी और पिछला चुनाव भी वह उसके खिलाफ लड़ी है। जगन की सरकार के दौरान जब नायडू जेल गए तो भाजपा ने एक तरह से उनका साथ दिया, फिर भी दिल्ली में बीजेपी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के रिश्ते में किसी भी तरह का खट्टापन नहीं महसूस किया गया।

क्यों चकनाचूर हो सकता है विपक्ष का मंसूबा?
ऐसे में नायडू और रेड्डी की जो भी राजनीतिक दुश्मनी है, वह लगता है कि सिर्फ आंध्र प्रदेश की राजनीति तक ही सीमित है। जगन रेड्डी भी समझते हैं कि आने वाले पांच वर्षों तक अगर उन्हें राज्य में राजनीतिक संघर्ष करना है तो कभी भी केंद्र से मोदी और शाह के आशीर्वाद की जरूरत पड़ सकती है। वह अब राजनीति में नए नहीं हैं। इसलिए, इतनी आसानी से इंडिया ब्लॉक के चक्कर में फंसने के लिए तैयार होंगे यह संभावना दूर की कौड़ी है।

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