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संसद सत्र में 'राष्ट्रीय नदी गंगा बिल' पास हुआ तो फिर मैली नहीं होगी गंगा

बेंगलुरु। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को शुरु हो चुका हैं। कहने को तो यह शीत सत्र है लेकिन विभिन्न मुद्दों पर सियासी तपिश झेलेगा। सरकार और विपक्ष नागरिकता संशोधन बिल,आर्थिक सुस्ती, महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आमने-सामने होगी वहीं इस सत्र में राष्ट्रीय नदी गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए बिल पेश किया जाना है।

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बता दें केन्‍द्र सरकार जीवनदायनी गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए तमाम परियोजनाओं पर काम कर रही है। लेकिन अब सरकार कड़े प्रावधानों वाले इस बिल पर भी काम कर रही हैं। यह बिल पास हो जाता है तो भारत की पहचान मोक्क्षदायिनी गंगा मैली होने से बच सकेगी। इसके साथ ही भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक और विश्वास के कारणों की वजह से इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा भी मिल जाएगा।

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करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है ये नदी। गोमुख से गंगासागर अपने किनारे करोड़ों लोगों की जिंदगी में ये नदी खुशहाली लाती है। लेकिन आज ये कराह रही है। अपनों ने ही उसे प्रदूषित कर दिया है। गंगा अपनी खुद की लड़ाई लड़ रही है। लोगों के नासमझी भरे कार्यों की कीमत यह पवित्र नदी चुका रही है।

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गंगा सफाई के नाम पर हजारों करोड़ों खर्च किए गए लेकिन नतीजा सबके सामने है। उम्मीद जतायी जा रही है कि यह बिल पास हो जाने के बाद सरकार गंगा में प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई कर सकेंगी। इस बिल में ऐसे कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं ताकि लोग कानून तोड़ने की हिम्मत न कर सकें। जिसके बाद जीवनदायनी गंगा मैली होने से बच सकेगी। बता दें विगत वर्ष गंगा प्रेमी स्वामी सानंद ने इसके लिए अपने प्राण गंवाने पड़े थे। जिसके बाद केंद्र सरकार गंगा कानून को मूर्त रूप देने में जुट गयी थी। इसके तहत राष्ट्रीय नदी पुनरुद्धार, संरक्षण एवं प्रबंधन बिल का मसौदा तैयार किया गया था।

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सरकार की ये नई योजना, पहुंचा सकती है सलाखों के पीछे

सरकार पवित्र नदी गंगा की साफ-सफाई बनाए रखने के लिए बिल पेश करेगी इसका उद्देश्य गंगा का जीर्णोद्धार करके उसका प्राचीन स्वरुप लौटाकर उसके निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करना है। इसके तहत गंगा में प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। इस बिल के पास हो जाने के बाद गंगा में प्रदूषण करने वालों को 5 साल की जेल तथा 50 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

जलशक्ति मंत्रालय द्वारा बिल का मसौदा तैयार किया था और इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा है। ड्राफ्ट किए गए इस बिल में 13 अनुच्‍छेद और 3 अनुसूचियां होंगी। इसमें गैरकानूनी निर्माण कार्य, पानी के बहाव को रोकना, दूषित जल का बहाव, पानी चोरी, घाटों में तोड़फोड़ जैसे कई प्रावधान शामिल हैं।

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5 साल की होगी जेल

"द नेशनल रिवर गंगा" बिल में कहा गया है कि अगर कोई बिना अनुमति के गंगा की धारा की बहाव में रुकावट पैदा करता है तो फिर उस पर ज़्यादा से ज़्यादा 50 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी तरह अगर कोई गंगा के तट पर रहने के लिए घर या बिजनेस के लिए कोई कंसट्रक्शन करता है तो उसे पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं इस अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले अपराध गैर-जमानती रहेंगे। इसमें अलग अलग अपराधा के हिसाब से जुर्माना निर्धारित किया गया है।

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प्रदूषण से बचाने के लिए कई कड़े प्रवाधान

