लाल किले से पीएम मोदी के अब तक के 9 भाषणों में कितनी राजनीति और कितनी राष्ट्र नीति?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को 10वीं बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। 2014 से वे अबतक नौ बार लाल किले से राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने यहां से अपने पहले ही स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कहा था, "यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय नीति का मंच है।"

पीएम मोदी के मुताबिक इस राष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र नीति के लिए ही होगा। हम उनके अभी तक के सभी नौ भाषणों का मोटे तौर पर एक विश्लेष करेंगे और देखेंगे कि देश के सबसे मंजे हुए राजनेता के तौर पर प्रधानमंत्री अपने संकल्प के प्रति किस हद तक अडिग रह पाए हैं।

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सभी प्रधानमंत्रियों का सम्मान, 15 अगस्त, 2014
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने पहले ही भाषण में एक सुलझे हुए राजनेता होने का बखूबी परिचय दिया था। तब उन्होंने दलगत राजनीति से काफी ऊपर उठकर कहा था कि 'आजादी के बाद हम आज अगर यहां तक ​​पहुंचे हैं, तो इसमें अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों, सभी सरकारों और यहां तक ​​कि सभी राज्यों की सरकारों का योगदान है। मैं पिछली उन सभी सरकारों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने हमारे वर्तमान भारत को इतनी ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया है......जिन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है।'

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टीम इंडिया वाली भावना की बात, 15 अगस्त, 2015
एक साल बाद उन्होंने खुद को सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया के प्रतिनिधि के रूप में पेश किया। उन्होंने राष्ट्र नीति के तौर पर स्पष्ट किया कि 'जातिवाद का जहर हो, संप्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें किसी भी रूप में जगह नहीं देनी, पनपने नहीं देना है।' उन्होंने कहा कि इन सब बुराइयों को विकास के अमृत से मिटाना है।

उन्होंने टीम इंडिया के साथ-साथ जनभागीदारी की बात की और इसे सबसे बड़ी पूंजी बताया। उन्होंने कहा कि 'अगर सवा सौ करोड़ देशवासियों की भागीदारी से हम देश को चलाएंगे तो देश हर पल सवा सौ करोड़ कदम आगे चलता चला जाएगा।' अगर राजनीति के नजरिए से देखें तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि योजनाएं तो हर सरकारें बनाती रहीं, लेकिन कसौटी इससे तय होती है कि उसे पूरा कर पाते हैं या नहीं।

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एक भारत,श्रेष्ठ भारत, 15 अगस्त, 2016
जब पीएम मोदी के कार्यकाल के करीब ढाई वर्ष गुजर गए तो उन्होंने लाल किले से 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की बात की। यह भी उनकी राष्ट्रीय नीति के विचार को प्रदर्शित करता है। उन्होंने शासन को स्वराज्य से आगे निकालकर सुराज में बदलने की बात शुरू की। उन्होंने कहा कि 'पंचायत हो या पार्लियामेंट, ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री हर किसी को लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुराज की ओर ले जाने के लिए अपनी जिम्मेदारियां निभाना होगा।'

इस दौरान उन्होंने यूपी के हाथरस के एक गांव में आजादी के 70 साल बाद बिजली पहुंच पाने की बात भी उठाई। यही नहीं, उन्होंने यह भी बात चलाई कि कभी बिजली कारखाने को कोयले की किल्लत रहती थी। उन्हें पता नहीं रहता था कि कितने दिन वह कारखाना चला पाएंगे। लेकिन, अपने सरकार के कार्यकाल में इसमें सुधार का भी जिक्र किया।

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न्यू इंडिया की बात, 15 अगस्त, 2017
2017 के भाषण में पीएम मोदी ने न्यू इंडिया की बात करके भारत की राष्ट्र नीति को दुनिया के सामने रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'एक नया संकल्‍प, एक नया इंडिया, नई ऊर्जा, नया पुरुषार्थ सामूहिक शक्ति के द्वारा हम देश में परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया में भारत का दबदबा बढ़ सकता है।

इसी के साथ कश्मीर समस्या पर उन्होंने ऐसी बात कही, जिससे विश्व में बहुत ही सकारात्मक संदेश पहुंचा। उन्होंने अलगाववादियों की हरकतों को देखते हुए कहा कि इस विषय पर उनकी सोच स्पष्ट है कि 'न गाली से समस्या सुलझने वाली है, न गोली से समस्या सुलझने वाली है, समस्या सुलझेगी हर कश्मीरी को गले लगा कर के सुलझने वाली है।'

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डिजिटल इंडिया की बात, 15 अगस्त, 2018
यह चुनावी साल से एक वर्ष पूर्व का भाषण था। उन्होंने तमिलनाडु के राष्ट्र कवि सुब्रह्मण्‍यम भारती को कोट करते हुए कहा, 'भारत पूरी दुनिया को हर तरह के बंधनों से मुक्ति पाने का रास्‍ता दिखाएगा।' प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया की बात की, बिना भेदभाव के सबके विकास की बात की। उन्होंने देश के सभी नागरिकों को अच्छा जीवन देने के लिए खुद के व्यग्र और अधीर होने की बात कही।

लेकिन, इस पर आने वाले चुनावी वर्ष का भी असर दिखा। 2013 के मुकाबले में देश में हुई प्रगति की बात की गई। इंसॉल्वेंसी, बैंकरप्सी, बेनामी संपत्ति कानूनों का मुद्दा उठाया और कहा कि यह पहले भी आ सकते थे, किसने रोका था?

