लद्दाख से अरुणाचल तक रडार कवरेज को अपग्रेड करने में जुटी IAF,चीन की हरकतों पर नजर
India China border: लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत, चीन से सटी सीमा पर अपने रडार कवरेज को अपग्रेड कर रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उस पार किस तरह की गतिविधियां चल रही हैं, इसपर नजर रखने के लिए भारतीय वायु सेना अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए 10,000 करोड़ रुपए से भी अधिक की योजना पर काम कर रही है। रक्षा सूत्रों ने बताया है कि लद्दाख सेक्टर में चाइनीज एयर फोर्स की गतिविधियों और हरकतों पर नजर रखने के लिए वायु सेना नए और उन्नत रडार लगाने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।

चीन से सटी सीमा पर रडार कवरेज बेहतर करने पर जोर
रक्षा सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है कि मेक इन इंडिया के तहत हाई-पावर रडारों और करीब 20 लो-लेवल ट्रांसपोर्टेबल अश्विनी रडार खरीदने के लिए 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के पास एडवांस स्टेज पर है। सूत्रों ने कहा है कि पश्चिमी क्षेत्रों जैसे कि राजस्थान, पंजाब और गुजरात से जुड़े सेक्टर्स में रडार का कवरेज तुलनात्मक रूप से आसान है। लेकिन, पश्चिम क्षेत्र में जम्मू और कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश तक पहाड़ी क्षेत्रों की वजह से यह काफी मुश्किल हो जाता है। जबकि, पूर्वी क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की वजह से रडार कवरेज को बेहतर करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो चुका है।
चीन की चालबाजियों पर नजर रखना जरूरी
लद्दाख के डेमचोक सेक्टर में चाइनीज एयर फोर्स ने सीबीएम लाइन के 10 किलोमीटर आगे तक अपने फाइटर जेट भेजकर अपने ही उल्लंघनों के जवाब में भारतीय प्रतिक्रिया की जांच शुरू की थी। लेकिन, तब नजदीकी एयरबेस से अपने फाइटर जेट भेजकर भारत ने उसको तगड़ा जवाब दिया था। बाद में यह मामला डिविजन कमांडर लेवल की बातचीत से सुलझा लिया गया था, जिसमें भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि और चाइनीज एयरफोर्स के उनके समकक्ष शामिल हुए थे।
भारतीय सेना भी बुनियादी ढांचे को बेहतर कर रही है
गौरतलब है कि गलवान की घटना के बाद भारत, चीन की चालबाजियों को लेकर बहुत ही सतर्क है। यही वजह है कि भारतीय सेना भी लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में स्थानी निर्माण पर पूरा जोर दे रही है। वहां सेना ऐसी सड़कों के निर्माण में जुटी है, जो हर मौसम में काम आ सके। इसके अलावा बुनियादी ढांचे को इतना मजबूत किया जा रहा है कि दुश्मनों के दांत खट्टे करने में कोई दिक्कत ना आए। बड़ी बात यह है कि ये सारी कवायद मेक इन इंडिया के तहत ही की जा रही है।












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