कोरोना काल: मृत्यु दर के हिसाब से साल का सबसे खराब महीना रहा मई, करीब सवा लाख मरीजों की गई जान

नई दिल्ली, मई 30। कोरोना की दूसरी लहर का असर देश में अब होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से अगर कोरोना के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो रोजाना आने वाले मामलों, टेस्टिंग पॉजिटिविटि अनुपात और संक्रमण के प्रसार में लगातार गिरावट देखी जा रही है, लेकिन फिर भी स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए जो चिंता का विषय है, वो कोरोना से होने वाली मौतें हैं, जिसमें बहुत ही मामूली गिरावट दर्ज हो रही है। देश के अंदर कोरोना मृत्यु दर में निरंतर वृद्धि हो रही है। हालांकि अन्य देशों की तुलना में भारत के अंदर स्थिति फिर भी काफी बेहतर है, लेकिन मई की दूसरी छमाही में इस आंकड़े में तेजी देखी गई है।

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बढ़ती मृत्यु दर है स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए चिंता का विषय

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, मई के पहले 15 दिनों के अंदर देश में मृत्यु दर 1.06 प्रतिशत थी और 58431 मरीजों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगले 14 दिनों (16-29 मई) के अंदर देश में ये मृत्यु दर बढ़कर 1.73 प्रतिशत हो गई और इन 14 दिनों में 55688 मरीजों की मौत हो गई। इस हिसाब से 1 मई से लेकर 29 मई तक देश में करीब सवा लाख मरीजों की कोरोना के कारण मौत हो गई। इसमें हैरानी वाली बात ये है कि अगले 14 दिनों में पहले 15 दिनों के मुकाबले कोरोना के मामलों में 42 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है।

आपको बता दें कि मई के महीने में इस साल की कोरोना मृत्यु दर सबसे अधिक देखी गई है। जनवरी में मृत्यु दर 1.15 प्रतिशत थी, जबकि मार्च में ये आंकड़ा 0.52 प्रतिशत था, लेकिन अप्रैल से इसमें फिर तेजी देखने को मिली। भारत में कोरोना की कुल मृत्यु दर अभी 1.17 प्रतिशत है।

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