IBC Amendment Bill 2025: दिवालियापन प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी, मानसून सत्र में पेश हो सकता है संशोधन बिल
IBC Amendment Bill 2025: केंद्र सरकार दिवालियापन और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC) में अहम बदलाव करने की तैयारी में है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि केंद्र सरकार आगामी संसद के मानसून सत्र में IBC संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस कदम का मकसद दिवालिया प्रक्रियाओं को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित बदलावों पर काफी समय से विचार-विमर्श चल रहा है। संशोधन बिल में कुछ प्रमुख प्रावधानों को सरल बनाने, प्रक्रियाओं को डिजिटल करने और मामलों के शीघ्र निपटारे पर जोर दिया जा सकता है।

क्या हो सकते हैं प्रमुख बदलाव?
जानकारों का मानना है कि प्रस्तावित संशोधनों में कुछ प्रमुख बिंदु शामिल हो सकते हैं।
- दिवालिया मामलों के समाधान के लिए समयसीमा को और सख्त बनाना
- कम मूल्य की कंपनियों के लिए 'फास्ट ट्रैक' समाधान प्रक्रिया
- कॉर्पोरेट देनदारों की परिसंपत्तियों की वैल्यूएशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए आवेदन और सुनवाई की प्रक्रिया
सरकार इससे पहले भी IBC में कई बदलाव कर चुकी है, लेकिन बढ़ते कॉर्पोरेट मामलों और लंबित केसों की संख्या को देखते हुए अब एक व्यापक संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
नीति निर्माताओं की नजर में क्यों जरूरी है संशोधन?
विशेषज्ञों का कहना है कि IBC ने भारत में कर्ज वसूली के सिस्टम को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। संशोधन से इन कमियों को दूर करने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने की कोशिश होगी। संसद का मानसून सत्र जुलाई अंत या अगस्त की शुरुआत में बुलाया जा सकता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह विधेयक नीति विमर्श और कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।












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