बता दें गंगा की परिभाषा में अब तक गोमुख से गंगासागर तक को शामिल किया जाता था। नई परिभाषा में अब पंच प्रयागों पर मिलने वाली सभी धाराओं को गंगा की परिभाषा में शामिल किया गया है। मसौदे में गंगा पर बांध बनाने को स्वीकार किया गया है, मगर गंगा के प्रवाह को बनाए रखने का शर्त भी जोड़ा गया है। इससे जुड़ी गवर्निंग काउंसिल 11 सदस्यीय होगी, जिसमें 5 गंगा के विशेषज्ञ होंगे। बिल में गिरधर मालवीय कमेटी के 80 फीसदी सुझावों को शामिल किया गया है। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए भी कई कड़े प्रावधानों का जिक्र है।

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50 हजार रुपये तक चुकाना पड़ सकत है जुर्माना

विधेयक के अनुसार पुलिसवालों के पास अपराधियों को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने, उसे पास के पुलिस थाने में ले जाने का अधिकार होगा। गंगा अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों और जुर्माना की लंबी सूची है जिसमें घाट को खराब करना या सीढ़ियों को नुकसान पहुंचाना या नदी में कोई अपमानजनक चीज फेंकना शामिल है। दूसरे अपराधों में पत्थर खनन, अनुमति के बिना वाणिज्यिक मछली पकड़ना, पहाड़ी ढलानों या संवेदनवशील क्षेत्रों में वनों की कटाई करना, ट्यूबवेल या उद्योग की जरुरतों की संगठित खपत के लिए भूजल निकालना सहित दूसरे शामिल हैं। यह सभी अपराध दो साल तक कारावास या 50,000 रुपये तक के जुर्माना के साथ दंडनीय हैं।

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गंगा काउंसिल बनाने की तैयारी

गंगा नदी को केंद्र सरकार साफ करने की पूरी कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार गंगा को बचाने के लिए एक खास पुलिस फोर्स भी तैयार करेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री की देख रेख में नेशनल गंगा काउंसिल भी बनाया जाएगा। पीएम के अलावा इस काउंसिल में उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और झारखंड के मुख्यमंत्री भी होंगे। पुलिस फोर्स के पास उन लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा जो नदी को प्रदूषित करेंगे।

यह नदी को साफ रखने और कायाकल्प करने में मदद करेंगे। यह अपराध और जुर्माना इस विधेयक के अंतर्गत आते हैं। केंद्र सरकार का गंगा के प्रबंधन, विनियमन और विकास पर नियंत्रण रहेगा। इस नदी का भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक और विश्वास के कारणों की वजह से इसे राष्‍ट्रीय नदी का दर्जा दिलवाया जाना भी इस बिल में शामिल हैं। मोदी सरकार 2024 चुनाव से पहले हर हाल में गंगा को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य हासिल करना चाहती है।

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नितिन गडकरी ने किया था ये दावा

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने 2018 में दावा किया था कि मार्च 2019 तक 70 से 80 फीसदी गंगा निर्मल हो जाएगी। उन्होंने कहा था देश के 70 शहर गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं, इसमें बिहार के 32 शहर शामिल हैं। यहां नमामि गंगे अभियान के तहत विशेष तरह की परियोजनाएं संचालित होंगी। एक साल पूर्व उन्‍होंने बताया था कि 1809 कंपनियां और फैक्ट्रियां गंगा को प्रदूषित कर रहीं हैं। ऐसी फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी को रोकने और गंगा की सफाई के लिए 214 परियोजनाएं संचालित हैं। इनमें से 41 अब तक पूरी हो चुकी हैं।

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मोदी सरकार का लक्ष्‍य

बता दें गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई उत्तराखण्ड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुन्दरवन तक विशाल भू-भाग को सींचती है। देश की प्राकृतिक सम्पदा ही नहीं, जन-जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित होते ही चुनाव लड़ने के लिए बनारस को चुना था और कहा था कि मां गंगे ने उन्हें बुलाया है।

उनका नारा गंगा के स्वच्छता अभियान से जुड़ा था। नाममि गंगे योजना के तहत मोदी सरकार गंगा को संरक्षित करने का तो कार्य कर ही रही है और यह बिल पास हो जाने के बाद मोदी सरकार 2024 चुनाव से पहले हर हाल में गंगा को स्वच्छ बनाने का संपूर्ण लक्ष्य हासिल करना चाहती है।

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