Rajya Sabha Elections: राजीव गांधी ना होते तो रणदीप सुरेजवाला जिंदा नहीं होते, जानिए कुछ अनकही बातें
नई दिल्ली, 30 मई। राज्यसभा चुनाव की उल्टी गिनती चालू हो चुकी है, 10 जून को 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी। कांग्रेस ने 7 राज्यों से 10 राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। जिसमें उसने राजस्थान से रणदीप सुरजेवाला को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सुरजेवाला का नाम लिस्ट में एक तरह से अपेक्षित ही था। भाजपा के खिलाफ आग उगलने वाले रणदीप सुरजेवाला गांधी परिवार के काफी करीबी कहे जाते हैं और वो पार्टी के नामचीन चेहरों में से भी एक हैं।

अपने तर्कों से सामने वाला का मुंह बंद करा देते हैं सुरजेवाला
54 वर्षीय सुरजेवाला ने बहुत कम वक्त में राजनीति में अपनी जगह बनाई है। भले ही आज कांग्रेस अपने बुरे दौर से गुजर रही है लेकिन हर टीवी बहस और प्रेस वार्ता में वो कांग्रेस का पक्ष बड़ी ही मजबूती के साथ रखते हैं और अपने तर्कों से सामने वाला का मुंह हर हालत में बंद करने की कोशिश करते हैं।

17 बरस की उम्र से राजनीति में सक्रिय हैं सुरजेवाला
आपको जानकर हैरत होगी कि रणदीप सुरजेवाला 17 बरस की उम्र से राजनीति में सक्रिय हैं क्योंकि उन्हें राजनीति विरासत में ही मिली है। दरअसल उनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला भी हरियाणा सरकार में लंबे वक्त तक मंत्री रहे थे। वो गांधी परिवार के काफी क्लोज कहे जाते थे। तीन जून, 1967 को चंडीगढ़ में जन्मे रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जब जन्म लिया था तो उसी वक्त हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनी थी और उस वक्त शमशेर सिंह सुरजेवाला के हाथ में कृषि मंत्रालय आया था।

'मेरा सफर, मेरी दास्तां'
पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके शमशेर सिंह सुरजेवाला ने अपनी आत्मकथा 'मेरा सफर, मेरी दास्तां' में अपने बेटे को अपना लकी चार्म कहा है और साथ ही उनकी लाइफ से जुड़ा एक ऐसा किस्सा शेयर किया है, जिसे पढ़ने के बाद हर कोई हैरान रह गया था।

'राजीव गांधी की वजह से आज मेरा बेटा सही सलामत है'
शमशेर सिंह ने लिखा है कि ये सुखद संयोग है कि 'जब-जब रणदीप की लाइफ में अहम मोड़ आया, तब-तब मैं मंत्री रहा। उसके जन्म, पढ़ाई, स्नातक और शादी के वक्त मैं मंत्री ही था, इसलिए वो मेरे भाग्या का सितारा है लेकिन मेरे भाग्य के सितारे के साथ कुछ ऐसा हो गया था, जिसने मुझे हिलाकर रख दिया था लेकिन ऊपरवाले की दया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की वजह से आज मेरा बेटा सही सलामत है।'

'रणदीप हैपेटाइटिस बी का शिकार हो गया'
उन्होंने लिखा है कि 'बात साल 1984 की है, जब मैं लोकसभा चुनावों में व्यस्त था और मेरे पीछे चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी मेरे बेटे ने संभाली थी। लेकिन उस वक्त दुर्भाग्य से रणदीप हैपेटाइटिस बी का शिकार हो गया था। उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। स्थिति कोमा में जाने की हो गई थी। डॉक्टरों ने एक इंजेक्शन लिखकर दिया लेकिन वो उस वक्त इग्लैंड में ही मिलता था। राजीव गांधी को जब ये बात पता चली तो उन्होंने किसी से फोन पर बात की और इंग्लैंड से इंजेक्शन मंगवाया और जिसके लगते ही रणदीप ठीक हो गया, मैं राजीव गांधी को जितना भी धन्यवाद कहूं कम है, उनकी कृपा से ही रणदीप वक्त पर सही हो पाया था।'
38 साल में संभाला था मंत्री पद
आपको बता दें कि मात्र 38 साल में रणदीप सुरजेवाला साल 2005 में हरियाणा सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री का पद संभाल चुके हैं। रणदीप सुरजेवाला साल 2009 से 2014 तक भी हुड्डा कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं, वैसे पेशे से वो वकील हैं।












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