Income Tax Survey: क्या सर्वे के दौरान जब्त हो सकते हैं आपके फोन-लैपटॉप, डेटा क्लोनिंग पर क्या हैं नियम?
इनकम टैक्स सर्वे के दौरान विभाग के अधिकारी क्या कार्रवाई कर सकते हैं? क्या उन्हें कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल जैसे उपकरणों को जब्त कर सकते हैं। जानिए कार्रवाई के प्रभाव

Income Tax Survey के दौरान आयकर विभाग के अधिकारी क्या एक्शन ले सकते हैं? क्या अधिकारियों को टैक्स सर्वे के दौरान फोन जब्त करने या डेटा क्लोनिंग के अधिकार होते हैं? ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब जानना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान बीबीसी के दफ्तरों पर आयकर विभाग के सर्वे के दौरान दस्तावेजों की प्रतियां जब्त करने की खबरें सामने आईं। ऐसे में जानिए आयकर विभाग के अधिकारियों के पास आईटी सर्वे के दौरान क्या अधिकार होते हैं।
दरअसल, दिल्ली और मुंबई में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी के परिसरों में आयकर विभाग का सर्वे तीसरे दिन भी जारी रहा। सूत्रों ने कहा कि कर अधिकारी बीबीसी के वित्तीय दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड, स्टॉक के कागजात, व्यापार और समझौतों को खंगाल रहे हैं। ऐसे में कई सवाल उभरे कि अधिकारियों को कार्रवाई के दौरान क्या अधिकार मिले हुए हैं।
आयकर सर्वे के दौरान विभागीय अधिकारियों के अधिकार पर इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के दौरान, अधिकारियों को नकद या डिजिटल दस्तावेजों सहित किसी भी दस्तावेज या सामान को जब्त करने की अनुमति नहीं होती है।
एक सर्वे के दौरान, अधिकारियों को नकद या डिजिटल दस्तावेजों सहित किसी भी दस्तावेज या सामान को जब्त करने की अनुमति नहीं है। जब्त न करने की स्थिति में क्या आयकर विभाग डेटा वाले मोबाइल फोन या हार्ड-डिस्क का क्लोन बना सकता है? इस पर इंडिया टुडे ने बताया कि आयकर अधिकारियों को आवश्यक मूल दस्तावेजों की प्रतियां बनाने और उन्हें जांच के उद्देश्य से ले जाने की अनुमति होती है।
टैक्स अधिकारियों को सर्वे के दौरान डिजिटल उपकरणों की हार्ड डिस्क को क्लोन करने का अधिकार होता है। अधिकारी डेटा के 'अध्ययन के उद्देश्य से' वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय विभागों के अधिकारियों के फोन भी क्लोन कर सकते हैं।
अतीत में, जब IT विभाग ने वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन ऑक्सफैम के दफ्तर में सर्वे किया, तो ऑक्सफैम क अनुसार ने कर अधिकारियों ने ऑक्सफैम इंडिया सर्वर और वरिष्ठ नेतृत्व टीम और फाइनांस डिपार्टमेंट को लीड करने वाले अधिकारियों के निजी मोबाइल फोन की क्लोनिंग करके सारा डेटा भी ले लिया।
इसी तरह के एक अन्य मामले में, जब कर विभाग ने दिल्ली में समाचार संगठनों पर एक सर्वे किया, तो अधिकारियों ने फोन और हार्ड डिस्क से डेटा क्लोन किया।
बता दें कि पिछले महीने गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी (अब प्रधानमंत्री) पर 2002 की घटना पर बनी दो भाग वाली डॉक्यूमेंट्री के रिलीज होने के बाद से ही बीबीसी भारत में विवादों में घिर गया है। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान क्या हुआ था सीरीज में इस बारे में दिखाया गया है। भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को खारिज कर इसे "प्रोपगैंडा का टुकड़ा" करार दिया। सरकार ने कहा, इसमें निष्पक्षता की कमी है और एक औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है। केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर और यूट्यूब को डॉक्यूमेंट्री के लिंक को ब्लॉक करने का निर्देश भी दिया।
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