सीमा पर तनाव, सेना ने देश में ही युद्ध सामग्री बनाने का किया फैसला
चीन और पाकिस्तान की तरफ से बढ़ते सीमा विवाद को देखते हुए भारतीय सेना ने अब विदेशों से युद्ध सामग्री मंगाने की जगह देश में ही विकसित करने का फैसला किया है।
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान की तरफ से बढ़ते सीमा विवाद को देखते हुए भारतीय सेना ने अब विदेशों से युद्ध सामग्री मंगाने की जगह देश में ही विकसित करने का फैसला किया है। दरअसल, विदेशों से युद्ध सामग्री और कलपुर्जों को मंगाने में काफी समय लगता था ऐसे में भारतीय सेना ने फैसला किया है कि वह लड़ाकू टैंकों और अन्य सैन्य प्रणालियों के महत्वपूर्ण सामग्रियों को देश में ही बनाएगी।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश की 41 आयुध कारखानों ने अगले तीन वर्षों में विदेशों से मंगाई जाने वाली युद्ध सागग्री की मात्रा को आधा करने का फैसला लिया है। साथ ही सेना को युद्ध सामग्री की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार आयुध महानिदेशक ने देश की तमाम रक्षा फर्मों से स्वदेशी तरीके से युद्ध सामग्री विकसित करने की बातचीत भी शुरू कर दी है। अधिकारी ने आगे बताया कि आयुध महानिदेशक हरसाल 10,000 करोड़ के युद्ध सामग्री और युद्ध में प्रयोग आने वाले कलपुर्जे खरीदती है।
बता दें कि भारतीय सैन्य बल यह लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि विदेशों से युद्ध सामग्री आने में काफी समय लगता है जिससे सैन्य उपकरणों का देखरेख प्रभावित होता है। ऐसे में विस्तृत समीक्षा के बाद सरकार ने सैन्य उपकरणों में प्रयोग होने वाले कलपुर्जों और कुछ युद्ध सामग्रियों को स्वदेश में ही विकसित करने का फैसला लिया है। भारत को सैन्य उपकरणों को आपूर्ति करने के मामले में रूस सबसे बड़ा देश है।
इस बीच रूस ने रविवार को भारत को अपना नया फाइटर प्लेन मिग-35 बेचने की इच्छा जताई है। मिग-35 रूस का सबसे आधुनिक पीढ़ी का बहुउद्देशीय युद्धक विमान बताया जा रहा है। बता दें कि भारत पिछले 50 सालों से मिग के फाइटर जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है।












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