22,000 जिंदगियों को बचाने वाली सेना अगर नहीं होती जम्मू कश्मीर में तो आ जाती आफत
बैंगलोर। [ऋचा बाजपेई] जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ देश पर एक नया संकट बनकर सामने आई है और हमारी सेनाएं फिर से अपने 'सजग प्रहरी' वाले रोल से अलग 'सजग रक्षक' के रोल में नजर आने लगी हैं।

इंडियन आर्मी, एयर फोर्स और अब इंडियन नेवी, तीनों सेनाएं इस मुश्किल से लोगों को निकालने के लिए मुस्तैदी से काम कर रही हैं।
क्या होता अगर न होती सेना श्रीनगर में
बैंगलोर निवासी और रिटायर्ड एयर मार्शल बीके पांडेय से जब हमने पूछा कि अगर जम्मू-कश्मीर से एएफएसपीए को हटा लिया जाता या फिर हमारी सेनाएं वहां पर इन हालातों में मुस्तैद न होती तो क्या आज हालात अलग नहीं होते?
इस पर उनका जवाब था, 'अक्सर कहा जाता है कि भगवान और डॉक्टर को लोग संकट के खत्म होते ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल श्रीनगर और पूरे राज्य में हमारी सेनाओं के साथ है। इस बात में तनिक भी झूठ नहीं है कि अगर श्रीनगर में सेना सक्रिय न होती तो हालात और बिगड़ जाते। सेना ने वहां पर अपने राहत कैंप लगाए हुए हैं। सेना की ओर से लोगों को खाना, दवाईयां और बाकी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।'
मुश्किलें दूर करने में आगे रहती सेना
वहीं रिटायर्ड कर्नल आर डी बाली की मानें तो देश में आपदा प्रबंधन फिलहाल उतना बेहतर नहीं है जितना इसे होना चाहिए। कर्नल बाली के मुताबिक सेनाओं में बाढ़ या किसी भी आपदा से निबटने का प्रशिक्षण मुहैया कराया जाता है। ऐसे में संकट के समय प्रशिक्षित सैनिक पहुंचकर मुश्किलों को काफी हद तक दूर कर देते हैं। उन्होंने हमें जानकारी दी कि एक रणनीति के तहत सेना बचाव और राहत कार्यों को अंजाम देती है। हालातों से वाकिफ सैनिक किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन में अपनी पूरी जान लगाकर लोगों की जान बचाते हैं।
क्या हो अगर हट जाए एफएसपीए
जिस राज्य में कभी सेनाओं पर पत्थर बरसाएं जाते हैं तो कभी ऑर्म्स फोर्सेज स्पेशल एक्ट (एएफएसपीए) हटाने और सेना को वहां से निकालने की मांग की जाती है, उसी राज्य में हमारे सैनिक अपनी जान की परवाह किए बिना जिंदगियों को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।
जरा सोचिए क्या होता अगर हमारी सेना जम्मू-कश्मीर में इस कदर सक्रिय नहीं हुई होती? विशेषज्ञों की मानें तो यह एक्ट घाटी में काफी जरूरी है लेकिन इससे अलग अगर इस तरह की समस्या कभी भी आती है तो, सेना मदद करने में जरा भी देर नहीं करती है। उसे इस बात से भी कभी कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह एक्ट किसी राज्य में लागू है या नहीं। वह सिर्फ लोगों की जान बचाने पर अपना ध्यान लगाने लगती है।
राहत और बचाव कार्य की स्थिति
- एयरफोर्स के 23 एयरक्राफ्ट्स और 26 हेलीकॉप्टर डेप्लॉयड
- सेना ने 184 आर्मी कॉलम्स
- एनडीआरफ की छह टीमें
- इंडियन नेवी के 200 मार्कोस कमांडोज
कैसे करती है सेना मदद
- सेना में शामिल होने से पहले किसी भी सैनिक को बाढ़ और इस तरह की आपदाओं से निबटने की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है।
- सेना के पास बाढ़ राहत कार्यों के लिए अपनी एक खास रणनीति होती है।
- किसी भी इलाके का आर्मी हेडक्वार्टर या फिर सब-एरिया हेडक्वार्टर की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने एरिया के हालातों को देखते हुए और अपनी शक्तियों का सही प्रयोग कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दें।
- रेस्क्यू ऑपरेशन के समय सिविल एडमिनिस्ट्रेशनल डिप्टी कलेक्टर की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी हालात से निबटने के लिए सहायता प्रदान करें लेकिन उनके पास सही कार्यबल नहीं होता है जिससे कि वह किसी भी तरह की मदद प्रदान कर सकें।












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