Global Hunger Index: हंगर इंडेक्स में 3 पायदान नीचे खिसका भारत, बांग्लादेश से भी पीछे, स्थिति चिंताजनक
नई दिल्ली। एक तरफ हम आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं, नई नई तकनीकियों की मदद से देश को डिजिटल करने की कोशिश हो रही है वहीं दूसरी तरफ भारत की एक दुखद और शर्मनाक तस्वीर दुनिया के सामने आई है जो कि बेहद चिंताजनक है। यहां हम बात कर रहे हैं ग्लोबल हंगर इंडेक्स की। आपको जानकर दुख होगा कि 119 देशों के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत तीन पायदान नीचे खिसककर 100 स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल भारत इस सूचकांक (इंडेक्स) में 97वें पायदान पर था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट-2017 के मुताबिक इस मामले में भारत उत्तर कोरिया, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों से भी पीछे है, लेकिन हां वो पाकिस्तान से जरूर आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस सूचकांक में चीन की रैंकिंग 29, नेपाल 72, म्यांमार 77, श्रीलंका 84 और बांग्लादेश 88 स्थान पर हैं यानी भारत इन पड़ोसी देशों से भी पीछे है, हालांकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्रमश: 106वें और 107वें स्थान पर हैं।

आपको बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) की रैंकिंग अमेरिका स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की तरफ से जारी की गई है। कुल आबादी में कितने लोग कुपोषण का शिकार हैं और पांच साल से कम उम्र के कितने बच्चे शारीरिक रूप से अविकसित अवस्था में हैं, इन्हीं दो मुद्दों पर ग्लोबल हंगर इंडेक्स तैयार किया जाता है। जिसमें भारत की स्थिति काफी चिंताजनक है।
कहां फेल हुए हम?
साल 2030 तक भारत को भूखमुक्त करने का संकल्प लिया गया है लेकिन क्या मौजूदा हालात के मद्देनजर ये संभव हो पाएगा। इन संवेदनशील मुद्दे पर खास नजर रखने वाले पुरोधा कहते हैं कि भारत इस केस में पहले से सुधार पर है, हालांकि सुधार की गति काफी धीमी है लेकिन इसके बावजूद हम सुधर रहे हैं। हमारे यहां सरकार ने अनाज को सस्ता करने की कोशिश तो की है लेकिन वो सस्ता अनाज गरीबों के पेट तक कैसे पहुंचेगा, वहां वो फेल हो गई है। अनाज भंडारण क्षमता के अभाव में बेकार होता है अनाज एक सर्वे के मुताबिक देश का लगभग 20 फीसदी अनाज भंडारण क्षमता के अभाव में बेकार हो जाता है, तो अनाज का एक बड़ा हिस्सा लोगों तक पहुंचने की बजाय कुछ सरकारी गोदामों में, तो कुछ इधर-उधर अव्यवस्थित ढंग से रखने की वजह से सड़ जाता है। ऐसे में जिनके हाथ में देश का भावी भविष्य है, उनका वर्तमान काफी कमजोर, भूखा और कुपोषित है, जिसके लिए जल्द से जल्द कदम उठाने होंगे वरना कोई शक नहीं कि स्थिति बद से बदतर हो सकती।












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