कोरोना के बीच पृथ्वी के पास से गुजरेगा विशाल उल्का पिंड, खतरे को लेकर वैज्ञानिकों ने दी बड़ी जानकारी
कोरोना वायरस की महामारी के बीच पृथ्वी के नजदीक से एक विशाल उल्का पिंड गुजरेगा, वैज्ञानिकों ने इसे लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी दी है...
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस का कहर फिलहाल थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़कर 24506 तक पहुंच गई है। इनमें 1429 मरीज पिछले महज 24 घंटों के भीतर सामने आए हैं। कोरोना वायरस देश में अभी तक 775 लोगों की जान भी ले चुका है। इस बीच एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल आकार में काफी बड़ा एक उल्का पिंड जल्द ही पृथ्वी के नजदीक से गुजरने जा रहा है। पहले से जारी कोरोना वायरस के संकट में इस खबर ने चिंताएं बढ़ा गई हैं।

क्या पृथ्वी पर पड़ेगा कोई असर?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, आकार में करीब 1.2 मील चौड़े इस उल्का पिंड का नाम 1998 OR2 है, जो बुधवार को सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर पृथ्वी से करीब 4 मिलियन मील की दूरी से गुजरेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस उल्कापिंड से फिलहाल पृथ्वी को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है, लेकिन फिर भी इसे एक 'संभावित खतरनाक' उल्का पिंड के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

काफी चौंकाने वाली है उल्का पिंड की तस्वीर
आरेसिबो ऑब्जर्वेटरी (बेधशाला) ने इस उल्का पिंड की एक तस्वीर जारी की है, जो अपने आप में काफी चौंकाने वाली है। आरेसिबो ऑब्जर्वेटरी की तरफ से जारी की गई तस्वीर को देखकर पहली नजर में लगता है कि जैसे इस उल्का पिंड ने एक मास्क पहना हुआ है और पृथ्वी के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहा है।

उल्का पिंड के ऊपर पहाड़ियों की तरह आकृति
आरेसिबो ऑब्जर्वेटरी में ग्रह संबंधी राडार की प्रमुख ऐनी विर्की ने एक बयान जारी करते हुए कहा, 'इस उल्का पिंड के ऊपर कुछ छोटी-छोटी टोपीनुमा आकृतियां हैं, जो पहाड़ियों की तरह नजर आ रही हैं और जो वैज्ञानिकों को अपनी तरफ काफी आकर्षित करने वाली हैं। लेकिन, इन दिनों हम कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहे हैं, इसलिए पहनी नजर में इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे इस उल्का पिंड ने मास्क पहना हुआ है।
पृथ्वी पर कोई असर नहीं पड़ेगा
ऐनी विर्की का कहना है कि इसे एक 'संभावित खतरनाक' उल्का पिंड के रूप में वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि इसका व्यास 500 फीट से भी ज्यादा है और यह पृथ्वी से करीब 4,650,000 मील की दूरी पर है। ऐनी विर्की ने बताया, 'हालांकि इस उल्का पिंड का पृथ्वी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिर भी, ऐसे किसी खतरे के प्रभाव और उससे निपटने की तकनीकों को विकसित करने के लिए इस प्रकार के उल्का पिंडों की विशेषताओं को समझना जरूरी और अहम है।'

2079 में 3.5 गुना ज्यादा नजदीक से गुजरेगा उल्का पिंड
वहीं, नासा के मुताबिक 1998 में खोजा गया 1.2 मील चौड़ा ये उल्का पिंड अपनी खोज के बाद से करीब 20 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहा है। हालांकि, आने वाले हफ्तों में यह पृथ्वी के आस-पास कही नहीं आ सकता। ऑब्जर्वेटरी की रिसर्चर फ्लेवियन वेंडीटी ने एक बयान जारी करते हुए बताया, 'इस साल की अपेक्षा वर्ष 2079 में यह उल्का पिंड पृथ्वी से करीब 3.5 गुना ज्यादा नजदीक से गुजरेगा।












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