COVIRAP: IIT खड़गपुर की डिवाइस 45 मिनट में करेगी कोविड टेस्ट, मोबाइल से होगी कनेक्ट
कोलकाता, अप्रैल 25। आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी मशीन बनाई है जिसकी मदद से आप स्वयं कोविड-19 संक्रमण का पता मात्र 45 मिनट में लगा सकते हैं। बीते बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने इस मशीन को व्यावसायिक रूप से लॉन्च किया है। कोविरैप नाम की इस मशीन को आईसीएमआर ने पिछले साल अक्टूबर में कोविड-19 का पता लगाने में इसके असर के लिए मान्य किया था।

आईआईटी खड़गपुर ने बनाई है डिवाइस
आईआईटी खड़गपुर ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान इस डिवाइस को लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग के दौरान इस डिवाइस का देश और दुनिया में व्यवसायीकरण के लिए आईआईटी के साथ साझेदारी करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।
कोविरैप का कमर्शियल वर्जन एक हाथ में पकड़ी जाने वाली छोटी सी डिवाइस है जिसमें नाक से या गले से स्वैब लिया जा सकता है। इसके बाद इसे लोड करना होगा और फिर डिवाइस अपना काम खुद शुरू करेगी। इसके बाद आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है। इसे आपके स्मार्टफोन से एक फ्री मोबाइल एप्लिकेशन की सहायता से भी जोड़ा जा सकता है जो केवल 45 मिनट के अंदर टेस्ट रिजल्ट तैयार करने में सक्षम है।

चार सैंपल चल सकते हैं एक साथ
डिवाइस स्वैब-टू-रिजल्ट सॉल्यूशन है और वर्तमान में इसका वजन 300 ग्राम तक है। इसलिए चार रोगियों के सैंपल एक साथ चल सकते हैं। इसकी दो इकाइयाँ हैं - एक थर्मल यूनिट और एक डिटेक्शन यूनिट। डिवाइस रोगजनक संक्रमणों के तेजी से निदान के लिए एक सामान्य कदम-वार इज़ोटेर्मल न्यूक्लिक एसिड-आधारित परीक्षण तकनीक की सुविधा देता है।
आईआईटी खड़गपुर के स्पॉन्सर रिसर्च और औद्योगिक परामर्श विभाग के डीन, प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने बताया कि शोधकर्ताओं की टीम ने पिछले साल अप्रैल में कोविरैप के प्रोटोटाइप के साथ शुरुआत की थी। जून-जुलाई के आसपास हम पहले प्रोटोटाइप के साथ आए थे और लैब ट्रायल में उम्मीद के अनुरूप परिणाम आए थे। इसके बाद यह आईसीएमआर के कठोर सत्यापन के अधीन था। आमतौर पर ऐसे शोध के परिणाम प्रकाशनों के माध्यम से प्रचारित हो जाते हैं। लेकिन हम इस पर ही नहीं रुकना चाहते थे। हम एक ऐसे मंच पर आना चाहते थे जहां यह एक वाणिज्यिक इकाई बन जाए और फिर धीरे-धीरे अपनी कम लागत और आसान उपयोग के चलते यह घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तु बन जाए। उन्होंने कहा हम पहले ही व्यावसायीकरण के लिए विभिन्न प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है।

200 सैंपल की तुलना की गई
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर वीके तिवारी ने शोधकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बहुत परीक्षण के बाद और आईसीएमआर की सलाह पर कोविरैप को प्रमाणन दिया गया। "लगभग 200 नमूनों की तुलना की गई और उसी के आधार पर उन्होंने इसके असर का पता लगाया। इसके बाद आईआईटी के शोधकर्ताओं ने वाणिज्यिक मॉडल को लेकर काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि जिन दो कंपनियों ने व्यावसायिक रूप से बेचने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए उन्हें जरूरत पड़ने पर संशोधित किया जा सकता है।












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