Lok Sabha Elections: क्या सिर्फ इस राज्य में बच जाएगा INDI Alliance, अखिलेश के रुख से यूपी में भी बिखराव तय?
लोकसभा चुनावों में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए 28 विपक्षी दलों ने बहुत ही उत्साहित होकर इंडी अलायंस का गठन किया था। लेकिन, इसके टूटने-बिखरने का सिलसिला थम ही नहीं रहा है।
अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' में शामिल होने के लिए जो शर्त लगा दी है, उससे लगता है कि सबसे बड़े प्रदेश में भी गठबंधन के आसार मुश्किल हैं।

सीटों के बंटवारे के बाद यात्रा में शामिल होंगे- अखिलेश
सपा नेता ने यात्रा में शामिल होने के निमंत्रण को यह कहकर ठंडे बस्ते में रखा है कि 'हमने कई दौर की बातचीत की है, कई लिस्ट का आदान-प्रदान किया है। जब सीटों का बंटवारा हो जाएगा, तब समाजवादी पार्टी उनकी न्याय यात्रा में शामिल होगी।'
जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने यूपी में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा 15 सीटों का ऑफर दिया है और यह बात मानने पर ही गठबंधन के लिए तैयार है। इंडी अलायंस की एक और सहयोगी जयंत चौधरी की आरएलडी पहले ही एनडीए का हिस्सा बनने की तैयारी कर चुके हैं।
बंगाल में भी गठबंधन को लेकर नहीं दिखी 'ममता'
इससे पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी बार-बार स्पष्ट रूप से कह चुकी हैं कि उनकी टीएमसी राज्य में अकेले चुनाव लड़ेगी। वह पहले कांग्रेस को दो सीटों पर समर्थन का ऑफर दे भी चुकी थीं, लेकिन बाद में उससे भी मना कर चुकी हैं। वहीं सीपीएम से तो वह अभी तक दूरी बनाकर चल ही रही हैं।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने वहां भी राहुल की यात्रा से दूरी बना ली थी। जबकि, लेफ्ट फ्रंट ने उसमें शामिल होकर गठबंधन धर्म निभाया था, जो कि इंडी अलायंस के बनने से पहले का है।
बिहार में जेडीयू से लग चुका है झटका
इंडी अलायंस को सबसे ज्यादा झटका जेडीयू सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया है। वह अब एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं।
उन्होंने इस गठबंधन को बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई, लेकिन उन्हें लगा कि उनके योगदान के मुताबिक भाव नहीं मिल रहा है तो वे अपनी पुरानी जगह पर शिफ्ट हो चुके हैं।
पंजाब और दिल्ली में भी खटाई में गठबंधन
इंडी अलायंस को लेकर पंजाब और दिल्ली में भी बहुत उम्मीद बंधी थी। दोनों राज्यों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अपनी आपसी अदावत को भुलाकर जिस तरह से आपस में गले लगे थे, उससे लग रहा था कि बात बन चुकी है।
लेकिन, आज की तारीख में न तो पंजाब में गठबंधन की उम्मीद दिख रही है और न ही दिल्ली में तालमेल की संभावना नजर आ रही है।
केरल का तो अलग ही है सीन
इसी तरह से केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी यूडीएफ और सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ में किसी तरह से सीटों का बंटवारा होगा, इसकी गुंजाइश नहीं है। वहां बीजेपी अभी तक खुद को मुख्य धारा में लाने के लिए ही संघर्ष कर रही है।
इन राज्यों में इंडी अलायंस से पहले से है गठबंधन
जहां तक महाराष्ट्र (एमवीए), तमिलनाडु, बिहार (महागठबंधन) और झारखंड (महागठबंधन) की बात है तो यहां इंडी गठबंधन का कोई खास मतलब नहीं है। यहां कांग्रेस के तमाम सहयोगी यूपीए वाले जमाने के हैं। सिर्फ महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) नई एंट्री है। बिहार में भी जेडीयू नई एंट्री थी, जो अब निकल ही चुका है।
यानी ऊपर के चारों राज्यों में जो गठबंधन है, वह इंडी अलायंस से पहले का है। इसलिए यहां इंडी अलायंस के बनने या न बनने से कोई फर्क नहीं पड़ा है।
इस राज्य में अभी तक बचा है इंडी अलायंस
ऐसे में कहा सकते हैं कि सिर्फ जम्मू और कश्मीर में ही इंडी अलायंस आज भी औपचारिक तौर पर वजूद में नजर आ रहा है, हालांकि नीवें वहां भी हिल चुकी हैं।
जम्मू और कश्मीर में भी कमजोर हो चुका है आधार
वहां कांग्रेस की पुरानी सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला अकेले चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं और एनडीए में लौटने से भी इनकार नहीं किया है।
लेकिन, उन्हीं के बेटे और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला को लगता है कि वहां इंडी अलायंस आज भी बचा हुआ है। हालांकि, राज्य में भी सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस-पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस में मामला उलझा ही हुआ है।
जैसे पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर की तीनों सीटों पर लड़ना चाहती हैं और कांग्रेस को जम्मू की दोनों सीटों और लद्दाख का ऑफर दे रही हैं।
लेकिन, जम्मू की दोनों सीटों पर बीजेपी के जनाधार को देखते हुए कांग्रेस अपने लिए कश्मीर में एक सीट को ज्यादा सुरक्षित मान रही है। लेकिन, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जम्मू में चुनाव लड़ने से कतरा रही हैं। इसलिए अभी यहां मामला बातचीत की ही दौर में है।












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