बोले संजय राउत -'मुंडे होते तो ना टूटता शिवसेना-भाजपा का गठबंधन, राहुल-प्रियंका को दी नसीहत'
मुंबई, 12 दिसंबर। आज भाजपा के दिग्गज दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की जयंती है, इस खास दिन पर उन्हें याद करते हुए शिवसेना नेता संजय राउत का दर्द छलका है। उन्होंने कहा कि 'अगर आज गोपीनाथ मुंडे जिंदा होते तो भाजपा और शिवसेना का गठबंधन कभी नहीं टूटता ,वो शिवसेना और उनके नेताओं की दिल से कद्र करते थे और उन्हें शिवसेना की ताकत का भी एहसास था। उन्होंने ये भी कहा कि आज महाराष्ट्र भाजपा में एक भी नेता मुंडे की बराबरी का नहीं है। वो एक महान और अच्छी सोच वाले नेता थे।'
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राउत ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि 'आज महाराष्ट्र भाजपा में कोई भी नेता ऐसा नहीं है जो कि उनकी तरह भाषण दे सके, तर्क दे सके ये संवाद कर सके और ना ही कोई नेता उनकी तरह सोच रखता है। मुंडे महाराष्ट्र के लोकप्रिय नेता था और हमने 25 से 30 साल तक साथ काम किया, वो सबको साथ लेकर चलने वाले नेता था और उनका अंत तक प्रयास यही था कि भाजपा-शिवसेना साथ-साथ महाराष्ट्र में कदम से कदम मिलाकर चले। वो अगर आज जीवित होते तो महाराष्ट्र की राजनीति ही दूसरी होती।'
कांग्रेस के बिना कोई फ्रंट संभव नहीं
तो वहीं आज एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का भी जन्मदिन है, जिन्हें बधाई देते हुए राउत ने उनकी दिल खोलकर तारीफ की और कहा कि 'महाविकास अघाड़ी सरकार पवार के नेतृत्व में दिल खोलकर आगे बढ़ रही है।' इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बारे में संजय राउत ने कहा कि 'भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा लेकिन कांग्रेस के बिना कोई फ्रंट संभव नहीं है।' आपको बता दें कि राउत हाल ही में राहुल गांधी से मिलकर लौटे हैं, उन्होंने कहा कि 'हमारी मुलाकात काफी सकारात्मक रही और हमने बहुत सारे मुद्दों पर चर्चा की है। मैं उन सारी बातों को शरद पवार से शेयर करूंगा। राउत ने कहा कि राहुल गांधी का जल्द ही मुंबई दौरा होगा।'
'रोखठोक' में प्रियंका-राहुल को नसीहत
मालूम हो कि इससे पहले संजय राउत ने 'सामना' में प्रियंका और राहुल गांधी के लिए लिखा था कि 'दोनों भाई-बहनों के सामने अपनी पार्टी को फिर से मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। पार्टी मुखपत्र 'सामना' में लिखे लेख, जिसका शीर्षक 'रोखठोक' है, में संजय राउत ने राहुल-प्रियंका को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से शिक्षा लेने की नसीहत भी दी है। उन्होंने अपने लेख में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को अलग-अलग व्यक्तित्व के रूर में वर्णित किया है लेकिन ये भी कहा है कि दोनों का फोकस सिर्फ अपनी पार्टी को मजबूत बनाना ही है।'












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