IAF चीफ ने सुलूर एयरफोर्स स्‍टेशन पर उड़ाया फाइटर जेट तेजस, दक्षिण भारत से चीन की कारगुजारियों पर रखी जाएगी नजर!

सुलूर। इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) चीफ एयर चीफ मार्शल ने बुधवार को तमिलनाडु के सुलूर एयरफोर्स स्‍टेशन पर लाइट कॉम्‍बेट जेट तेजस में उड़ान भरी। इसके साथ ही सुलूर में तेजस की 45वीं स्‍क्‍वाड्रन ऑपरेशनल हो गई है। एयरफोर्स चीफ ने सिंगल सीटर तेजस को उड़ाया है। तेजस ने साल 2013 में इनीशियल ऑपरेशनल सर्टिफिकेट (आईओसी) हासिल किया था। अब फाइटर जेट को फाइनल ऑपरेशनल सर्टिफिकेट (एफओसी) दिलाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

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    सुलूर में ही तेजस की दूसरी स्‍क्‍वाड्रन

    तेजस की दूसरी स्‍क्‍वाड्रन 27 मई को तमिलनाडु के सुलूर में कमीशंड हुई। इस स्‍क्‍वाड्रन में फिलहाल एक ही तेजस होगा और स्‍क्‍वाड्रन का मकसद फाइटर जेट के लिए फाइनल ऑपरेशनल क्‍लीयरेंस (एफओसी) हासिल करना है। इसी एयरबेस पर तेजस की पहली स्‍क्‍वाड्रन भी है। आईएएफ की तरफ से 40 तेजस एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया गया है। हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) को 40 के अलावा 83 एलसीए एमके-1ए तेजस एयरक्राफ्ट का ऑर्डर भी दे दिया गया है। मार्च में रक्षा मंत्रालय ने 38,000 करोड़ से इस ऑर्डर को मंजूरी दी थी। इस वर्ष जनवरी में लाइट कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस ने एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्‍य पर सफल लैंडिंग को अंजाम दिया था। नेवी के लिए यह पहला मौका था जब देश में बने फाइटर जेट को सफलतापूर्वक विक्रमादित्‍य पर लैंड कराया गया था। तेजस की इस स्‍क्‍वाड्रन को ऐसे समय में कमीशंड किया गया है जब लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति है।

    दक्षिण भारत से चीन को घेरने की तैयारी

    इस वर्ष जनवरी में सुलूर से करीब पांच घंटे की दूरी पर तंजावुर में आईएएफ ने अपने एक औश्र सबसे खतरनाक फाइटर जेट सुखोई की की तैनाती कर दी है। तमिलनाडु के तंजावुर में सुखोई की पहली स्‍क्‍वाड्रन जिसे 222 टाइगर शार्क्‍स नाम दिया गया है, आधिकारिक तौर पर वायुसेना का हिस्‍सा बन गई है। दक्षिण भारत में आईएएफ के फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स की यह दूसरी स्‍क्‍वाड्रन है। कोयंबटूर में आईएएफ की एक फाइटर स्‍क्‍वाड्रन पहले से ही है। मगर सुखाई का यह पहला दस्‍ता है जो अब दक्षिण भारत से संचालित होगा। उस समय आईएएफ चीफ भदौरिया ने कहा था कि तंजावुर में सुखोई को तैनात करने का फैसला इसकी रणनीतिक लोकेशन की वजह से लिया गया है। जो सुखोई तंजावुर में तैनात हो रहे हैं वह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसे खतरनाक और स्‍पेशल हथियार से लैस हैं।

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