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370, तीन तलाक खत्म करने की चर्चा, 15 अगस्त, 2019
2019 में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का अंदाज काफी अलग लगा। शायद यह दूसरे कार्यकाल में पहले से भी बड़े बहुमत से सत्ता में वापसी का असर था। कश्मीर से 370 और 35 ए जैसे विवादास्पद प्रावधानों का जिक्र होना स्वाभाविक था, क्योंकि यह तभी हुआ ही था। तीन तलाक को गैर-कानूनी बनाकर मुस्लिम महिलाओं को सशक्त करने का भी जिक्र हुआ। चुनावों में वोटरों ने किस तरह से सरकार के पक्ष में मतदान किया, वह भी चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, 'अनुच्छेद 370, 35ए क्या कारण था..... इस सरकार की पहचान है ...... हम समस्याओं को टालते भी नहीं हैं और न ही हम समस्याओं को पालते हैं..... जो काम पिछले 70 साल में नहीं हुआ, नई सरकार बनने के बाद 70 दिन के भीतर-भीतर ......राज्यसभा और लोकसभा ने दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया।'

इसी तरह वे बोले, 'किसी न किसी कारण से हमारी इन मुस्लिम माताओं-बहनों को हक देने में हम हिचकिचाते थे.......... अगर इस देश में, हम सती प्रथा को खत्म कर सकते है..... भ्रूण हत्या को खत्म करने के हम कानून बना सकते हैं, बाल-विवाह के खिलाफ अगर हम आवाज उठा सकते हैं, दहेज में लेन-देन की प्रथा के खिलाफ हम कठोर कदम उठा सकते हैं, तो क्यों न हम तीन तलाक के खिलाफ भी आवाज उठाएं....'

उनके मुताबिक कश्मीर में इन व्यवस्थाओं की वजह से 70 वर्षों में अलगाववाद, आतंकवाद, परिवारवाद को बल मिला और भ्रष्टाचार, भेदभाव की नींव मजबूत हुई थी। पीएम बोले, ' जो लोग 370 के पक्ष में वकालत करते हैं, उनको देश पूछ रहा है...... अगर ये अनुच्‍छेद 370, यह 35ए इतना महत्‍वपूर्ण था,......इतना अनिवार्य था,..... उसी से भाग्य बदलने वाला था, तो 70 साल तक इतनी भारी बहुमत होने के बाद भी आप लोगों ने उसको परमानेंट क्‍यों नहीं किया? टेंप्रररी क्‍यों बनाए रखा?'

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आत्‍मनिर्भर भारत का संकल्प, 15 अगस्त, 2020
लेकिन, 2020 में कोरोना की वजह से वैश्विक परिदृश्य ही बदल चुका था। पीएम मोदी उसी राष्ट्र नीति की ओर बढ़ते दिखे, जो समय की मांग थी। उन्होंनो कोरोना वॉरियर्स की जमकर सराहना की, उन्हें नमन किया। लेकिन, साथ ही साथ उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का भी संकल्प भी सामने रख दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'कोरोना वैश्विक महामारी के बीच 130 करोड़ भारतीयों ने संकल्‍प लिया- संकल्‍प आत्‍मनिर्भर बनने का... और आत्‍मनिर्भर भारत आज हर हिंदुस्‍तानी के मन-मस्तिष्‍क पर छाया हुआ है।' इसके साथ ही उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' की बात कहकर भी अपनी राष्ट्र नीति वाली भावना को देशवासियों के सामने नए स्वरूप में रखने की कोशिश की।

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'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और सबका प्रयास', 15 अगस्त, 2021
इस बार एक दिन पहले मोदी सरकार ने 14 अगस्त को विभाजन के दर्द को याद रखने के लिए 'विभाजन विभिषिका स्‍मृति दिवस' मनाने का फैसला किया था। मोदी-विरोधियों ने इस फैसले की आलोचना भी की थी।

इसी साल पीएम मोदी ने सबका साथ, सबके विकास वाले अपने नारे को और विस्तार देकर फिर से राष्ट्र नीति वाली भावना को मजबूती के साथ देश और दुनिया के सामने रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'बदलते हुए युग के अनुकूल हमें भी अपने आपको ढालना होगा...... सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास, इसी श्रद्धा के साथ हम सब जुट चुके हैं....... लेकिन, आज लाल किले की प्राचीर से आह्वान कर रहा हूं। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और अब सबका प्रयास' हमारे हर लक्ष्‍यों की प्राप्‍ति के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है।'

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'आकांक्षी समाज' और अमृतकाल की बात, 15 अगस्त, 2022
पिछले साल प्रधानमंत्री ने देश लोगों से 'आकांक्षी समाज' की बात की। उन्होंने देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और इस मौके पर पंच प्रण की चर्चा की, जो कि आने वाले 25 वर्षों में नागरिकों की भावना होनी चाहिए।

इस दौरान उन्होंने महिलाों के साथ आमतौर पर होने वाली अपमान की घटनाओं को लेकर अपनी निजी पीड़ा भी देश के सामने रखने की कोशिश की। वे बोले कि यह लाल किले से बोलने का विषय नहीं है, लेकिन वह देशवासियों से नहीं कहेंगे तो किससे कहेंगे। उन्होंने कहा, 'किसी न किसी कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आयी है..... हमारी बोलचाल में...... हमारे व्यवहार में, हमारे कुछ शब्दों में.... हम नारी का अपमान करते हैं....... क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं..... नारी का गौरव राष्ट्र के सपने पूरे करने में बहुत बड़ी पूंजी बनने वाला है। यह सामर्थ्य मैं देख रहा हूं और इसलिए मैं इस बात का आग्रही हूं.......।'

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