मध्यप्रदेश का एक ऐसा गांव जहां चोरी के लिये किराए पर दिए जाते हैं बच्चे

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 300 किलोमीटर दूप पचोर इलाके में चोरी के लिए अपने बच्चों को किराए पर देने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।

नई दिल्ली। दिल्ली के 'बैंड, बाजा,बारात' गैंग के चोरी के कारनामे तो आपने बहुत सुने होंगे लेकिन क्या आपको पता है इस गैंग में अहम किरदार निभाने वाले बच्चे कहां से आते है? नहीं पता तो हम आपको बता देते हैं। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले का पचोर इलाका चोरी के लिए बच्चे किराए पर देने के लिए मशहूर हो गया है। यहां माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों को किराए पर देते है और उसके बदले पैसे लेते हैं। इसके लिए बच्चों के माता पिता और चोरी काम कर रहे गैंग के बीच एग्रीमेंट होता है। चोरों का गिरोह एक बच्चे के माता-पिता को एक साल के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक देता है।

यहां बच्चों को चोरी करने के लिए किराए पर दिया जाता है

यहां बच्चों को चोरी करने के लिए किराए पर दिया जाता है

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 300 किलोमीटर दूप पचोर इलाके में चोरी के लिए अपने बच्चों को किराए पर देने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। यहां ग्रामीण अपने बच्चों को एग्रीमेंट कर 'बैंड,बाजा,बारात' गैंग को चोरी के लिए देते है और उसके बदले पैसे लेते है।नाबालिगों की ऊंचे दामों में खरीदारी के बाद उन्हें गैंग द्वारा चोरी की बारीकियों की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। इनमें शादी में जाते समय क्या पहनना है, कैसा व्यवहार करना है, कैसे जल्दी घुलना मिलना की ट्रेनिंग शामिल हैं। इतना ही नहीं, शादी स्थल पर टारगेट तलाशना और फिर टारगेट से कैसे कैश और कीमती सामान लेकर रफूचक्कर होना भी ट्रेनिग का हिस्सा है। एक बार ट्रेनिग खत्म होने के बाद गैंग शादी के समय दिल्ली-एनसीआर में आता है और पहले 2-3 महीने किराए के मकान में रहता है और फिर मौका मिलते ही शादियों में चोरी की घटना को अंजाम देता है।

गांव तक पहुंच चुकी हैं अलग-अलग राज्यों की 86 पुलिस टीमें

गांव तक पहुंच चुकी हैं अलग-अलग राज्यों की 86 पुलिस टीमें

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अलग-अलग राज्यों की 86 पुलिस टीमें चोरी के मामले की तहकीकात के सिलसिले में पचोर जा चुकी है और चोरी के तार पचोर से जुड़े होने की जांच कर चुकी हैं। अप्रैल में दिल्ली पुलिस ने शादियों में चोरी के 34 ऐसे मामले चिन्हित जिनके तार पचोर से जुड़े थे, तीन जुलाई को भी साउथवेस्ट दिल्ली में एक मामला सामने आया था जिसमे एन नाबालिग ने करीब 8 लाख कैश उड़ा लिए थे उसका भी कनेक्शन पचोर से ही था। जांच में पता चला है कि पिछले तीन महीने में 11 बच्चे पचोर से चोरी की ट्रेनिंग के लिए भेजे गए हैं।

मध्यप्रदेश पुलिस ने किया चौकाने वाला खुलासा

मध्यप्रदेश पुलिस ने किया चौकाने वाला खुलासा

मध्यप्रदेश पुलिस ने पचोर के लोगों के बारे में चौकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक यहां गांव के लोग बच्चों को अनाथालय से अडॉप्ट करते है और फिर बड़े होने पर बच्चों को चोर गिरोह के साथ काम करने के लिए भेज देते हैं। बच्चों को गोद लेते समय फर्जी कागजातों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं ये भी खुलासा हुआ है कि यहां के लोगों के पास कई पहचान पत्र और आधार कार्ड है जिससे पुलिस को चकमा देने में कामयाब हो जाते है। वहीं इस पूरे खेल में गांव का सरपंच भी इनका साथ देता है।

चोरी गैंग से जुड़े ज्यादातर लोग सांसी समुदाय से आते हैं

चोरी गैंग से जुड़े ज्यादातर लोग सांसी समुदाय से आते हैं

पचोर इलाके में चोरी गैंग से जुड़े ज्यादातर लोग सांसी समुदाय से आते हैं। सांसी समुदाय से आने वाले जितेंद्र सिसोदिया ने बताया कि पुलिस उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार करती है, कुछ लोगों के गलत होने से पूरे समुदाय को गलत नहीं ठहराया जा सकता। वहीं सांसी समुदाय के लोग चोरी के इस धंधे को गलत नहीं मानते हैं उनके मुताबिक ये एक जॉब है। पचोर के लोग अपने बच्चों को किराए पर देने को भी गलत नहीं मानते है। पचोर इलाके में मध्यप्रदेश पुलिस ने कई बार छापा मारा है लेकिन उनके हाथ कोई आरोपी नहीं लगता है। इस पूरे खेल में सरपंच से लेकर ग्रामीण तक सब शामिल हैं।

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