Rice Export: गैर-बासमती चावल एक्सपोर्ट पर भारत ने लगाई रोक, ग्लोबल मार्केट पर क्यों पड़ सकता है बुरा असर?
Rice Export: भारत सरकार ने गैर-बासमती सफेद चावल के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है। जिसके बाद से ग्लोबल मार्केट पर बड़ा असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि निर्यात प्रतिबंध का कारण चावल की घरेलू कीमत में वृद्धि हो सकती है।
Rice Export: भारत ने गुरुवार को नॉन बासमती सफेद चावल के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी गई है। केंद्र सरकार के इस फैसले से कई देशों में चावल की किल्लत के हालात पैदा कर सकता है। खास कर उन देशों पर जो सीधे तौर पर चावल के एक्सपोर्ट (निर्यात) को लेकर भारत पर निर्भर हैं। आपको बता दें कि भारत से अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप समेत अन्य देशों में चावल का एक्सपोर्ट किया जाता है।
ग्लोबल चावल एक्सपोर्ट में देश की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है, और बाजार पर बारीकी से नजर रखने वाली एजेंसियों के अनुसार, यह एशियाई चावल के सबसे प्रतिस्पर्धी मूल्य वाले स्रोतों में से एक है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने गुरुवार को एक अधिसूचना जारी कर गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात को 'मुक्त' निर्यात श्रेणी से 'निषिद्ध' श्रेणी में ट्रांसफर कर दिया है। हालांकि, अधिसूचना में कहा गया है कि अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की इजाजत से कुछ एक्सपोर्ट की इजाजत दी जाएगी।

जानें क्या कहते हैं आंकड़े?
एक्सपोर्ट पर रोक के कारण का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। संभवतः चावल की कीमत में वृद्धि हो सकता है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 19 जुलाई तक चावल औसतन 40.9 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो एक साल पहले की तुलना में 11.3 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक कृषि निर्यात का मासिक डेटाबेस रखने वाले अमेरिकी कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 में वैश्विक चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत थी, जो जून 2023 तक बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई।
सरकार के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा बनाए गए भारतीय आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 22.3 मिलियन मीट्रिक टन (एमटी) चावल का निर्यात किया। इसमें से 57 प्रतिशत गैर-बासमती चावल था, जिस श्रेणी को अब निर्यात के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
एक्सपोर्ट पर रोक की वजह घरेलू कीमत में वृद्धि ?
एपीईडीए के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के कुल चावल निर्यात में गैर-बासमती चावल की हिस्सेदारी काफी तेजी से बढ़ रही है, जबकि कुल मिलाकर चावल निर्यात भी बढ़ रहा है। हालांकि, सरकार ने इस बार सामने आकर यह नहीं कहा है, लेकिन पिछले निर्णयों के अनुसार, निर्यात प्रतिबंध का कारण चावल की घरेलू कीमत में वृद्धि हो सकती है।
भारत ने बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए सितंबर 2022 में टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और विभिन्न अनाजों के निर्यात पर 20 प्रतिशत टैक्स लगाया था। इस साल जून में, सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना के तहत राज्य सरकारों को चावल की बिक्री रोकने का आदेश पारित किया, यह सुनिश्चित करने के लिए कि केंद्रीय पूल में पर्याप्त स्टॉक स्तर सुनिश्चित करते हुए मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखा जाए।
चावल निर्यात पर प्रतिबंध से विभिन्न विदेशी सरकारों द्वारा की गई बाजार भविष्यवाणियों पर असर पड़ने की संभावना है। अमेरिकी कृषि विभाग ने जून में एक नोट में कहा था कि भारत के 2023 में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत वाले वैश्विक चावल निर्यातक बने रहने की उम्मीद है, जिसे 14 जुलाई को भी दोहराया गया था।
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