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जगुआर क्रैश से पहले एयरक्राफ्ट से निकल सकते थे पायलट संजय चौहान, लेकिन चुनी मौत, जानिए क्‍यों?

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    अहमदाबाद। मंगलवार को गुजरात के कच्‍छ, मुंदरा में इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) का फाइटर जेट जगुआर क्रैश हो गया। इस क्रैश में एयर कमोडोर संजय चौहान शहीद हो गए। एयर कमोडोर अगर चाहते तो एयरक्राफ्ट से निकलकर अपनी जिंदगी बचा सकते थे लेकिन उन्‍होंने ऐसा नहीं किया। वह एयरक्राफ्ट में ही रहे और आखिरी में क्रैश के साथ ही एक देश ने एक बेहतरीन पायलट भी खो दिया। इस एयरक्राफ्ट ने जामनगर से टेक ऑफ किया था और एक रूटीन सॉर्टी पर था। टेक ऑफ करने के कुछ ही देर बाद यह दुर्घटना का शिकार हो गया था।

    गांव के ऊपर से गुजर रहा था जगुआर

    गांव के ऊपर से गुजर रहा था जगुआर

    एयर कमोडोर संजय का एयरक्राफ्ट एक गांव के ऊपर था। अगर वह एयरक्राफ्ट छोड़कर निकल जाते तो एयरक्राफ्ट गांव के ऊपर गिर सकता था और कई लोगों की जानें जा सकती थीं। एयर कमोडोर संजय ने गांव के लोगों की जिंदगियां बचाने के लिए अपनी जान दे दी। जगुआर एक ब्रिटिश-फ्रेंच फाइटर जेट है जिसे 80 के दशक में इंडियन एयरफोर्स में शामिल किया गया था। इस समय आईएएफ के पास जगुआर की छह स्‍क्‍वाड्रन हैं।

    वायु सेना मेडल से सम्‍मानित

    वायु सेना मेडल से सम्‍मानित

    संजय उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले थे और स्टेशन कमांडर थे। एयर कोमोडोर रैंक आर्मी की ब्रिगेडियर रैंक के बराबर होती है। संजय को हादसे में गंभीर चोटें आई थीं और कुछ मिनटों बाद उनकी मौत हो गई। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक संजय एक एक्‍सपेरीमेंटल टेस्‍ट पायलट थे और उन्‍होंने इंडियन एयरफोर्स के लगभग हर एयरक्राफ्ट को उड़ाया था। उनके पास अकेले जगुआर को उड़ाने का 2000 घंटों का अनुभव था। संजय चौहान की उम्र करीब 50 वर्ष थी और उन्‍हें वायु सेना मेडल से सम्‍मानित किया जा चुका था।

    17 तरह के एयरक्राफ्ट का अनुभव

    17 तरह के एयरक्राफ्ट का अनुभव

    एक अधिकारी की ओर से बताया गया कि वह एक बेहतर पायलट थे। उन्‍होंने जगुआर, मिग-21, हंटर, एचपीटी-32, इस्‍कारा, किरण, एवोरो-748, एएन-32 से लेकर बोइंग 737 जैसे 17 टाइप के एयरक्राफ्ट्स भी उड़ाए थे। सिर्फ इतना ही नहीं उनके पास राफेल, ग्रिपेन और यूरो-फाइटर जैसे जेट्स को उड़ाने का भी अनुभव था। आईएएफ के पास 121 जगुआर एयरक्राफ्ट्स हैं।

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    English summary
    Jaguar crashed in Gujarat's Kutch and Air commodore Sanjay Chauhan lost his life. He did not eject from the aircraft because it was over the village.

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