IAS अभिषेक सिंह की धांसू पोस्ट, लिखा-'मैं कोई छुई-मुई नहीं हूं, जो डर के बैठ जाऊंगा, किसी के बाप के दम पर'
IAS Abhishek Singh Latest News: भविष्य में मुझ पर आक्षेप लगाने से पहले दो बार सोच लेना, मैं कोई छुई-मुई नहीं हूं, जो डर के बैठ जाऊंगा। अपनी प्रतिभा, अपने आत्मविश्वास और अपने सासह के दम पर चलता हूं। किसी के बाप के दम पर नहीं....
कुछ इसी अंदाज में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सबसे चर्चित पूर्व आईएएस अभिषेक सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी-चौड़ी पोस्ट शेयर करते हुए आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब दिया है।

जौनपुर के रहने वाले अभिषेक सिंह अपने होम कैडर उत्तर प्रदेश साल 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इनकी पत्नी दुर्गा शक्ति नागपाल भी आईएएस हैं, जो इन दिनों लखीमपुर खीरी में डीएम पद पर तैनात हैं।
अभिषेक सिंह अपनी आईएएस की सर्विस व निजी जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। अभी म्यूजिक एल्बम में सनी लियोनी के साथ ठुमके लगाते नजर आते हैं तो कभी आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देकर चर्चा में आए हैं।
आज 13 जुलाई 2024 को अभिषेक सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर किसके बारे में क्या लिखा? पढ़ें उन्हीं की जुबानी।
वैसे तो मुझे किसी आलोचना से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, पर ये मेरे जीवन काल में पहली बार है जब मैं अपने आलोचकों को जवाब दे रहा हूँ। और वो इसलिए क्योंकि मेरे हज़ारो समर्थक मुझसे कह रहे हैं कि आप जवाब दें नहीं तो हमारा मनोबल टूट जाएगा।अतः ये मेरा नैतिक कर्तव्य है कि मैं सच्चाई सामने रखूँ जिससे उनका भरोसा ना टूटे। तो ये जवाब मेरे समर्थकों को समर्पित है ना कि आलोचकों को।
जबसे मैंने आरक्षण के पक्ष में आवाज़ उठाना शुरू किया है, आरक्षण विरोधियों की पूरी सेना ने सब काम छोड़कर मुझपे मोर्चा खोल दिया है। उनको यह बात हज़म नहीं हो रही कि एक जनरल कैटेगरी का लड़का आरक्षण के पक्ष में कैसे बोल रहा है?
पहले तो आपने मेरी कास्ट पर ही सवाल उठाया और कहा कि मैं झूठा सिंह हूँ, फिर आपने कहा कि मैं अपनी नौकरी वापिस माँग रहा हूँ, और अब कह रहे हैं कि मैंने नौकरी आरक्षण से ली है।
मैं आपसे बड़ी विनम्रता पूर्वक एक बात कहना चाहता हूँ। अभिषेक सिंह अपने पुरुषार्थ, कर्मठता और साहस के लिए जाना जाता है। किसी की कृपा के लिए नहीं। मैंने अपने जीवन में जो कुछ हासिल किया है अपने दम पर हासिल किया है, किसी आरक्षण के दम पर नहीं।
देश की सर्वोच्च सेवा में सेलेक्शन लेना, उसमें निर्भीक निडर बिना किसी का दबाव माने ईमानदारी से कार्य करना, और अपनी मर्ज़ी से उसे छोड़ दोबारा शून्य से शुरुआत करना। जब भविष्य अंधकार में छुपा हो तब भी उसमें सूरज ढँढने का हौसला लिए, आँखों में अनगिनत सपने लिए, अपने दम पर आगे बढ़ जाना, साहब इसके लिए चट्टान का कलेजा चाहिए।
