कांग्रेस में और कितने 'मिलिंद'? 2019 के बाद से अबतक इन 13 दिग्गजों का हुआ राहुल से मोहभंग!
Congress young and old leaders who left party after 2019: कांग्रेस पार्टी ने 2019 का चुनाव औपचारिक तौर पर राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा था। आज भी पार्टी की कमान राहुल सामने से भले ही नहीं संभाल रहे हों। लेकिन, पार्टी के हर फैसले में उनका सीधा दबदबा नजर आता है। इन पांच वर्षों में कांग्रेस को एक से एक युवा और अनुभवी दिग्गज अलविदा कह चुके हैं।
मिलिंद देवड़ा
टीम राहुल से जिन कांग्रेस नेताओं का मोहभंग हुआ है, उनमें सबसे नया नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा का है। कांग्रेस के दिग्गज नेता मुरली देवड़ा के बेटे के बारे में कहा जा रहा है कि वह मुंबई की सीटों पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) की मांग के सामने पार्टी के सरेंडर करने से मायूस थे! उन्हें पार्टी में रोके रखने के लिए सारी कोशिशें बेकार चली गईं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया
राहुल गांधी की कोर टीम में से सबसे हाई-प्रोफाइल इस्तीफा ज्योतिरादित्य सिंधिया का माना जा सकता है। वे 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के एक अहम किरदार थे।
लेकिन, प्रदेश नेतृत्व से मतभेद की वजह से 2020 के मार्च में पार्टी छोड़ दी। वह 18 साल से कांग्रेस से जुड़े थे और यह विरासत उन्हें अपने पिता माधव राव सिंधिया से मिली थी।
उनके करीबी लगभग 20 विधायकों के इस्तीफे की वजह से वहां कमलनाथ की सरकार गिर गई और बीजेपी को फिर से सरकार बनाने का मौका मिल गया। बाद में सिंधिया बीजेपी में शामिल होकर राज्यसभा में पहुंचे और 2021 में नरेंद्र मोदी के कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनाए गए।
हार्दिक पटेल
2015 में पाटीदार आंदोलन से गुजरात में हार्दिक पटेल एक बहुत बड़ा नाम बन गया। कांग्रेस ने उन्हें अपनी राजनीति में शामिल कराया। लेकिन, मई 2022 में उनका मन भी कांग्रेस से ऊब गया। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल कराया गया था। जून 2022 में उन्होंने भी भाजपा का कमल थाम लिया।
जितिन प्रसाद
एक जमाने में जितिन प्रसाद यूपी में कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरा माने जाते थे। कांग्रेस की राजनीति उन्हें भी विरासत में मिली थी। पहली बार 2004 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी जीत गए और यूपीए सरकार में मंत्री बनने का भी मौका मिला।
2021 में उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी का काम किया। पार्टी बुरी तरह हारी। उसी साल जून में वे बीजेपी में शामिल हो गए और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री बने।
आरपीएन सिंह
आरपीएन सिंह भी कांग्रेस की अगुवाई वाली मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में मंत्री रह चुके थे। पिछले यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनवरी 2022 में जिन हाई-प्रोफाइल नेताओं की बीजेपी में एंट्री हुई थी, उनमें ये भी प्रमुख थे।
वह प्रदेश के एक अहम पिछड़े वर्ग के नेता हैं। माना जाता है कि प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व के दौरान अपनी लगातार उपेक्षा ने उनका कांग्रेस से मोहभंग कर दिया था।
सुष्मिता देव
सुष्मिता देव कांग्रेस की उन नेताओं में शामिल थीं, जिन्हें पार्टी की फर्स्ट फैमिली के बेहद करीब माना जाता था। वह एक बार असम की सिलचर सीट से पार्टी की सांसद भी थीं, लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव हार गईं।
2021 में जब उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी तब राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। उसी साल अगस्त में वो टीएमसी में चली गईं और ममता बनर्जी के आशीर्वाद से राज्यसभा में पहुंच गईं।
अल्पेश ठाकोर
पूर्व कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर ने 2019 के जुलाई में राज्यसभा उपचुनाव में गुजरात में पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मतदान करने के बाद कांग्रेस छोड़ दी।
कुछ समय बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में वे पार्टी के टिकट पर गांधीनगर दक्षिण सीट से एमएलए चुने गए।
अनिल एंटनी
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले अनिल एंटनी दक्षिण भारत (केरल) के अहम राजनीतिक चेहरा हैं। वह पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेसी दिग्गज एके एंटनी के बेटे हैं।
उन्होंने पहले वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और फिर पिछले साल जनवरी में भाजपा में शामिल हो गए। उनके पाला बदलने से उनके पिता ने भी मायूसी दिखाई।
जयवीर शेरगिल
अगस्त 2022 में कांग्रेस के नेता और पार्टी के सबसे युवा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने पार्टी में चाटुकारिता का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था।
उसी साल दिसंबर में 40 साल के नेता बीजेपी में शामिल हो गए और राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त हो गए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्य करने के तरीके की जमकर सराहना की और अपनी पिछली पार्टी के 'हाई कमान' संस्कृति की आलोचना शुरू कर दी।
गुलाम नबी आजाद
शेरगिल के कांग्रेस छोड़ने से दो दिन पहले ही दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद का भी पार्टी से मन भर गया था। 2022 में उनका कांग्रेस छोड़ना पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका था। वह केंद्र सरकार और पार्टी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके थे और पहले जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रह चुके थे।
वह कांग्रेस के उस ग्रुप-23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सोनिया गांधी को लिखी एक बहुचर्चित चिट्ठी में कथित तौर पर राहुल गांधी की कार्यशैली पर सीधे उंगली उठाने की 'गलती' की थी। कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी जम्मू और कश्मीर डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी बनाई है।
कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल भी कांग्रेस के उस ग्रुप-23 वाले नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कई बार कांग्रेस की कार्यशैली पर सार्वजनिक सवाल उठाए थे। एक बार तो वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के टमाटर प्रहार का भी शिकार हो गए थे।
16 मई, 2022 को उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के सांसद चुने गए।
अश्विनी कुमार
अश्विनी कुमार यूपीए सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे थे। उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले फरवरी, 2022 में कांग्रेस छोड़ दी।
सुनील जाखड़
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 2022 में पार्टी छोड़ दी थी, क्योंकि कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करने के लिए उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था।
उसी साल मई में वे भाजपा में शामिल हो गए और जुलाई में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। जाखड़ का भी कांग्रेस से रिश्ता विरासत में जुड़ा था।












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