केसीआर ने तीसरा मोर्चा बनाया तो कौन सी पार्टियां आ सकती हैं साथ? ओवैसी कर रहे हैं पैरवी
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी अभी भी देश में एनडीए और इंडिया गठबंधन से अलग तीसरे विकल्प की बात कर रहे हैं। उन्होंने हाल में यह बात लगातार दोहराई है कि देश को तीसरे विकल्प की आवश्यकता है, जो गैर-कांग्रेस और गैर-बीजेपी हो।
इस बार तो उन्होंने सीधे तौर पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के नेता के चंद्रशेखर राव से इसकी अगुवाई करने की पैरवी की है। शायद इसकी वजह ये हो सकती है कि अभी जो विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन बना है, उस तरह की पहल एक साल पहले केसीआर ने ही शुरू की थी। बाद में बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को उनसे लपक लिया था।

केसीआर से बोले ओवैसी, तीसरे विकल्प की अगुवाई करें
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को देश में फिर से तीसरे विकल्प की वकालत की है। उनको लगता है कि देश में जो मुसलमानों के खिलाफ कथित नफरत और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं, उसे रोकने के लिए यही एक रास्ता है। उन्होंने तेलंगाना के सीएम केसीआर से राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक विकल्प की कमान संभालने का अनुरोध किया है। केसीआर का पहला मिशन इसलिए नहीं सफल हो पाया था कि वह विपक्षी गठबंधन से कांग्रेस को दूर रखना चाहते थे।
खेल अभी शुरू हुआ है- ओवैसी
ओवैसी ने कहा, 'कई राजनीतिक पार्टियां हैं और हर राज्य में कई बड़े नेता हैं, जो तैयार हैं और अगर सीएम केसीआर इसकी अगुवाई करते हैं तो काफी सारा काम किया जा सकता है।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा, 'हमारे पास एक चौकीदार है, जो राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटता रहता है और दूसरे दुकानदार भी हैं। हम (तीसरा विकल्प)चौकीदार और दूकानदार दोनों को सत्ता से हटा देंगे। '
गौरतलब है कि तेलंगाना में बीआरएस और ओवैसी की पार्टी में पहले से ही दोस्ती है और सीएम केसीआर कह चुके हैं कि यह दोस्ती आगे भी जारी रहने वाली है। जब ओवैसी से यह पूछा गया कि अकेले एआईएमआईएम और बीआरएस तीसरे विकल्प के लिए क्या कर सकते हैं तो उन्होंने कहा कि 'खेल अभी शुरू हुआ है; और अल्लाह हमारे साथ हैं...'
दोनों बड़े गठबंधनों से दूर पार्टियां कौन हैं?
देश में अभी जितनी भी बड़ी पार्टियां न्यूट्रल की भूमिका में हैं, मतलब न बीजेपी के साथ हैं और न ही इंडिया गठबंधन को भाव दे रहे हैं, उनमें यूपी में मायावती की बसपा, आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी और ओडिशा में सत्ताधारी बीजू जनता दल शामिल हैं।
इनमें से बीजेडी कई मौकों पर परोक्ष तौर पर बीजेपी सरकार के साथ खड़ी दिख चुकी है। जबकि, वाईएसआरसीपी और टीडीपी, बीआरएस की अगुवाई वाले किसी गठबंधन में शामिल होंगी, आंध्र प्रदेश के विभाजन को देखते हुए यह फिलहाल दूर की कौड़ी लगती है।
तीसरे मोर्चे में कौन-कौन?
ऐसे में ओवैसी के मंसूबे वाले तीसरे विकल्प में जो पार्टियां संभावित तौर पर शामिल हो सकती हैं, उनमें सबसे पहला नाम बीएसपी का हो सकता है। पिछले हफ्ते ओवैसी ने खुद कुछ दलों का नाम भी लिया था, जिसमें मायावती की पार्टी भी शामिल थी। इसके अलावा उन्होंने जिन दलों की ओर इशारा किया था, उनमें से किसी की भी राष्ट्रीय स्तर पर कोई अहमियत नहीं है।
उन्होंने असम की राजनीतिक पार्टियों की ओर भी इशारा किया था। इसमें बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट हो सकता है। उन्होंने कुछ बोडो पार्टियां का भी जिक्र किया था। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान के भी कुछ सियासी दलों के साथ में आने की संभावना जताई थी। ऐसा हुआ तो ये राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और भारतीय ट्राइबल पार्टी की ओर इशारा हो सकता है।
इसी तरह महाराष्ट्र के भी कुछ दल ओवैसी-केसीआर के साथ जुड़ सकते हैं। लेकिन, सवाल है कि इन दलों के दम पर तीसरा विकल्प तेलंगाना छोड़कर कहीं खास प्रभाव डाल पाएगा, आज की तारीख में यह बहुत बड़ा सवाल है।












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