कोविड के बाद बच्चों के टीकाकरण में आई गिरावट: लैंसेट स्टडी
जिस तरह से कोरोना महामारी ने दुनियाभर में अपना आतंक फैलाया और लाखों लोगों की जान ले ली, उसकी वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका काफी बुरा असर हुआ है। लैंसेट के अध्ययन के अनुसार कोरोना के चलते देश में बच्चों के टीकाकरण अभियान में इसका असर दिखने को मिला। स्टडी के अनुसार कोरोना काल के बाद चलते बच्चों के सामान्य टीकाकरण अभियान में गिरावट देखने को मिली है। बड़ी संख्या में बच्चों को जरूरी टीके नहीं लग सके।

नेशनल फैमिली हेल्ट सर्वे के 2019-2021 के आंकड़ों का अध्ययन करके द इफेक्ट ऑफ कोविड को लेकर अध्ययन किया गया है। इस स्टडी को 21 अक्टूबर को ऑनलाइन प्रकाशित किया गया है। जिसमे कहा गया है कि यह पहला व्यवस्थित आंकड़ा है जिसे देशभर के कोरोना प्रभावित घरों से इकट्ठा किया गया है। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की व्यवस्था को तहस नहस कर दिया। हमने अप्रैल 2021 तक के भारत में बच्चों के नियमित टीकाकरण और उसके प्रभाव का अनुमान लगाया है।
स्टडी में पाया गया है कि कोरोना काल में प्रभावित बच्चों को कोरोना काल के प्रभाव से दूर रहे बच्चों की तुलना में टीकाकरण कम हुआ है। बेसिल कैलमेट गेरिन (BCG), हेपेटाइटिस बी 2 फीसदी कम हुआ, डिफ्थेरिया, टिटनस टॉक्साइड और डीपीटी-3 टीकाकरण 9 फीसदी हुआ, जबकि पोलियो टीकाकरण 10 फीसदी कम हुआ। हालांकि मीजल्स कंटेनिंग वैक्सीन फर्स्ट डोज (MCV1) में कोई खास गिरावट देखने को नहीं मिली है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि 2019-2021 के बीच देश के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के तहत अलग-अलग वर्ग के टीकाकरण के सर्वे के आंकड़े को इकट्ठा किया गया। इसी आंकड़े के आधार पर यह अध्ययन किया गया है। बच्चों को कोरना काल के चलते उनकी तय उम्र सीमा से अधिक समय पर वैक्सीन दी गई। पोलियो और डीपीटी वैक्सीन की डोज में 3.5 फीसदी बच्चों में देरी हुई है। ग्रामीण इलाकों में इसका असर सबसे अधिक देखने को मिला है।












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