कर्नाटक: 13 साल के बच्चे में दिखा पोस्ट कोविड का घातक असर, डॉक्टरों ने दिमाग निष्क्रिय का किया दावा
बेंगलुरु, जून 27। देश में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की दस्तक के बीच कर्नाटक से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, कर्नाटक के देवांगेरे जिले में एक 13 साल का बच्चा कोरोना से संक्रमित हुआ। संक्रमित होने के बाद वो रिकवर भी हो गया, लेकिन कोरोना वायरस ने उस बच्चे के दिमाग को निष्क्रिय कर दिया। आपको बता दें कि देश में पोस्ट कोविड के तौर पर लोगों के अंदर कई तरह की समस्याएं देखी गई हैं। पोस्ट कोविड के तौर पर शरीर में कमजोरी और हर समय थकावट रहना आम बात है, लेकिन ये मामला मेडिकल साइंस के लिए एक नई चुनौती है।

8 दिन से अस्पताल में भर्ती है बच्चा
डॉक्टरों का कहना है कि कर्नाटक के अंदर ऐसा ये पहला मामला है देश के अंदर दूसरा केस है। डॉक्टरों ने बताया है कि 13 साल के बच्चे को एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एनसैफैलोपैथी ऑफ चाइल्डहुड (ANEC) हुआ है और वह पिछले 8 दिन से अस्पताल में भर्ती है। बच्चा कई दिनों से वेंटिलेटर पर है। हालांकि अब बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है।
3 दिन तक वेंटिलेटर पर रहा बच्चा
बच्चे के बार में जानकारी देते हुए एसएस इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर एनके कलापनावर ने कहा, 'बच्चे के दिमाग की जांच की गई तो वह निष्क्रिय पाया गया। इसके बाद उसे तीन दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार के बाद वेंटिलेटर हटाया गया। हालांकि, वह अब भी अस्पताल में है।'
काफी महंगा है इस बीमारी का इलाज
कलापनावर ने बताया कि अभी एक और हफ्ते तक बच्चे का इलाज किया जाना है। इसके साथ ही, इस बीमारी ने उसके मस्तिष्क पर कितना प्रभाव डाला है, इसके बारे में भी बच्चे के ठीक होने के बाद पता लगाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण उत्पन्न इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है। कलापनावर के मुताबिक, प्रत्येक 30 किलो वजनी बच्चे के लिए इस बीमारी के इंजेक्शन की कीमत 75,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक है।












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