मैं चुनावी परीक्षा में फेल जरूर हुई हूं लेकिन मैं हारी नहीं हूं: किरण बेदी
नई दिल्ली| जिस तरह से दिल्ली में भाजपा की हार हुई है उसकी कल्पना भी किसी ने स्वप्न में नहीं की थी। आरएसएस ने हार का ठीकरा किरण बेदी के सिर भले ही फोड़ा हो लेकिन बीजेपी की ओर से सीएम प्रत्याशी के रूप में सामने आयीं किरण बेदी ने हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है और कहा कि उन्हें सत्ता का मोह कभी नहीं था और ना ही वो इस चीज के लिए राजनीति में आयीं हैं।
मैं दिल्ली की सेवा करना चाहती थी और वो मैं अब भी करूंगी। किरण बेदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि मेरे खिलाफ बोले गए अपशब्द सुनने के लिए मेरे माता-पिता नहीं हैं। यह सारी बातें किरण बेदी ने अपने ब्लॉग पर लिखी हैं। किरण बेदी ने लिखा है कि मैंने राजनीति में प्रवेश पद और सत्ता के लिए नहीं बल्कि पिछले 40 वर्षो से अपने गृह नगर दिल्ली की सेवा के लिए किया। इस शहर की मैंने अनेकों प्रकार से सेवा की, चाहे वह कोई बड़ा काम हो या छोटा।
मैंने राजनीति में प्रवेश पद और सत्ता के लिए नहीं किया
मैंने इस शहर को विभिन्न चुनौतियों के समय में भी देखा है, चाहे वह अंतर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धाएं हों, वीआईपी की सुरक्षा का मामला हो, राजनीतिक परिवर्तन हो, सांप्रदायिक दंगे हों या विरोध प्रदर्शन हो या चाहे कुछ और.. मुझे जब एहसास कराया गया कि मेरा भी कोई मोल है तो मैंने राजनीति में इसलिए प्रवेश किया क्योंकि मैं अपने शहर को अपना सबकुछ देना चाहती थी। मैं दिल्ली में एक स्थायी सरकार चाहती थी जो केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर सके और दिल्ली को इसकी बहुत जरूरत है।
किरण ने लिखा है कि भले ही मैं चुनावी परीक्षा में फेल और असफल हो गई हूं लेकिन मैं अंदर से असफल और निराश नहीं हूं इसलिए मैं हार की पूरी जिम्मेदारी लेती हूं। गौरतलब है कि केजरीवाल के साथ अन्ना हजारे आंदोलन से जुड़ी रहीं बेदी को भाजपा ने अचानक चुनाव से चंद रोज पहले अपना मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित किया, हालांकि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करते हुए 70 में से 67 विधानसभी सीटों पर जीत दर्ज की।













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