INDIA bloc की दुविधाओं का जिम्मेदार कौन? 5 बैठकों के बाद नीतीश की 'ना' और खड़गे की 'हां' तक पहुंचा गठबंधन

विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक को बने 6-7 महीने हो चुके हैं। इसकी कुल पांच बैठकें भी हो चुकी हैं, जिसमें आखिरी वर्चुअल मीटिंग शनिवार 13, जनवरी, 2024 को ही हुई है। लोकसभा चुनाव बेहद करीब आ चुके हैं, लेकिन अभी तक यह गठबंधन रफ्तार नहीं पकड़ सका है।

शनिवार की बैठक वर्चुअल थी। इसमें शामिल नेताओं को किसी एक शहर में इकट्ठा नहीं होना था। फिर भी 28 में से 18 दल के नेताओं को विपक्षी एकता को आगे बढ़ाने के लिए समय निकालने की फुर्सत नहीं मिली।

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गठबंधन के प्रति सहयोगियों की उदासीनता
सिर्फ कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, जेडीयू, आरजेडी, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी (शरद पवार), जेएमएम और नेशनल कांग्रेस के नेताओं ने ही इसमें शिरकत की।

इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में गठबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाली कुछ बड़ी पार्टियों के नुमाइंदे नदारद रहे। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 170 सीटें हैं।

टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इंडिया ब्लॉक की बैठक के लिए समय निकालने से ज्यादा अपने दूसरे कार्यों को तबज्जो देना जरूरी समझा।

अभी तक इंडिया ब्लॉक में सभी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए संयोजक बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन, वर्चुअल बैठक में अचानक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन का नाम चेयरपर्सन के तौर पर आगे रख दिया गया। लेकिन, इसपर भी फिलहाल आखिरी मुहर नहीं लग पाया है, क्योंकि, ज्यादातर सहयोगी दल तो मौजूद ही नहीं थे।

पिछली बैठक में पीएम उम्मीदवार के तौर पर उछाला गया था खड़गे का नाम
इससे पहले 19 दिसंबर को दिल्ली में हुई चौथी बैठक में ममता बनर्जी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनका नाम गठबंधन के पीएम उम्मीदवार के तौर पर बढ़ा दिया था। उसके बाद से ही बिहार के सीएम नीतीश कुमार की नाराजगी की खबरें आनी शुरू हो गई थीं।

अब नीतीश को संयोजक पद नहीं पसंद!
लेकिन, इस बार जब नीतीश का नाम संयोजक पद के लिए बढ़ाया गया तो उन्होंने खुद ही आनाकानी शुरू कर दी। जानकारी के मुताबिक कभी उन्होंने इसके लिए अपने मौसमी मित्र लालू यादव का नाम आगे बढ़ाया तो कभी कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नाम की पैरवी की। यही नहीं उन्होंने सभी दलों के प्रमुखों की एक समिति बनाने का भी प्रस्ताव रखा।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्चुअल मीटिंग में मौजूद रहे एक वरिष्ठ नेता ने बताया, 'सोनिया और राहुल ने ब्लॉक के हित को ध्यान में रखकर बिहार के सीएम से संयोजक पद स्वीकार लेने के लिए बार-बार अनुरोध किया। लेकिन, उन्होंने इससे इनकार कर दिया।'

चेयरपर्सन का नाम आने से पीछे हट गए नीतीश!
उधर जेडीयू के अंदर के लोगों की मानें तो नीतीश दो वजहों से यह पद लेने के लिए तैयार नहीं हुए। पहला कि यह ऑफर मिलने में बहुत देर कर दी गई है; और दूसरा जो कि एक वरिष्ठ जेडीयू नेता ने कहा है खड़गे का नाम गठबंधन के चेयरपर्सन के लिए बढ़ा दिया गया है, यानी संयोजक को उसके अंदर काम करना पड़ेगा।

माना जा रहा है कि भाजपा-विरोधी दलों को एकजुट करने की एवज में नीतीश को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चेयरपर्सन पद होने का मतलब है कि संयोजक के लिए कुछ खास करने के लिए नहीं बचेगा।

सात महीने चले ढाई कोस!
मतलब, जिस इंडिया ब्लॉक का गठन लोकसभा चुनावों में भाजपा और उसके अगुवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुकाबला करने के लिए हुआ है, वह अभी तक गठबंधन के संगठन की रूप-रेखा भी नहीं तय कर पा रहा है।

यह उस सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने वाला है, जो अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के मिशन के साथ चुनावी बिगुल फूंक चुका है।

सीटों के बंटवारे पर भी ठोस नतीजा निकलने का इंतजार
इंडिया ब्लॉक में अभी तक ये हुआ है कि प्रदेश स्तर पर सहयोगियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हुई है और यह चल भी रही है। लेकिन, यह काम भी न तो शुरू में आसान था और न अभी भी आसान होता नजर आ रहा है। बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक और यूपी से लेकर दिल्ली-पंजाब तक कई तरह के पेच फंस रहे हैं।

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अब 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' पर रहेगा कांग्रेस का जोर
दूसरी तरफ गठबंधन की सबसे पार्टी कांग्रेस लोकसभा चुनावों के आगाज तक के लिए राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' पर निकल चुकी है। इंडिया ब्लॉक जिस पार्टी के मुखिया खड़गे को अपना चेयरपर्सन बनाने के लिए तैयार है, उनकी पार्टी की ज्यादातर ऊर्जा तो फिलहाल इस यात्रा को सफल बनाने में लगने वाली है।

ऐसे में खड़गे किस ग्रुप की अगुवाई करेंगे यह बड़ा सवाल बना हुआ है। जिस गठबंधन में वर्चुअल मीटिंग में शामिल होना भी नेताओं के लिए पहाड़ बन चुका है।

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