Women Reservation Bill पर क्या है INDIA Bloc का प्लान? संसद में वोटिंग से पहले विपक्ष की स्ट्रैटेजिक मीटिंग
Women Reservation Bill Voting Today: संसद के विशेष सत्र का सबसे अहम दिन है। 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा तय किए गए समय के अनुसार, आज शाम 4 बजे तीन ऐतिहासिक विधेयकों पर मतदान (Voting) होना है।
ये बिल हैं-'संविधान 131वां संशोधन विधेयक', 'परिसीमन विधेयक 2026' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक'। जहां सरकार इन बिलों को 'नारी शक्ति' के अधिकार के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ब्लॉक ने मोदी सरकार का खेल बिगाड़ने के लिए अपनी बिसात बिछा दी है।

संसद भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चेंबर में विपक्षी दलों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें सरकार की घेराबंदी के लिए ठोस रणनीति तैयार की गई है।
INDIA Bloc Floor Meeting: क्या है INDIA ब्लॉक की रणनीति: समर्थन या घेराबंदी तय होगी रणनीति
वोटिंग से ठीक पहले INDIA ब्लॉक के सांसदों की एक अहम बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद स्थित कक्ष में बुलाई गई है। इस बैठक में विपक्ष के बड़े नेता शामिल हो रहे हैं और संसद के अंदर की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में महिला आरक्षण बिल पर एकजुट रुख, परिसीमन बिल का विरोध कैसे तेज किया जाए और संसद में सरकार को किस तरह घेरा जाए इन मुद्दों पर फोकस रहेगा।
विपक्षी गठबंधन ने इस बार सरकार को सीधे 'ना' कहने के बजाय 'शर्तों' के साथ घेरने का मन बनाया है। खड़गे के नेतृत्व में हुई बैठक के बाद जो रणनीतिक संकेत मिले हैं, वे इस प्रकार हैं:
1. परिसीमन पर कड़ा प्रहार: विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध 'परिसीमन विधेयक' को लेकर है। INDIA ब्लॉक के नेताओं का मानना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटें 850 तक बढ़ाना दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय है। विपक्ष आज सदन में मांग करेगा कि परिसीमन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और राज्यों की वर्तमान ताकत (Political Weightage) को प्रभावित न किया जाए।
2. कोटे के भीतर कोटा (OBC Reservation): विपक्षी दल महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित करने के मुद्दे पर अड़े हुए हैं। सपा, आरजेडी और कांग्रेस के सांसद आज मतदान से पहले इस मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे। उनका तर्क है कि बिना 'कोटे में कोटे' के यह आरक्षण केवल एक खास वर्ग तक सीमित रह जाएगा।
3. जाति जनगणना की शर्त: विपक्ष की मांग है कि परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू करने से पहले देश में विस्तृत जाति जनगणना (Caste Census) के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। वेणुगोपाल और अखिलेश यादव जैसे नेता यह सवाल उठाएंगे कि जब जनगणना शुरू हो चुकी है, तो बिना आंकड़ों के सीटों का निर्धारण कैसे संभव है?
4. फ्लोर मैनेजमेंट: शाम 4 बजे होने वाली वोटिंग के दौरान विपक्षी सांसद एकजुट होकर सरकार के प्रस्तावों के खिलाफ संशोधन (Amendments) पेश करेंगे। यदि सरकार इन संशोधनों को नहीं मानती, तो विपक्ष परिसीमन बिल के खिलाफ मतदान कर सकता है।
संसद में शाम 4 बजे की वोटिंग क्यों है खास?
चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) है, इसलिए सरकार को इसे पास कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी। गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यह बिल राष्ट्रहित में है और इसमें किसी भी राज्य (खासकर दक्षिण भारत) के साथ भेदभाव नहीं होगा।
सरकार को भरोसा है कि कुछ निर्दलीय और छोटे दलों के समर्थन से वे यह आंकड़ा पार कर लेंगे। वहीं दूसरी ओर INDIA ब्लॉक की कोशिश है कि मतदान के दौरान सरकार को पूर्ण बहुमत न मिले या फिर जनभावनाओं के दबाव में सरकार को उनके संशोधनों को स्वीकार करना पड़े।
क्या होगा अगर बिल पास नहीं हुआ?
अगर आज शाम 4 बजे होने वाली वोटिंग में सरकार आवश्यक बहुमत नहीं जुटा पाती, तो महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने का सपना एक बार फिर कानूनी उलझनों में फंस सकता है। यह न केवल सरकार के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि 2029 के चुनावी समीकरणों को भी पूरी तरह बदल देगा। संसद के गलियारों में हलचल तेज है और सबकी नजरें घड़ी की सुइयों पर टिकी हैं शाम 4 बजे तय होगा कि नारी शक्ति का यह 'वंदन' किस रूप में हकीकत बनेगा।














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