PoK पर इमरान खान का अब तक का सबसे बड़ा बयान, 'पाकिस्तान में रहेगा या नहीं........'

नई दिल्ली- पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी ने पाकिस्तानी कब्जे वाली कश्मीर को लेकर बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक यूरोपीय ब्रॉडकास्टर को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि उनका देश पीओके में जनमत संग्रह कराने के लिए तैयार है। उन्होंने ये भी दावा किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को भी पीओके की यात्रा करने देने के लिए तैयार हैं। इमरान का कहना है कि पाकिस्तानी कब्जे वाली कश्मीर के लोग पाकिस्तान के साथ रहना चाहते हैं या नहीं, वह खुद ही फैसला कर सकते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में सेना प्रमुख ने भी कहा था कि अगर आदेश मिले तो भारतीय सेना पीओके पर कार्रवाई को तैयार है। भारत सरकार के स्तर पर भी पीओके को लेकर हाल में कई बड़े बयान आ चुके हैं और इमरान के ताजा बयान को उन्हें संदर्भों में देखा जा सकता है।

'पीओके को आजाद करने के लिए पाकिस्तान तैयार'

'पीओके को आजाद करने के लिए पाकिस्तान तैयार'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी ने एक जर्मन सरकारी ब्रॉडकास्टर Deutsche Welle के साथ इंटरव्यू में बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर (पीओके) में जनमत संग्रह करवाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'लोगों को फैसला करने दें कि वे पाकिस्तान के साथ रहना चाहते हैं या आजाद होना चाहते हैं।' इमरान ने ये भी दावा किया है कि पीओके में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाए जाते हैं और वहां के लोग अपनी सरकारें खुद चुनते हैं। नियाजी ने ये भी दावा किया है कि वह पीओके का दौरा करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को पूरी दुनिया से बुलाने के लिए राजी हैं।

इमरान की दावों की पोल खोलता है पीओके का संविधान

इमरान की दावों की पोल खोलता है पीओके का संविधान

पाकिस्तानी पीएम जो भी दावा करें, लेकिन सच्चाई ये है कि 1974 में बने पीओके के संविधान के मुताबिक जो भी स्थानीय चुनाव लड़ना चहता है उसके लिए कश्मीर का पाकिस्तान के साथ रहने का समर्थन करना जरूरी है। यही नहीं चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वालों को 'पाकिस्तान के साथ वफादारी की प्रतिज्ञा पत्र' पर हस्ताक्षर भी करना होता है। पीओके के लोगों के लिए यह भी आम बात है कि जो भी आजादी की मांग करते हैं, उन्हें पाकिस्तानी सेना और सरकार की प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। करीब चार साल पहले 2016 में चुनावों में धांधली को लेकर पीओके में एक भारी विरोध भी देखने को मिला था। तब हजारों लोग पाकिस्तान और वहां की सेना की उत्पीड़न से आजादी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए थे।

पीओके में इमरान की हो चुकी है भारी फजीहत

पीओके में इमरान की हो चुकी है भारी फजीहत

ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, जब पिछले साल जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाए जाने के खिलाफ पाकिस्तानी कब्जे वाली कश्मीर के लोगों को गुमराह करने के लिए इमरान पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचे थे तो उन्हें वहां 'गो नियाजी गो' और 'कश्मीर बनेगा हिंदुस्तान' जैसे नारे गूंजने की वजह से भारी फजीहत झेलनी पड़ गई थी। इमरान वहां जम्मू-कश्मीर को लेकर एकजुटता दिखाने की कोशिश के लिए पहुंचे थे, लेकिन उनकी रैली को स्थानीय लोगों ने समर्थन नहीं दिया था।

भारत का रुख देकर इमरान ने दिया बयान?

भारत का रुख देकर इमरान ने दिया बयान?

दरअसल, इमरान का ये बयान उस वक्त आया है जब हाल ही में सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा है कि अगर भारतीय सेना को आदेश मिलता है तो वह पाकिस्तानी कब्जे वाली कश्मीर को वापस पाने के लिए जरूरी कार्रवाई करेगी। नव नियुक्त सेना प्रमुख ने ये बयान इस आधार पर दिया था कि संसद पहले ही पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत का हिस्सा घोषित कर चुकी है। पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि अब भारत-पाकिस्तान के बीच कोई बातचीत होगी तो वह पीओके पर आधारित होगी। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी पीओके पर गैरकानूनी कब्जा रखने के लिए पाकिस्तान की खिंचाई कर कह चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्र का अगला एजेंडा पीओके को भारत का हिस्सा बनाना है। पाकिस्तान के विरोधी दल के नेता भी इस तरह की बातें कर रहे हैं कि अब पीओके पर कब्जा बरकरार रखना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं है।

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