राहुल गांधी का बंगला छिना तो उनकी सिक्योरिटी का क्या होगा ? CRPF करेगी यह समीक्षा
राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाने के बाद उनपर सरकारी बंगला खाली करने का भी दबाव बढ़ गया है। इसकी वजह से उनकी सुरक्षा में लगी सीआरपीएफ को सिक्योरिटी की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिली (फिलहाल उनकी ओर से इस विकल्प को नजरअंदाज किया जा रहा है) तो उन्हें दिल्ली का सरकारी बंगला खाली करके दूसरी जगह पर शिफ्ट होना पड़ेगा। राहुल गांधी को इस समय में जो सुरक्षा मिली हुई है, वह प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्रियों को मिलने वाली स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा के बाद सबसे टॉप स्तर की सिक्योरिटी है। उनके चारों और सीआरपीएफ के जवानों का घेरा रहता है। वह अपने आवास में हों या बाहर सीआरपीएफ के जवान उनकी सिक्योरिटी के लिए हर क्षण तैयार रहते हैं। वह दिल्ली से बाहर भी जाते हैं तो इनर-लाइन की सुरक्षा का जिम्मा इसी केंद्रीय सुरक्षा बल के पास रहता है। लेकिन, आवास बदलने पर सीआरपीएफ को उनकी सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा करनी पड़ेगी।

सीआरपीएफ करेगी राहुल की सुरक्षा की समीक्षा-रिपोर्ट
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद की सदस्यता के अयोग्य ठहराए जाने के चलते अगर सरकारी बंगला खाली करना पड़ा तो उन्हें किसी दूसरे घर में शिफ्ट करना होगा। कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से भी उन्हें अपने घर में ठहरने का ऑफर भी मिल रहा है। लेकिन, राहुल को 24 घंटे सुरक्षा मुहैया करवाने की जिस सीआरपीएफ की जिम्मेदारी है, वह भी बदलती परिस्थितियों के हिसाब से अपनी तैयारी शुरू कर चुकी है। सोमवार को ही कांग्रेस नेता और केरल के वायनाड सीट के पूर्व सांसद को लोकसभा सचिवालय ने दिल्ली के 12,तुगलक लेन वाला बंगला 22 अप्रैल, 2023 तक खाली करने का नोटिस थमाया है। राहुल को अभी सीआरपीएफ की एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन (एएसएल) के साथ जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिल रही है, जो कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा के बाद दूसरे नंबर की सुरक्षा मानी जाती है।
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राहुल की सुरक्षा कवर कम होने की संभावना नहीं
किसी भी वीआईपी को किस श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी यह केंद्रीय गृह सचिव की अगुवाई वाला एक पैनल तय करता है, जो कि खतरे की आशंकाओं पर आधारित रहता है। वैसे सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बंगला खाली करने की स्थिति में भी केंद्र सरकार राहुल की मौजूदा सुरक्षा कम करेगी, इसकी संभावना नहीं है। लेकिन, वह जहां रहेंगे, उसकी सुरक्षा की समीक्षा करने की निश्चित रूप से आवश्यकता पड़ेगी।

इनर-रिंग सिक्योरिटी के लिए जिम्मेदार है सीआरपीएफ
गौरतलब है कि कुछ समय पहले राहुल जब 'भारत जोड़ो यात्रा' के तहत जम्मू-कश्मीर में थे, जो उनकी सुरक्षा का मुद्दा भी उठा था। तब सीआरपीएफ के डीजी सुजॉय लाल थाउसेन ने एक टीवी चैनल से कहा था कि उनकी फोर्स राहुल गांधी की इनर-रिंग सिक्योरिटी के लिए जिम्मेदार है। मतलब, अगर वह दिल्ली से बाहर जाते हैं तो संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है कि उन्हें पुख्ता सुरक्षा मुहैया करवाए। तब वो बोले थे, 'सिक्योरिटी से संबंधित सभी चिंताओं को हमारी प्रोटेक्शन स्कीम और विस्तृत समीक्षा के आधार पर तय किया जाता है और इसी के तहत राहुल गांधी की सुरक्षा का इंतजाम किया जाता है।' मतलब, राहुल को अगर मजबूरन दूसरे घर में जाना पड़ेगा तो सीआरपीएफ उन्हें फुलप्रूफ सुरक्षा मुहैया करने के लिए तमाम परिस्थितियों का आकलन करेगी।

राहुल, प्रियंका और सोनिया को पहले मिली थी एसपीजी सुरक्षा
राहुल गांधी, उनकी मां और कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पहले एसपीजी की सुरक्षा मिली हुई थी। एसपीजी सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री और उनके नजदीकी पारिवारिक सदस्यों और खतरे की आशंका को देखते हुए पूर्व प्रधानमंत्रियों को देने की व्यवस्था है। लेकिन, सोनिया के परिवार के तीनों सदस्यों को लगातार तीन दशकों तक देश की सबसे टॉप सिक्योरिटी दी जाती रही। एसपीजी सुरक्षा में प्रोटेक्टी को कम से कम 50 सुरक्षाकर्मी मिलते हैं, जिसमें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (एनएसजी) के कमांडो भी शामिल होते हैं। 2019 में मोदी सरकार ने कांग्रेस के इन तीनों नेताओं की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी, लेकिन जेड प्लस सिक्योरिटी कवर की व्यवस्था बरकरार रखी।

एसपीजी सुरक्षा छिनने पर प्रियंका को खाली करना पड़ा था बंगला
वैसे जब भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस ने राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक के आरोप लगाए थे, तब सीआरपीएफ ने दावा किया था कि 2020 के बाद कम से कम 113 मौकों पर कांग्रेस नेता ने सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को तोड़ने का काम किया है। जहां तक उनकी बहन प्रियंका का सवाल है तो वह कभी भी कोई चुनाव नहीं जीती हैं, लेकिन जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा उन्हें अभी भी मिल रही है। एसपीजी सुरक्षा खत्म होने की वजह से ही प्रियंका को जुलाई, 2020 में 35 लोधी एस्टेट वाला सरकारी बंगला खाली करना पड़ा था।












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