आपने ये कहा कि मेरे पिताजी IPS अधिकारी थे इसलिए मुझे फ़ायदा मिला। आपको बता दूँ, मेरे पिताजी एक बहुत ग़रीब परिवेश से निकलकर PPS अधिकारी बने, IPS में प्रमोट हुए थे। उनकी 3 सन्तानें हैं, यानी मेरी एक छोटी बहन और एक छोटा भाई। उन्होंने भी UPSC की तैयारी करी पर सेलेक्शन नहीं हो सका, इसके अलावा मेरे 7 और कजिंस ने प्रयास किया, कई कर भी रहे हैं, अभी तक किसी का भी सेलेक्शन नहीं हो सका है। अपने पूरे खानदान में मैं इकलौता IAS में चयनित हुआ।
आपको ये भी बता दूँ कि UPSC में कोई डोमिसाइल certificate नहीं लगता। जिसने भी UPSC दिया है उसको पता होगा। तो ये फ़र्ज़ी प्रॉपगैंडा बंद करें। जिसको जो भी पूछना है मैं जवाब देने के लिए तैयार हूँ।
मुझे जो ठीक लगता है मैं करता हूँ, और आगे भी करता रहूँगा। कला और समाज सेवा मेरी रुचि है और मैं इसमें लगातार प्रयासरत हूँ। हाँ मैं ये मानता हूँ कि दोनों ही फील्ड में मैं ज़्यादा कुछ नहीं कर पाया हूँ, पर मैं हारा नहीं हूँ। रोज़ सुबह उठकर मैं पूरी निष्ठा से मेहनत करता हूँ, और तब तक करता रहूँगा जब तक सफल नहीं हो जाता। मैं कभी मैदान छोड़कर नहीं भागूँगा।
हाँ, ये भी सुन लें, मैंने जितने भी सामाजिक कार्य किए हैं चाहे वे अपने United by Blood के तहत COVID-19 से ग्रसित लोगों को वैक्सीन लगवाना व ऑक्सीजन सिलिंडर पहुँचाना या No-Shame Movement के माध्यम से लड़कियों को निःशुल्क लीगल सहायता दिलवा कर उनका आत्मबल बढ़ाना, या फिर "राष्ट्रीय युवा शक्ति" द्वारा फ्री UPSC कोचिंग, ये सब अपनी निजी क्षमता से किया हैं। नौकरी से इतर। सिस्टम का सहारा लिए बिना!
मैंने अब तक के जीवन में जो भी ठाना है, वो पाया है अपनी मेहनत और लगन से। तो अब जब बात छेड़ ही दी है, तो एक और संकल्प ले रहा हूँ। इस देश में सरकार के संसाधन जहाँ जहाँ भी खर्च होंगे, न्यायसंगत तरीक़े से ही होने चाहिए। सरकार की नौकरियाँ में आरक्षण जनसंख्या के अनुरूप होना चाहिए। अब मैं आंदोलन शुरू करूँगा और इस 50% की सीलिंग को हटाकर जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण की माँग रखूँगा और उसको संवैधानिक तौर पर पूरा कराऊँगा।
और जिन आरक्षण विरोधियों को इससे तकलीफ़ है, और वो अपनी प्रतिभा का दंभ भरते हैं, उनसे मैं कहूँगा कि यदि इतनी ही प्रतिभा है, तो सरकारी नौकरियों में सेंध लगाना बंद करो और खुले मैदान में आओ और बिज़नेस करो, उद्योगपति बनो, खिलाड़ी बनो, एक्टर बनो। वहाँ तो आपकी सीट कोई नहीं माँग रहा। वहाँ कोई रिज़र्वेशन नहीं। खुला मैदान है, आसमान पुकार रहा है, चलो मेरे साथ। जब मैं चल सकता हूँ तो आप क्यूँ नहीं।
हालाँकि मैं जात-पात के एकदम ख़िलाफ़ हूँ, और मैं चाहता हूँ कि ये व्यवस्था ख़त्म हो, इसके लिए हमारी "राष्ट्रीय युवा शक्ति" इंटरकास्ट शादी करने वालों को धन भी देती है, लेकिन जब तक समाज इसको मानता है तब तक आरक्षण जनसंख्या के आधार पर रहना चाहिए।
भविष्य में मुझपर आक्षेप लगाने से पहले दो बार सोच लेना, मैं कोई छुई मुई नहीं हूँ जो डर के बैठ जाऊँगा। अपनी प्रतिभा, अपने आत्मविश्वास और अपने साहस के दम पर चलता हूँ, किसी के बाप के दम पर नहीं।












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