भारत ने चीन से कहा-बॉर्डर पर शांति, स्थिरता के लिए गंभीरता से काम करे
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी टकराव को तीन माह हो चुके हैं। गुरुवार को भारत ने चीन ने कहा है कि डिसइंगेजमेंट और डि-एस्कलेशन की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए गंभीरता से काम करे जैसा पिछले माह हुई स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स (एसआर) वार्ता में दोनों देशों के बीच तय हुआ है।

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डोवाल ने की थी चीनी विदेश मंत्री से बात
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव की तरफ से यह टिप्पणी उस समय की गई जब उनसे पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव से जुड़ा सवाल पूछा गया था। उनका इशारा पांच जुलाई को चीन के विदेश मंत्री वांग वाई और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल के बीच हुई वार्ता की तरफ था। एसआर मैकेनिज्म के तहत हुई इस वार्ता में पूरी तरह से डिसइंगेजमेंट पर सहमति बनी थी। दोनों राजनयिकों ने इस दौरान फोन पर वार्ता की थी। डोवाल और वांग दोनों विशेष प्रतिनिधि हैं। अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, 'दोनों विशेष प्रतिनिधि इस बात पर राजी हुए थे कि दोनों तरफ से सेनाओं को डिसइंगेजमेंट की पूरी प्रक्रिया फॉलो करनी पड़ेगी और भारत-चीन के बॉर्डर वाले इलाकों पर डिएस्कलेशन को द्विपक्षीय समझौतों के तहत पूरा किया जाएगा जो कि शांति और स्थिरता के साथ ही साथ द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।'
कंफ्यूशियस इंस्टीट्यूट पर क्या कहा
उन्होंने आगे कहा कि भारत उम्मीद करता है कि चीन डिसइंगेजमेंट के लिए भारत के साथ मिलकर गंभीरता के साथ काम करेगा। अनुराग श्रीवास्तव से चीन के कंफ्यूशियस इंस्टीट्यूट के बारे में भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत सरकार चीनी संस्थान के काम-काज के तरीकों पर नजर रख रही है? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि सरकार की तरफ से कुछ खास गाइडलाइंस तय की गई हैं और अगर उन निर्देशों के उल्लंघन पर किसी भी तरह की कार्रवाई हो सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसके पीछे साल 2009 में जारी किए गए निर्देशों का हवाला दिया।












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