आईएल एंड एफएस संकट से कैसे मुश्किल में पड़ सकता है आम आदमी

नई दिल्ली। गुरुवार को शेयर बाजार 800 अंकों से ज्यादा टूटा और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 73.81 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई। शेयर बाजार और रुपये की कीमत में गिरावट पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है। इससे पहले 21 सितंबर को शेयर बाजार में एक घंटे के अंदर ही 1500 अंको की गिरावट आई थी हालांकि बाजार बाद में संभला था। बाजार के इस रवैये के पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज यानी (आईएल एंड एफएस) का संकट भी देश में गिरते बाजार का कारण माना जा रहा है। इस कंपनी में एलआईसी की सबसे ज्यादा 25.34 फीसदी की हिस्सेदारी है। कहा जा रहा है कि अगर आईएल एंड एफएस डूबी तो देश में हाहाकार मच जाएगा। इसे भारत का लेहमैन संकट कहा जा रहा है।

IL &FS

क्या है है आईएल एंड एफएस
इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) 30 साल पुरानी कंपनी है और देश में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कर्ज देती है। सितंबर के अंत तक ये अपने ऋण दायित्वों का 3,800 करोड़ रुपये नहीं चुका पाई थी। कंपनी में सरकारी कंपनियों कीक हिस्सेदारी 40% से अधिक है जिसका मतलब है कि देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आईएल एंड एफएस का ठीक रहना महत्वपूर्ण है। आईएल एंड एफएस की परिसंपत्तियां 15.77 बिलियन डॉलर हैं लेकिन फिर भी इस पर भारी कर्ज है। सरकार का कहना है कि पहले के खराब वित्तीय प्रबंधन के चलते ऐसा हुआ है।

कितना है कर्ज

कितना है कर्ज

आईएल एंड एफएस और इसकी सहायक कंपनियों पर इस वक्त लगभग 12 बिलियन डॉलर यानी कुल 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस मामले की तुलना अब 2009 के सत्यम घोटाले से की जा रही है। सरकार ने कहा है कि कंपनी के प्रबंधन ने पूरी तरह से अपनी विश्वसनीयती खो दी। इसलिए सरकार ने इस हफ्ते छह चयनित उम्मीदवारों के साथ आईएल एंड एफएस बोर्ड को बदल दिया है और कहा है कि ये नया बोर्ड सुनिश्चित करेगा कि आईएल एंड एफएस में पूंजी की तरलता बनी रहे और आगे कोई चूक ना हो और आधारभूत परियोजनाओं को आसानी से पूरा किया जा सके। सरकार ने आईएल एंड एफएस में किसी तरह की धोखाधड़ी की जांच का भी आदेश दिया है।
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आम आदमी के लिए क्यों खतरा

आम आदमी के लिए क्यों खतरा

कंपनी को इस वक्त ऋण चुकाने के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये की तुरंत जरूरत है। ये पैसा एलआईसी और एसबीआई से आने की बात कही जा रही है जिनकी आईएल एंड एफएस में 30% से अधिक की इक्विटी है। कंपनी की इस हालत से निवेशकों के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है। सवाल ये उठ रहा है कि कब तक बड़ी कंपनियों को बचाने के लिए एलआईसी और एसबीआई को बुलाया जाएगा। इन दोनों में छोटे निवेशकों का पैसा जमा रहता है और ये पैसा अगर स्टॉक मार्केट और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया है और आईएल एंड एफएस जैसे संकट से शेयर बाजार को नुकसान होता है तो पैसा लोगों का डूबेगा। अकेले सितंबर में ही बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य निधि में जमा लाखों छोटे कर्मचारियों का पैसा आईएल एंड एफएस के संकट के चलते खतरे में हैं इसके अलाव निश्चित आय वाले फंड भी खतरे में हैं।

क्या होगा संकट का असर

क्या होगा संकट का असर

आईएल एंड एफएस ने देश की बड़ी निर्माण परियोजनाओं को पूरा करने में योगदान दिया है। जिसमें दिल्ली-नोएडा टोल ब्रिज, आईएल एंड एफएस तमिलनाडु पावर कंपनी, जम्मू और श्रीनगर के बीच हर मौसम में खुली रहने वाली पटनीटॉप सुरंग प्रमुख है। कंपनी सर्दियों में भी श्रीनगर-कारगिल सड़क को खोले रखने के लिए 11,000 फीट की ऊंचाई पर ज़ोजी-ला में महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण सुरंग का निर्माण कर रही है। यही कारण है कि अगर कंपनी का संकट बढ़ता है तो सरकार के पास आधारभूत संरचना के क्षेत्र में काम करने के लिए पैसा उपलब्ध नहीं होगा और उसकी कई परियोजनाएं अधर में लटक जाएंगी। साथ ही बढ़ती तेल की कीमते, कमजोर रुपया और ज्यादा ब्याज दरें अर्थव्यवस्था की अच्छी तस्वीर पेश नहीं कर रही हैं।

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