पीएम मोदी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में किया GST का जिक्र, लिखा- इस कदम से यूनिफाइड होगा इंडियन मार्केट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में अमेरिका और भारत के पारस्परिक सहयोग की बात की है और कहा है कि 'मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले दशकों में हमारे साझा प्रयास और समान महत्वकांक्षाओं से विकास की न
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के अमेरिकी दौरे पर है सोमवार को उनकी मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होनी है। ट्रंप से मुलाकात से पहले नरेंद्र मोदी का अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल के ओपेन एडिटोरियल कॉलम में लेख छपा है। जिसमे मोदी ने लिखा है कि अगर भारत और अमेरिका साथ मिलकर काम करें तो दोनों देशों के साथ-साथ पूरी दुनिया को फायदा होगा। पीएम मोदी ने जीएसटी को अमेरिकी व्यवसाय के लिए एक बड़ा रिफॉर्म करार दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में अमेरिका और भारत के पारस्परिक सहयोग की बात की है और कहा है कि 'मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले दशकों में हमारे साझा प्रयास और समान महत्वकांक्षाओं से विकास की नई ईबारत लिखी जाएंगी। पीएम मोदी ने लिखा है कि मै इस बार पूरे विश्वास के साथ वापस लौटा हूं। पिछली बार यूएस कांग्रेस के ज्वाइंट सेशन में मैंने कहा था कि 'भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते और मजबूत होने के कगार पर है जो भी झिझक थी खत्म हो चुकी है।एक साल बाद मैं फिर वापस आया हूं, इस विश्वास के साथ कि दोनों देशों के बीच मिलकर चलने की भावना मजबूत होगी। ये विश्वास हमारे साझा मूल्यों और तंत्र के स्थायित्व के चलते पैदा हुआ है'
पीएम मोदी ने अपने लेख में बताया है कि जीएसटी अमेरिकी बिजनेस के लिए बड़ा रिफॉर्म्स है इससे हमारी स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप और मजबूत होगी। 'अभी दोनों देशों के बीच ट्रेड हर साल 115 बिलियन डॉलर यानी करीब 73.16 खरब रुपए का है। व्यापार को इससे कई गुना बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इंडियन कंपनियां यूएस के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सैक्टर में योगदान कर रही है। करीब 15 बिलियन डॉलर करीब 9.66 खरब रुपए के इन्वेस्टमेंट के साथ उनकी प्रेजेंस 33 राज्यों में है। उन इलाकों में इन कंपनियों की पहुंच है, जहां इंडस्ट्री कमजोर हैं। इसी तरह अमेरिकन इंडस्ट्रीज ने भी भारत में 20 बिलियन डॉलर करीब 12.88 खरब रुपए के इन्वेस्टमेंट के जरिए ग्लोबल ग्रोथ को बढ़ाया है।'
वहीं पीएम मोदी ने अपनी लेख में एविएशन की जरुरतों पर भी बातें की है उन्होंने लिखा है कि 'भारत की एविएशन की जरूरतें बढ़ रही हैं। गैस, न्यूक्लियर, क्लीन कोल और रिन्यूएबल एनर्जी की डिमांड भी बढ़ रही है। ये दो बड़े सेक्टर्स हैं, जिनमें साझेदारी बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में भारत 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का एनर्जी एक्सपोर्ट अमेरिका से करेगा। इसके अलावा 200 से ज्यादा अमेरिका मेड प्लेन भारत की प्राइवेट एविएशन फ्लीट से जुड़ेंगे।'
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