यूपी, बंगाल ही नहीं ये राज्य भी बढ़ा रहा है विपक्ष का टेंशन, कांग्रेस को सूपड़ा साफ होने की चिंता!
इंडिया ब्लॉक की चौथी बैठक में सीटों के बंटवारे का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, अभी तक इसमें कोई सफलता नजर नहीं आ रही है। खासकर यूपी और बंगाल में सहयोगी दलों में सीटों की दावेदारी पर ज्यादा पेच फंस रहा है।
लेकिन, 28 विपक्षी दलों में सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को गुजरात की चिंता भी बहुत सता रही है। खासकर खंबात के कांग्रेसी एमएलए चिराग पटेल ने जबसे विधायकी छोड़ी है, पार्टी को वहां अपना बचा-खुचा जनाधार भी खिसकने का डर सता रहा है।

कांग्रेस एमएलए ने छोड़ी विधायकी
कांग्रेस नेता मानते हैं कि पटेल के जाने से आणंद इलाके में पार्टी गढ़ में भी सेंध लग चुकी है। मध्य गुजरात का यह इलाका करीब दो दशकों तक कांग्रेस का मजबूत किला रह चुका है। पटेल ने जिस तरह से लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी और विधायकी छोड़ी है, कांग्रेस के लिए उससे ज्यादा चिंता की बात वह है, जो वे कहकर निकले हैं।
पार्टी को और विधायकों के कांग्रेस छोड़ने की सता रही है चिंता
उन्होंने कहा था कि 'कई और विधायक हैं, जो कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं।' उनके मुताबिक, 'ज्यादातर विधायक पार्टी के कामकाज के तरीके और बहुत ज्यादा गुटबाजी की वजह से नाखुश हैं। नए चेहरों और युवाओं का मौका नहीं मिल रहा है।'
उन्होंने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भी कांग्रेस के स्टैंड पर सवाल उठाया है। कांग्रेस के लिए यह इसलिए बड़ी चेतावनी की तरह है, क्योंकि हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर जैसे नेताओं ने भी कांग्रेस छोड़ते हुए ऐसी ही दलीलें दी थीं।
लोकसभा चुनावों की वजह से कांग्रेस को है टेंशन
राज्य में कांग्रेस के अब सिर्फ 16 विधायक बच गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के सामने चुनौती गंभीर है, जो इंडिया ब्लॉक का भी टेंशन बढ़ा रहा है। गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का गृहराज्य है।
भाजपा के लक्ष्य को कैसे चुनौती देगा विपक्ष?
आज भी गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटें बीजेपी के पास हैं। लेकिन, इस बार उसने लक्ष्य यह तय किया है कि सारी 26 सीटें तो जीतना ही है, जीत का अंदर हर सीट पर 5 लाख से ज्यादा वोटों का रखना है।
आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं चाहते कांग्रेस नेता
गुजरात कांग्रेस के नेता अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह से तालमेल के पक्ष में नहीं हैं। जबकि, यह दोनों दल विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्ल़ॉक का हिस्सा हैं।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के मुताबिक, 'प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने एआईसीसी को पहले ही बता दिया है कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में वे नहीं हैं, इस पार्टी ने 2022 में नुकसान पहुंचाया था। हम सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन यह भी जानते हैं कि ज्यादा कुछ चौंकाने वाला नहीं कर पाएंगे। एक या दो सीट पर जीत से भी बीजेपी को तगड़ा झटका लगेगा।'
आम आदमी पार्टी की एंट्री से हिल गई कांग्रेस की नींव
2017 में कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव में 182 में से 77 सीटें जीती थी और उसे करीब 41% वोट मिले थे। लेकिन, 2022 में आम आदमी पार्टी ने बहुत ही गंभीरता से चुनाव लड़ा। पार्टी न सिर्फ 5 सीटें जीत गई, बल्कि करीब 13% वोट जुटाने में भी सफल हो गई।
इसका परिणाम ये हुआ कि कांग्रेस का वोट शेयर घटकर सिर्फ 27% के करीब रह गया और सीटें सिमटकर 17 रह गईं। दोनों चुनावों में भाजपा के वोट शेयर में सिर्फ 3% का इजाफा हुआ, लेकिन सीटें 99 से बढ़कर रिकॉर्ड 156 तक पहुंच गईं।
ऐसी स्थिति में इंडिया ब्लॉक के सामने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा करना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। वहीं कांग्रेस को इस बात का डर है कि अगर भारतीय जनता पार्टी ने 5 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने का अपना मिशन पूरा कर लिया तो प्रदेश में उसके राजनीतिक वजदू पर भी सवाल उठने लगेंगे।












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