दुर्लभ और तस्करी किए गए जीवों की कीमतों को क्यों नहीं करना चाहिए सार्वजनिक ? IFS अधिकारी ने दिया जवाब
नई दिल्ली, 23 अगस्त: महाराष्ट्र के ठाणे में पुलिस ने सैंड बोआ स्नेक की तस्करी कर रहे 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तस्करों के पास से बरामद हुए हुए दुर्लभ सैंड बोआ सांप को न सिर्फ मीडिया के सामने रखा, बल्कि इसकी कीमत भी बताई। मीडिया में सैंड बोआ की तस्वीर के साथ-साथ उसकी कीमत भी सामने आ गई। लेकिन क्या ऐसा करना सही है ? क्या इस इस तरह के अवैध और प्रतिबंधित जीव-जंतुओं को सार्वजनिक करना या उनकी कीमत के बारे में बताया सही है ? आईएफएस परवीन कासवान ने इसका जवाब दिया है। परवीन कासवान ने न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट को कोट करते हुए रीट्वीट किया है।

IFS Parveen Kaswan ने दी ये सलाह
परवीन कासवान ने ट्विटर पर पुलिस को ऐसी दुर्लभ प्रजातियों की कीमत का खुलासा नहीं करने की सलाह दी है। इसके पीछे उन्होंने तर्क भी दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से अपराधी इसका बिजनेस करने के लिए आकर्षित होंगे। उन्होंने बताया कि इस बारे में MoEFCC (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) द्वारा एक दिशानिर्देश है। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि इस सांप के लिए कोई भी 70 लाख रुपए नहीं देगा। यह एक पोंजी योजना है।

सैंड बोआ सांप की कीमत 70 लाख रुपए
एसीपी उमेश माने पाटिल ने सोमवार को बताया कि ठाणे जिले के कल्याण नगर से सैंड बोआ सांप की तस्करी के आरोप में पांच लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से 70 लाख रुपए का सांप बरामद किया गया है। इसको लेकर खड़कपाड़ा थाने के वरिष्ठ निरीक्षक सरजेराव पाटिल ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कल्याण पुलिस ने जाल बिछाकर रविवार को घंडारी पुल के पास से पांचों आरोपी को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक भागने में सफल रहा। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी महाराष्ट्र के टिटवाला, वाडा, पालघर, मनोर और भिवंडी इलाकों के रहने वाले हैं।

गैरकानूनी है सैंड बोआ का शिकार
बता दें, सैंड बोआ बेहद खास और दुर्लभ प्रजाति का सांप है। इस सांप की ब्लैक मार्केट में कीमत लाखों रुपए बताई जाती है। यह सांप विदेशों में भेजा जाता है। इस सांप को भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित किया गया है। यानी इसे अवैध शिकार, व्यापार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 11, 39, 48 और 51 के साथ-साथ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की अन्य संबंधित धाराओं के तहत भी रखा गया है। इसका मतलब है कि इस सांप का शिकार गैरकानूनी है और कड़ी सजा मिलती है।












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